बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के सभागार में दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन

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पटना – आज दिनांक 4 सितंबर 2018 को बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के सभागार में दो दिवसीय नेशनल काॅफे्रंस; राष्ट्रीय सम्मेलनद्ध का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का विषय कृषि पुस्तकालय एवं उभरते तकनिकों का पुनः अभियांत्रिकरण: चुनौतियाॅ एवं अवसर” था। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना एवं भारतीय कृषि पुस्तकालय एवं दस्तावेजी संस्था ;आल्दीद्ध के संयुक्त तत्वाधान में सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्धाटन मुख्य अतिथि सेन्ट्रल युनिवर्सिटी आॅफ साउथ बिहार के कुलपति प्रो0 एच0सी0एस0 राठौर एवं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय , पटना के कुलपति डाॅ0 रामेष्वर सिंह एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

स्वागत भाषण देते हुए आल्दी के जेनेरल सेक्रेटी डाॅ0 राकेश मणी शर्मा ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम में शरिक होने के लिए धन्यवाद दिया। संस्था के अध्यक्ष डाॅ0 के0 विरंजनयुलु ने सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्य, विषयवस्तु, तकनिकि सत्र के बारे में बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय सिर्फ पुस्तकों का ही संग्रह मात्र नहीं है अपितु वर्तमान समय में हरेक प्रकार की सूचना प्राप्त करने का केन्द्र है। कार्यक्रम में स्मारिका, पुस्तकों, संस्था का वेबसाईट एवं लाइब्रेरी सीडी का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में पुस्तकालय के क्षेत्र में अच्छे कार्य करने वाले तीन पुस्तकालय षिक्षकों को सम्मानित किया गया।

बिहार पशु विज्ञान विष्वविद्यालय, पटना के कुलपति डाॅ0 रामेष्वर सिंह ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय का जिक्र करते हुए कहा कि यह पुस्तकालय 1927 का एतिहासिक पुस्तकालय है। यहाॅ विद्यार्थियों एवं पुस्तकप्रेमियों को पढ़ने के लिए 15816 पुस्तकें, 5000 से अधिक सामयिक पत्रिकाएॅ, वाइ-फाई, इ-लाइब्रेरी जिसमें वेट सीडी, परजीवी सीडी, परजीवी के आॅकड़े, पशु-सीडी, पुस्तकों का सीडी, वेटनरी बुलेटिन, आॅनलाइन जर्नल इत्यादि सुविधाएॅ उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि आॅनलाइन शोधपत्र होने से शोधपत्र की नकल, प्रकाषनाधिकार का उल्लघंन इत्यादि पर नियंत्रण आसान हो गया है। मौजूदा समय में जब अधिकतर व्यक्ति के हाथ में इटरनेट से युक्त मोबाईल फोन हैं एैसे में बदलते समय के अनुरूप पुस्तकालयों के स्वरूपों में भी बदलाव आवष्यक है। अब विद्यार्थी एवं शोधार्थी आसानी से समूची दुनिया के लाइब्रेरी से मोबाईल एप्प के जरिये आॅकड़े एवं अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन में उपस्थित कृषि एवं पशुपालन वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधार्थीयों के प्रस्तुतीकरण से पुस्तकालय के क्षेत्र में चुनौतियों एवं अवसर के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी जिससे भविष्य की पुस्तकालय निति बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि विष्वविद्यालय पुस्तकालय को और ज्यादा संपन्न बनाया जायेगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेन्ट्रल युनिवर्सिटी आॅफ साउथ बिहार के कुलपति प्रो0 एच0सी0एस0 राठौर ने कहा कि विगत 15-20 वर्षों में सूचना तकनिक में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं जिसमें सूचनाओं का आदान-प्रदान काफी आसान हो गया है एैसे में पुस्तकालय का भी कार्यप्रणाली में परिवर्तन आवष्यक है। मौजूदा सम्मेलन किस प्रकार से कृषि, पशुपालन एवं संबधित विषय के सूचना को पुस्तकालय से आमजन, पशुपालक किसान को सरल एवं क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध कराया जा सकता है विशेषज्ञ इसपर चर्चा करें। उन्होंने सम्मेलन को शिक्षकों, विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों एवं पुस्तकप्रेमीयों के लिए काफी लाभप्रद बताया। धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डाॅ0 हंस राज ने किया। उद्धाटन सत्र के बाद तकनिकी सत्र का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में देशभर से पुस्तकालय कर्मी, पुस्तकालय पेशे से जूड़े लोग, सूचना विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, शोधार्थी, शिक्षक एवं छात्रों के अलावे आयोजक दल के सदस्य डाॅ0 दीपक कुमार, डाॅ सरोज कुमार, कुलसचिव डाॅ प्रदीप कपूर, डीन पीजी डाॅ0 हरिमोहन सक्सेना, पशुचिकित्सा महाविद्यालय के डीन डाॅ0 सामंतारे, डाॅ0 अंसारी, डाॅ के0जी0 मंडल, डाॅ संजय भारती, डाॅ सुषमा, डाॅ0 विपीन, विश्वविद्यालय के वरीय पदाधिकारी, शिक्षक, छात्र, कर्मचारी एवं प्रेस एवं मीडिया के लोग उपस्थित थे।