बेटी से प्यार और अपराधी से प्रतिशोध की कहानी है ‘कठोऱ’

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मुंबई : कई बार इंसान की ज़िंदगी में ऐसी दशाएं भी आती हैं, जब उसे अपना जीवन कठोर नज़र आने लगता है या हालात उसे कठोर बना देते हैं। फ़िल्म का नाम भले ही कठोर है, लेकिन यह दर्शकों की भावनाओं को झकझोरती है। मानव के भीतर चलने वाले संघर्ष को भी हम कठोर ही नाम देंगे क्योंकि यहां मानव का मन सबसे प्रिय के लिए एक अदम्य लड़ाई पूरी कठोरता के साथ लड़ता है। फ़िल्म की कहानी में सेंट्रल जेल है जहां कार्यरत ५५ वर्षीय नीलकंठ चतुर्वेदी अगले दो वर्षो में रिटायर होने वाला है। पत्नी ज्योति और बेटी अनु के साथ नीलकंठ की छोटी सी दुनिया ख़ुशियों से भरी है। बेटी अनु में तो नीलकंठ की जान बसती है।

एक पुलिस वाला होने के बाद भी नीलकंठ बेहद दयालु व्यक्ति है जो अपनी बात से भी कभी किसी के दिल को नहीं दुखा सकता इसलिए बिलासपुर के सेन्ट्रल जेल में नीलकंठ सबसे ज्यादा खूंखार और गंभीर अपराधियों के खानपान का ध्यान रखता है और उनकी देखभाल करता है। बेटी अनु की सगाई हो जाती है पूरा परिवार खुश है। नीलकंठ अपनी सबसे प्यारी बेटी की खुशहाल बिदाई के लिए तैयारी करना शुरू कर देता है लेकिन बेटी शादी से पहले शहर में लगे मेले में चलने की जिद करती है जहां वह शादी से पहले अपने लिए पसंदीदा खरीदारी करना चाहती है।

मेले में नक्सली समूह हमला करता है और अनु इस नक्सली हमले में पदम् द्वारा मार दी जाती है। वह अनु की मौत का बदला लेना चाहता है। दोबारा डयूटी पर वापस आने के बाद उसका सामना अपराधी पदम् से होता है। वही नक्सली जिसने अनु को मार डाला और आज नीलकंठ को उसी पदम् की देखभाल करनी है। उसे रोजाना खिलाना पड़ता है।

शैतान पदम् को खिलाने के दौरान अपने क्रोध और पीड़ा को नियंत्रित करना नीलकंठ के लिए एक बड़ी चुनौती है। पदम् यह भी जानता है कि उसने नीलकंठ की बेटी को मार डाला था। इस बीच जब नीलकंठ की पत्नी ज्योति को पता चला कि वह अनु के हत्यारे को की देखभाल कर रहा है, तो वह दुखी और क्रोधित हो जाती है और उसे छोड़ देती है।

नीलकंठ, पदम् और ज्योति की कहानी एक कठोर मोड़ लेती है। कौन अधिक कठोऱ है? यह जानने के लिए दर्शकों को 31 अगस्त तक इंतज़ार करना होगा। पिछले दिनों फिल्म का ट्रेलर मुंबई में लांच किया गया। फिल्म में ललित परिमू के साथ शीतल डिमरी, अभिषेक पाण्डेय, दुर्गा सरकार और अखिलेश पांडेय प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे।