बिहार के सभी प्रखण्डों में किया गया एक दिवसीय धरना प्रदर्शन

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पटना – बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर बिहार के सभी प्रखण्डों में किया गया एक दिवसीय धरना प्रदर्शन पूरे बिहार में सफल रहा। आज प्रखण्ड के शिक्षकों ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए प्रखण्ड विकास पदा. के समक्ष धरना एवं दिया ज्ञापन। शिक्षक संघ प्रदेश महासचिव आनन्द मिश्रा ने कहा कि बिहार के नियोजित शिक्षकों की सारी मांगे उचित एवम वाजिब ही नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार भी है।

बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति सरकार से मांग करती है कि हमारी मांग को यथाशीघ्र पूरी की जाए अन्यथा बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समिति के निर्णय के आलोक में चरणबद्घ आंदोलन करने को मजबूर होगी। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेवारी सरकार की होगी।

मांगपत्र:-

1.बिहार के सभी नियोजित शिक्षकों को पुराने शिक्षकों के भाँति वेतनमान एवम राजकर्मी का दर्जा प्रदान किया जाए।

2.नियमित शिक्षकों की भांति समान सेवाशर्त,नियोजन इकाई से बाहर स्थांतरण की सुविधा एवं नई बहाली में वेतन संरक्षण के लाभ के साथ दिया जाए।

3.सभी शिक्षकों को पुरानी पेंशन और ग्रुप बीमा से आच्छादित किया जाए।

4.वेतन निर्धारण की विसंगतियों को को दूर किया जाए यथा ग्रेड में 2.57 से गुणा करते हुए नवप्रशिक्षित शिक्षकों का वेतन निर्धारण यथाशीघ्र किया जाए।

5.अनुकम्पा नियमावली में शिथिलता बरतते हुए बिना शर्त लअनुकम्पा प्रदान किया जाए।

इन मांगों को पूरी न करने के स्थिति में बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति चरणबद्ध आंदोलन करेगी जो निम्न है:-

17 अगस्त को शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन एवम ज्ञापन सौपेंगी। 5 सितंबर गुरुवार(शिक्षक दिवस) को बिहार के सभी नियोजित/नियमित शिक्षक अपने मांगों के समर्थन में सरकार द्वारा आयोजित सम्मान समारोहो एवम कार्यक्रमों का बहिष्कार करते हुए पटना के गांधी मैदान में मुँह पर काला पट्टी बांध कर अपनी पीड़ा-वेदना का शांतिपूर्ण प्रर्दशन करेंगे।साथ ही शिक्षक दिवस के दिन ही सूबे के सभी शिक्षक संगठनों के शीर्ष नेतृत्वकर्तागण गांधी मैदान,पटना में गांधी मूर्ति के समक्ष एक दिवसीय अनशन भी करेंगे।

सरकार से अनुरोध है कि बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के पांच सूत्री मांगों को यथाशीघ्र मानकर बिहार के नियोजित शिक्षकों को सम्मान देने के साथ साथ उनको उनका अधिकार देने का कार्य करें। जिससे शिक्षा और शिक्षकों के प्रति सरकार का सकारात्मक पक्ष समाज को दिखाई पड़े।