बोधगया में हो रहा है मिट्टी का काला कारोबार 

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गया – नीतीश सरकार भले ही बिहार में मिट्टी खनन पर सख्ती से अंकुश लगाने की बात करती है लेकिन सच यह है कि मिट्टी का काला कारोबार आज भी जारी है, पुलिस और खनन विभाग की अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है यह कारोबार। खनन भी ऐसा कि सुनने के बाद होश उड़ जाएंगे। किसी निजी जमीन की मिट्टियाँ नहीं बेचीं जा रही है बल्कि बिहार सरकार की जमीनों की खुदाई कर करोड़ो रूपये कमा रहे है मिट्टी कारोबारी। ग्रामीण धूल से है बेहाल तो वहीँ किसान मिट्टी के डस्ट से है परेशान। बोधगया में हो रहा है मिट्टी का यह काला कारोबार। 

बोधगया प्रखंड के नावां पंचायत जहाँ पिछले 3 महीनों में बिहार सरकार के 16 एकड़ जमीन की मिट्टियाँ खोद कर मिट्टी व्यवसायियों ने बेच दी है। मिट्टी की खुदाई के लिए पोपलेन मशीन सुबह 5 बजे से मिट्टी से पैसा खोदने में लग जाती है जो शाम के 5 बजे तक चलती है और ट्रैक्टर से मिट्टी की ढुलाई होती रहती है।

ग्रामीणों ने विरोध भी किया लेकिन कारोबारियों के दबंग होने के कारण ग्रामीण पीछे हट गए। बोधगया अंचल अधिकारी और स्थानीय थाने को इसकी जानकारी लिखित दी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्योंकि प्रशासन को भी पता है बजाप्ते इसके लिए उन्हें नजराना भी मिलता होगा। थोड़ी-बहुत जमीनों की बात नहीं है पुरे 16 एकड़ जमीनों के गड्ढे कर मिट्टी को निकाल लिया गया है। जगह-जगह खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे बने हैं तो वहीँ कुछ तालाब जैसे दिख रहे हैं। कुछ जमीन बिहार सरकार की है तो कुछ जमीन भूदान के तहत महादलितों को बसने के लिए दिया गया जमीन है लेकिन दबंगों ने उनकी जमीनों से भी मिट्टी निकाल कर तालाब जैसे आकार बना कर छोड़ दिया है। 16 एकड़ जमीन की मिट्टी के अवैध उत्खनन के बाद भी यह सिलसिला रुका नहीं है।
 

मिट्टी के खनन व व्यवसाय के लिए सरकार ने अब सख्त आदेश जारी किया है। सरकार ने यह निर्देश खनन माफियों पर नकेल कसने के लिए किया है। आपको बता दें कि, खनन और व्यवसाय के लिए 1972 में बिहार राज्य लघु खनिज समानुदान  नियमावली बनाई गयी थी।

अब बिहार में मिट्टी की खरीद-बिक्री बिना परमिट के नहीं होगी। मिट्टी के खनन व व्यवसाय के लिए लोगों को खान एवं भूतत्व विभाग से परमिट हासिल करना अनिवार्य होगा। यहां तक कि जिस जमीन से मिट्टी का खनन किया जा रहा है, उस जमीन का मालिकाना हक होते हुए भी मिट्टी के व्यवसाय के लिए सरकार से परमिट लेना जरूरी है।

बता दें कि बिहार में साधारण मिट्टी को लघु खनिज की श्रेणी में रखा गया है। इसके खनन और व्यवसाय के लिए 1972 में बिहार राज्य लघु खनिज समानुदान नियमावली बनाया गया था। लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका। इस नियमावली के नियम-27 में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि मिट्टी के खनन व खरीद-बिक्री के लिए विभाग से परमिट लेना अनिवार्य है। बिना परमिट, मिट्टी का खनन व व्यवसाय करने वालों के लिए सजा व दंड का भी प्रावधान किया गया है। लेकिन राज्य का शायद ही कोई जिला हो जहाँ इसके कारोबार के लिए सरकार से परमिट ली गई हो।

इस संबंध में खनन विभाग के सहायक निदेशक ने बताया कि जब-जब अवैध उत्खनन की सुचना मिलती है तो कानूनी कार्रवाई की जाती है। चाहे वह बालू हो या मिट्टी। इस वर्ष अवैध खनन करने वालों के खिलाफ तेजी लाई गयी है।