बीएसएससी मामले के राजनीतिक संरक्षण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराये सरकार: माले

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‘सभी निर्दोष छात्रों पर से फर्जी मुकदमे को तत्काल वापस लिए जाएं’

पटना 9 फरवरी 2017: भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार को बीएसएससी की परीक्षा रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा है लेकिन पर्दे के पीछे के असली खिलाड़ियों को दंडित करने की आवश्यकता है। टाॅपर घोटाले से लेकर बीएसएससी घोटाले तक ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में शिक्षा व रोजगार के साथ खिलवाड़ चल रहा है, और इसकी सबसे ज्यादा मार दलित व कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। नीतीश कुमार ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को खुला धंधा बना दिया है, उसमें गरीबों के बच्चे आखिर कहां टिकेंगे। सामाजिक न्याय की दुहाई देने वाली सरकार दरअसल सामाजिक अन्याय की सरकार है।

उन्होंने कहा कि यह मामला ठीक टाॅपर घोटाले की तरह है। इसलिए पूरी आशंका है पर्दे के पीछे असली खिलाड़ियों को सरकार बचाने का काम कर सकती है। इसलिए हमारी मांग है कि इस पूरे मामले के राजनीतिक संरक्षण के पहलू की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। बिना राजनीतिक संरक्षण के इस तरह का कदाचार नहीं हो सकता।

उन्होंने आगे कहा कि बीएसएससी परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे आइसा नेताओं पर थोपे गये सभी फर्जी मुकदमों को सरकार अविलंब वापस ले।