बिहार फिल्म रत्न अवार्ड से नवाजे गए मनोज वाजपेयी

501
0
SHARE

पटना: पटना फिल्म फेस्टिवल के आखिरी दिन पटना के रवींद्र भवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम में बिहार में जन्मे और आज बॉलीवुड में अपनी धाक बनाने वाले अभिनेता मनोज वाजपेयी को बिहार फिल्म रत्न पुरस्कार से नवाजा गया। इस तरह लगातार सात दिनों से चल रहे पटना फिल्म फेस्टिवल का शुक्रवार को समापन हो गया।

राजधानी पटना में चल रहे पटना फिल्म महोत्सव के अंतिम दिन बीते जमाने की मशहूर अदाकारा सारिका ने वाजपेयी को यह सम्मान दिया। इस मौके पर मनोज वाजपेयी ने कहा, ‘मैं बिहार फिल्म सम्मान पाकर काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। फिल्मों को मनोरंजन का साधन माना जाता है लेकिन मनोरंजन के लिए बेहतर कहानी और फिल्मों की जरूरत होती है।

कोई फिल्म महोत्सव केवल फिल्मों को दिखाने का माध्यम भर नहीं होता बल्कि इस दौरान फिल्म के साथ-साथ उससे जुड़े लोगों को नजदीक से जानने-समझने का मौका भी मिलता है।”

मनोज वाजपेयी : एक परिचय

बिहार के पश्चिमी चंपारण के छोटे से गांव बेलवा में 23 अप्रैल 1969 को जन्मे मनोज वाजपेयी एक प्रयोगकर्मी अभिनेता के रुप में जाने जाते हैं। उन्होने अपना फिल्मी कैरियर 1994 मे शेखर कपूर निर्देशित अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म बैंडिट क्वीन से शुरु किया।

बॉलीवुड मे उनकी पहचान 1998 मे राम गोपाल वर्मा निर्देशित फिल्म सत्या से बनी। इस फिल्म ने मनोज को उस दौर के अभिनेताओं के समकक्ष ला खड़ा किया। इस फिल्म के लिये उन्हे सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

मनोज की प्रारम्भिक शिक्षा के.आर. हाई स्कूल, बेतिया से हुई। इसके बाद मनोज दिल्ली चले गये और रामजस कॉलेज से अपनी आगे की पढाई की। उन्हे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय मे तीन कोशिशों के बावजूद प्रवेश नही मिल सका। इसके बाद उन्होने बैरी जॉन के साथ रंगमंच किया। मनोज ने बैरी जॉन के मार्गदर्शन में स्ट्रीट चिल्ड्रेन के साथ काफी काम किया है।

मनोज बाजपेयी ने अपना कैरियर दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक स्वाभिमान के साथ शुरु किया। इसी धारावाहिक से आशुतोष राणा और रोहित रॉय को भी पहचान मिली। बैंडिट क्वीन की कास्टिंग के दौरान तिग्मांशु धूलिया ने मनोज को पहली बार शेखर कपूर से मिलवाया था। इस फिल्म मे मनोज ने डाकू मान सिंह का चरित्र निभाया था।

1994 मे आयी फिल्म द्रोहकाल और 1996 मे आयी दस्तक फिल्म मे भी मनोज ने छोटे किरदार निभाये। 1997 मे मनोज ने महेश भट्ट निर्देशित तमन्ना फिल्म की। इसी साल राम गोपाल वर्मा निर्देशित और संजय दत्त अभिनीत फिल्म दौड़ मे भी मनोज दिखे।

1998 मे राम गोपाल वर्मा की फिल्म सत्या के बाद मनोज ने कभी वापस मुड कर नहीं देखा। इस फिल्म मे उनके द्वारा निभाये गये भीखू म्हात्रे के किरदार के लिये उन्हे कई पुरस्कार मिले जिसमे सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर का सर्वोत्तम अभिनेता पुरस्कार (समीक्षक) मुख्य हैं।

1999 मे आयी फिल्म शूल मे उनके किरदार समर प्रताप सिंह के लिये उन्हे फिल्मफेयर का सर्वोत्तम अभिनेता पुरस्कार मिला। अमृता प्रीतम के मशहूर उपन्यास ‘पिंजर’ पर आधारित फ़िल्म पिंजर के लिये उन्हे एक बार फिर राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 2010 मे आयी प्रकाश झा निर्देशित फिल्म राजनीति मे उनके द्वारा निभाये वीरेन्द्र प्रताप उर्फ वीरू भैया ने अभिनय की एक नयी परिभाषा गढ दी।

यह किरदार महाभारत के पात्र दुर्योधन से काफी मिलता-जुलता है। इस फिल्म के प्रीमियर शो बाद कैटरीना कैफ अपनी सीट से उठीं और उन्होंने मनोज बाजपेयी के पैर छू लिये। कैटरीना ने कहा उन्होंने ऐसी एक्टिंग पहले कहीं नहीं देखी जैसी मनोज ने फिल्म में की हैं।

2012 मे आयी फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर मे मनोज सरदार खान के किरदार मे दिखे। इस फिल्म को और मनोज के किरदार को समीक्षकों की तरफ से खासी सराहना मिली। इसके बाद से आज तक मनोज का फिल्मी सफर जारी है और उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं जिनमें से आज उन्हें बिहार के फिल्म रत्न का पुरस्कार मिला है।

पटना फिल्म फेस्टिवल का थीम था- हमारा बिहार..जय बिहार

हमारा बिहार..जय बिहार की थीम पर पटना फिल्म फेस्टिवल 2016 की शुरुआत 9 दिसंबर से हुई। सात दिवसीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान कुल 36 हिन्दी, मैथिली, भोजपुरी, अंगिका और मगही के साथ चुनिंदा विदेशी फिल्में दिखायी गईं। बिहार वासियों ने इस दौरान फिल्म से जुड़ी तमाम बातें जानीं और साथ ही नामचीन हस्तियों से मुलाकात भी की।

सात दिनों में 36 फिल्में दिखाई गईं

फिल्म फेस्टिवल के समापन पर आज जानीमानी नृत्यांगना सोनल मानसिंह का नृत्य मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। पटना के रीजेंट और रवीन्द्र भवन में सात दिनों तक 36 फिल्में दिखाई गईं। जिनमें –
मैथिली : ललका पाग, कखन दुख हरब मोर, सस्ता जिनगी महग सेनूर।
अंगिका: खगड़िया वाली भौजी।
मगही: हैंडओवर।
हिन्दी : बाजीराव मस्तानी, एयरलिफ्ट, मसान, सुल्तान, ओ माई गॉड।

सभार: जागरण