बिहार सरकार राज्य के स्कूली बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है : डॉ० महाचन्द्र प्रसाद सिंह

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पटना – बिहार सरकार के पूर्व मंत्री एवं हम(से०) के वरीय नेता डॉ० महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने राज्य की गिरती शिक्षा व्यवस्था पर चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि बिहार में प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक शिक्षा व्यवस्था चौराहे पर खड़ी है| बिहार सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना पूरी तरह से बेईमानी है एवं राज्य के साथ धोखा है| बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे सरकारी स्कूल है जहाँ बच्चों को बैठने के लिए बेंच और कमरें तक नहीं है| कई स्कूल में बच्चों को बैठ कर पढ़ने के लिए बोरा या दरी तक नहीं है, बच्चे अपने घर से बैठने के लिए पलास्टिक ले कर जाते हैं| इस कड़ाके के ठण्ड में बच्चों को जमीन पर बैठ कर पढाई करना पड़ रहा है और कहीं–कहीं तो कक्षाएं पेड़ के नीचे या मंदिर में या पंचायत भवन में चल रहीं है| प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति राज्य में सबसे ज्यादा ख़राब है|

डॉ० सिंह ने कहा कि वो खुद नवादा, सिवान, छपरा, मुजफ्फरपुर सहित कई और जिलों के स्कूलों में जाकर जायजा ले चुके हैं| इस कड़ाके की ठण्ड में स्कूली बच्चों को जमीन पर बैठ कर पढ़ना काफी कष्टदायक है जिसके कारण बहुत से बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं| बिहार सरकार राज्य के स्कूली बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है|

डॉ० सिंह ने आगे कहा है कि राज्य के सभी पंचायतों में कम से कम एक प्लस टू स्कूल खोलने की योजना बिहार सरकार की थी लेकिन अभी तक दो हज़ार 465 पंचायतों में एक भी प्लस टू स्कूल नहीं खोला जा सका है| कुछ पंचायतों में मिडिल स्कूल को प्लस टू स्कूल में उत्क्रमित किया गया है परंतु नव उत्क्रमित स्कूलों की स्थिति और ज्यादा ख़राब है| कहीं पर्याप्त जमीन नहीं है और कहीं जमीन है तो भवन नहीं है| जीतनी तेजी से मिडिल स्कूलों को उत्क्रमित किया गया उतनी तेजी से सुविधाएं बहाल नहीं की जा सकी| अधिकतर उत्क्रमित विद्यालयों में प्रयोगशाला और पुस्तालय नहीं है| पुराने प्लस टू विद्यालयों के भी पुस्तकालय और प्रयोगशालायें लगभग दशकों से बंद पड़े है| इस संबंध में डॉ० सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख शिक्षा व्यवस्था एवं स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए भी आग्रह किया है|