बिहार की अतीत को बयां करती यह शहर..

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पटना: बिहार यानी विहार, जिसका अर्थ ही होता है भ्रमण करना। बिहार पर्यटन की दृष्टि से एक खासा मुकाम रखता है। बिहार में मंदिर, मस्जिद, किले-मकबरे और हजारों ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं, जो यहां के गौरवशाली अतीत की कहानी को बयां करते हैं। यह कहा जाए तो बेजा नहीं होगा कि बिहार की इतिहास उतनी ही पुरानी है जितनी भारत की।

भारत के निर्माण में भी बिहार ने एक अहम रोल अदा किया है। मैं आपको बिहार के अतीत में ले चलता हूं जहां आपको रोचक तथ्य मिलेंगे। अतीत में बिहार भी सत्ता, धर्म और शिक्षा का केंद्र रहा है। आज भी इनके अवशेष इस प्रांत के गौरवशाली अतीत को बयां करते थकते नहीं है।

यूनानी इतिहासकार और चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत मेगास्थनीज ने (350 ईपू-290 ईपू) अपनी पुस्तक इंडिका में इस बिहार के वैभव का उल्लेख किया है। भारत की यात्रा पर आने वाले अन्य विदेशी यात्रियों ने भी बिहार की प्रशंसा की है। मेगास्थनीज ने अपनी किताब में मगध की राजधानी पाटलिपुत्र की तुलना करते हुए कहा था कि पाटलिपुत्र के समक्ष रोम और एथेंस की हैसियत आधे से भी कम है।

यहां के प्राचीन और मध्यकालीन इमारतें पर्यटकों को ईसा पूर्व और बाद के दो हजार वर्षों के इतिहास से अवगत कराता है। यहां कुम्हरार परिसर, अगमकुआं, महेन्द्रूघाट, शेरशाह के बनवाए किले के अवशेष मौजूद हैं।

सबसे पहले बिहार की राजधानी पटना के बारे में बताते है। पटन देवी के नाम से प्रचलित पटना शहर बिहार की राजधानी होने के साथ ही एक महान ऐतिहासिक स्थल है।

प्राचीन समय में पाटलिपुत्र/पाटलिग्राम, कुसुमपुर आदि नामों से विख्यात रहे इस गौरवशाली नगर का ज्ञात इतिहास कम से कम 3000 वर्ष पुराना है। अजातशत्रु के पुत्र उदयभद्र ने 444-460 ई.पू में पाटलिपुत्र की स्थापना की थी और उसे अपनी राजधानी बनाया था। यह प्राचीन नगर पवित्र गंगा नदी के किनारे सोन और गंडक के संगम पर बसा है।

ऐतिहासिक भवनों के लिए प्रसिद्ध पटना का इतिहास पाटलिपुत्र के नाम से छठी सदी ईसापूर्व में शुरू होता है। तीसरी सदी ईसापूर्व में पटना शक्तिशाली मगध राज्य की राजधानी बना। अजातशत्रु, चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त द्वितीय, समुद्रगुप्त यहां के महान शासक हुए।

पटना एक ओर जहां शक्तिशाली राजवंशों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर ज्ञान और अध्‍यात्‍म के कारण भी यह काफी लोकप्रिय रहा है। यह शहर कई प्रबुद्ध यात्रियों जैसे मेगास्थनिज, फाह्यान, ह्वेनसांग के आगमन का भी साक्षी है।

महानतम कूटनीतिज्ञ कौटिल्‍य ने अर्थशास्‍त्र तथा विष्णुशर्मा ने पंचतंत्र की यहीं पर रचना की थी। वाणिज्यिक रूप से भी यह मौर्य-गुप्तकाल, मुगलों तथा अंग्रेजों के समय बिहार का एक प्रमुख शहर रहा है।

बंगाल विभाजन के बाद 1912 में पटना संयुक्त बिहार-उड़ीसा तथा स्वतंत्रता के बाद बिहार राज्‍य की राजधानी बना। शहर की बसावट को ऐतिहासिक क्रम के अनुसार तीन खंडों में बाँटा जा सकता है- मध्य-पूर्व भाग में कुम्हरार के आसपास मौर्य-गुप्त सम्राटों का महल, पूर्वी भाग में पटना सिटी के आसपास शेरशाह तथा मुगलों के काल का नगरक्षेत्र तथा बांकीपुर और उसके पश्चिम में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बसायी गयी नई राजधानी है।