बिहार में शिक्षा का ये हाल..

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रोहतास: बिहार के शिक्षा विभाग भले ही सूबे में कद्चार मुक्त परीक्षा लेने का फरमान जारी कर चूका हो। लेकिन एक प्रश्न उठता है कि आखिर बिहार में शिक्षा में सुधार कैसे होगा ? क्या उन शिक्षकों के बदौलत शिक्षा में सुधार आएगा ? जिन शिक्षकों को यह पता नहीं कि बिहार का उपमुख्यमंत्री कौन है ? इस तरह के कई प्रश्न है जो शिक्षको को नहीं पता है।

जिस विद्यालय की शिक्षिका को खुद देश के राष्ट्रपति , बिहार के उप मुख्यमंत्री शिक्षा मंत्री का नाम नहीं मालूम , उनको सही से दिन के सप्ताह को अग्रेजी मालूम नहीं । क्या उनसे भारत की रौशन भविष्य की आशा करना कितना सही है ? क्या इनके बदौलत बिहार के बच्चे बिना कदाचार के पास हो सकेंगे ?

ये कडवा सच रोहतास जिले के दिनारा प्रखंड के राजपुर मध्य विद्यालय में देखने को मिला। जहां पर लगभग 1020 बच्चे का भविष्य अंधेरे मे नजर आ रहा है। इस विद्यालय में चार ऐसे शिक्षिकाएं जिनको कुछ पढाने नहीं आ रहा है। वर्ग 5, 6 ,7,एवम 8 क्लास में अंग्रेजी पढ़ा रही है।

शिक्षिका को देखने से पता चला की ये बिहार के रौशन भविष्य के रचनाकार है जो बिहार सरकार के लचर शिक्षा प्रणाली का जीता जगता उदहारण है। मुखिया और पंचायत सचिव के रहमो करम से शिक्षिका बनी है। राजपुर मध्य विद्यालय में जिनको अंग्रेजी की प्रारंभिक ज्ञान नहीं मालूम है। और वह वर्ग 6 में अंग्रेजी पढ़ा रही है।

ये शिक्षिका तो सिर्फ एक उदहारण है जो सबके सामने आया है। इस तरह के न जाने बिहार में कितने ऐसे शिक्षक और शिक्षिकाएं होंगे जिन्हें प्रारंभिक ज्ञान नहीं होगा।

वर्ग पांच के शिक्षका से जब पुछा गया कि बिहार के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री कौन है। तो शिक्षका ने चुपी साध ली। उनको ये भी पता नहीं कि बिहार के उपमुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री कौन है।

वहीं वर्ग सात के शिक्षिका से पुछा गया की भारत के राष्ट्रपति का नाम तो हंस कर बोली नरेन्द्र मोदी। शिक्षिका को ये भी नही पता की भारत के राष्ट्रपति कौन है।

वर्ग आठ के शिक्षका का हाल भी कुछ ऐसा ही है उनसे जब पुछा गया की भारत के प्रधानमंत्री कौन है। तो जवाब दी प्रणव मुखर्जी। इस जवाब पर आप क्या कहंगे।

देश के प्रधानमंत्री भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना देख रहे है लेकिन क्या इन शिक्षक और शिक्षिकाओं के बल पर ये सपना कितना कारगर साबित होगा ये तो वक्त बतायगा। यह हाल सिर्फ रोहतास का ही नहीं है बलिक पुरे बिहार की कहानी है। कहीं विद्यालय है तो पढाई नहीं। कही ऐसे शिक्षक जो बिहार के रौशन भविष्य को सवारने में लगे हुए है।