बिहार पीपुल्स पार्टी की पुनर्गठन की दिशा में बैठक आयोजित

120
0
SHARE

सहरसा – नौजवानों ने ‘बिहार पीपुल्स पार्टी’ के पुनर्गठन का जो नेक प्रयास किया है, वह खुद में सराहनीय है। 90 के दशक में बिपीपा एक धारदार विपक्ष की भूमिका में अवतरित हुई थी। जिसकी मुद्दा आधारित जमीनी लड़ाई को लोग आज भी गंभीरता से याद करते हैं। पार्टी का यह नारा – ‘हमारा लड़ना जिन्दाबाद, हमारा मरना जिन्दाबाद’ खुद में बहुत कुछ बयां करता है। आज जब शासक वर्ग सत्ता के दर्प में मदहोश है और विपक्ष हताशा में बेहोश तो बिपीपा जैसी जुझारू पार्टी की जरूरत आमजन शिद्दत से महसूस करते हैं। ऐसे में सहरसा के युवाओं का प्रयास अभिनंदनीय है। उक्त बातें वर्ष 95 में बिपीपा की युवा इकाई के पूर्व अध्यक्ष कुलानन्द यादव ‘अकेला’ ने कही। उन्होंने आगे कहा कि बिहार पीपुल्स पार्टी साम्प्रदायिक और जातिवादी सोच में यकीन नहीं रखती, बल्कि वह गांधी, लोहिया, जयप्रकाश की समाजवादी विचारधारा में विश्वास रखती थी और भविष्य में भी रखेगी।

अकेला ने आगे कहा कि पुनर्गठन की दिशा में विस्तृत बातचीत हेतु वे शीघ्र आनंद मोहन से मिलकर अगले माह अगली तिथि का निर्धारण करेंगे तथा झारखंड और बिहार सहित देश भर में फैले आनंद समर्थकों की पटना में बैठक आहूत की जाएगी। इस बारे में पूर्व सांसद लवली आनंद और फ्रेंड्स ऑफ आनंद के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चेतन आनंद से मेरी प्रथम दौर की बातचीत सम्पन्न हो चुकी है तथा उनकी सहमति पर ही मैं आज की बैठक में उपस्थित हुआ हूँ।

पार्टी के पूर्व महासचिव एस० के० ‘विमल’ ने अपनी यादों को ताजा करते हुए कहा कि बिहार के हर छोटी- बड़ी घटनाओं की खबर मीडिया को तब मालूम होता थी, जब पार्टी प्रमुख आनंद मोहन जी वहाँ पहुँच कर संघर्ष छेड़ देते थे। हम लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाते थे। आज पार्टियां संघर्ष करती नहीं, संघर्ष की औपचारिकताए निभाती हैं। ऐसे में बिपीपा का पुनर्गठन वक्त का तकाजा है। उन्होंने आगे कहा कि – हमारी राजनीति अर्थ और पद के लिए नहीं सेवा और संघर्ष के लिए है। आज की बैठक बिपीपा की पुनर्गठन की दिशा में “माइल स्टोन” साबित होगा।

पार्टी के पूर्व प्रान्तीय सचिव मो. फैयाज आलम ने अपने संबोधन में बताया कि बिपीपा अपनी विचारधारा और पार्टी चरित्र से न कभी समझौता किया है और न करेगी। MLA, MP वही बनेंगें जो पार्टी बनाएगा। इं. रमेश सिंह ने कहा कि कभी बिपीपा और आनंद मोहन जी की लोकप्रियता का आलम यह था कि वर्ष 91 में मधेपुरा और वर्ष 1994 में वैशाली संसदीय उपचुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां कहीं खड़ी नजर नहीं आतीं थीं और उनकी यही लोकप्रियता शातिर राजनीति की शिकार बनीं। हमें फिर से एक बार बिपीपा को लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचाना है। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष चंदन सिंह और संचालन अजय कु. बबलू ने की। मिथिला के प्रसिद्ध पर्व चोरचंदा तथा तीज के बावजूद बिपीपा के नाम पर संक्षिप्त सूचना पर बैठक में जुटी भीड़ से आयोजकों और कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखा गया।