बिहार में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बायोफ्लॉक तकनीक पर जोर, युवा व्यवसाय के रूप में कर रहे फिश फार्मिंग

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पटना – बिहार में इन दिनों युवा मछली उत्पादन के क्षेत्र में बायोफ्लॉक तकनीक विधि को अपनाकर मछली व्यवसाय को अपना रहे हैं। बिहार में मछली उत्पादन के विकास के लिए मत्स्य विभाग मछली उत्पादक किसानों को काफी प्रोत्साहित कर रही है और हर प्रकार की सहायता भी मुहैया करा रही है।

वर्तमान समय में युवाओं द्वारा बायोफ्लॉक तकनीक विधि को अपनाकर मछली उत्पादन कर इसे तेजी से व्यवसाय के रूप में अपनाया जा रहा है। बिहार में भोजन में मछली की काफी माँग है। जिसे देखते हुए मछली व्यवसाय से जुड़े व्यवसायी आंध्र प्रदेश से मछली का काफी मात्रा में आयात करते हैं।

वहीं इस माँग को देखते हुए बिहार में इन दिनों युवाओ द्वारा मछली उत्पादन को एक व्यवसाय के रूप में यहीं विकसित कर अपनाया जा रहा है। मछली व्यवसाय में बिहार के युवा तेजी से जुड़ रहे हैं। युवाओं द्वारा मछली व्यवसाय को बायोफ्लॉक तकनीक विधि द्वारा कम लागत में उत्पादन कर अधिक पैसे कमाने का अच्छा जरिया माना जा रहा है।

बिहार में बायोफ्लॉक तकनीक के विकास के लिए मत्सय विभाग द्वारा भी काफी रिसर्च के कार्य किये जा रहे हैं। फिलहाल बायोफ्लॉक तकनीक के द्वारा युवाओं को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए बिहार के बेगूसराय जिले के ग्राम पिधौली तेघडा में के जी आर एम बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग के निर्देशक राजीव कुमार राय द्वारा प्रशिक्षण देकर मछली उत्पादन को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही केन्द्रीय मत्स्यकी शिक्षा संस्थान मबुंई के क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मोतीपुर के वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद अक्लाकुर के द्वारा तकनीकी सहयोग एवम युवाओं को प्रशिक्षण देने का भी कार्य किया जा रहा है।

वहीं राजीव कुमार राय द्वारा वर्तमान में 38 तारपोली एवं सीमेंट टैंक में मछली उत्पादन करने का भी कार्य कर रहे हैं। जो कि पूरी तरह सफल है। यहाँ बायोफ्लॉक तकनीक विधि का प्रशिक्षण लेने आये युवाओ का कहना है की युवा व्यवसाय के रूप में बायोफ्लॉक तकनीक विधि अपनाकर मछली उत्पादन का कार्य कर रहे हैं। जिससे रोजगार के साथ-साथ युवाओं को अच्छी आमदनी का स्रोत भी माना जा रहा है। इसे कम जोखिम में अच्छा उत्पादन भी माना जा रहा है।