बिहार में फिर आएगा कार्यकर्ता राज

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महागठबंधन ने अपने कार्यकर्ताओ की परेशानियों से रूबरू होने के लिए अब दरबार लगाने का फैसला लिया है जहां तीनो दलों के शीर्ष नेताओं के सामने कार्यकर्ता अपनी फरियाद सुनाएंगे।

बिना सेना के कोई भी जंग जीता नहीं जा सकता। सेनापति चाहे जितना ताकतवर हो, उसकी ताकत सही मायनों में सेना के अंदर ही छिपी होती है। वैसे अगर हम बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों का भी विश्लेषण करे तो महागठबंधन के जीत के पीछे कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे अहम रही। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के ताकत को बखूबी समझती है और समय पर उसका सही इस्तेमाल भी करना जानती है। यही वजह है की अब महागठबंधन नया प्रयोग करने जा रहा है। इस कड़ी में तीनों दलों के शीर्ष नेताओं के सामने राजद, जदयू और कांग्रेस के कार्यकर्ता अपनी परेशानी सुनाएंगे। इसकी शुरुआत जल्द ही होगी।

वैसे कांग्रेस में पहले से ही दरबार लगाकर पार्टी के बड़े नेता कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ते हैं। इस तर्ज पर अब राजद भी दरबार लगाएगा लेकिन महागठबंधन के कार्यकर्ताओं का सामूहिक मिलाप और उनके फरियाद को लेकर होने वाला प्रयास कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की बड़ी कोशिश है। वैसे जदयू के नेता भी ऐसे दरबार को बेहतर बता रहें हैं और उनका मानना है कि नीतीश कुमार के अगुआई में पहले भी कार्यकर्ताओं का सुध लिया जाता रहा है।

जाहिर तौर पर जदयू, राजद और कांग्रेस ने एक साथ अपने कार्यकर्ताओं को जोड़ने के साथ-साथ उनकी समस्याओं को लेकर कुछ नया किया है। वैसे महागठबंधन के इस कार्यकर्ता प्रेम को लेकर एनडीए के नेता कुछ और ही दलील दे रहें हैं और उनका मानना है कि यह सिर्फ लालू के निर्देश पर हो रहा है।

वैसे कार्यकर्ताओं को लेकर राजद सुप्रीमों ने भी पदाधिकारियों को दो टूक में चेतावनी दिया है कि इनको नज़रअंदाज और अपमान करने वाले बख्से नहीं जाएंगे। अब महागठबंधन के कार्यकर्ताओ के परेशानियों को दूर करने को लेकर सामूहिक दरबार का फैसला लिया गया क्योंकि अगर 2019 की लड़ाई को निर्णायक बनाना है तो कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है।