भागलपुर में हस्तकरघा एवं रेशम भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत राशि 13 करोड़ 64 लाख रूपये है – मुख्यमंत्री

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पटना – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिवेशन भवन में राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहले मैं आज राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस पर आप सबको शुभकामनायें देता हूँ। पूर्व के वक्ताओं ने आज के अवसर पर बुनकरों से जुड़ी हुई अनेक बातों को रखा है, हम सब यह चाहते हैं कि बुनकर भाई-बहन आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद शुरू से ही खादी, हैंडलूम एवं पावरलूम को बढ़ावा दिया गया। भागलपुर में बुनकरों से उनकी कठिनाइयों पर चर्चा की गयी थी। उनकी कठिनाइयों को बहुत हद तक समाप्त कर दिया गया है। हस्तकरघा को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की नीतियाँ बनायी गयीं। इसी के तहत अस्पतालों में सतरंगी चादर योजना की शुरुआत की गयी। अस्पतालों में मरीजों के लिए सातों दिन अलग-अलग रंग के चादर बदलने की व्यवस्था की गयी। हमलोगों ने हस्तकरघा क्षेत्र को उसमे सम्मिलित किया और उनके ही इस्तेमाल की इजाजत दी। ऐसी व्यवस्था की जाय कि सरकारी कार्यालयों में पर्दें, टेबल पर लगने वाली चादरें आदि का प्रयोग हस्तकरघा निर्मित ही हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं पहले से हस्तकरघा, खादी से जुड़े हुए लोगों की कठिनाइयों से अवगत रहा हूँ। चरखा चलाकर एक दिन में चालीस से पचास रूपये की आमदनी होती थी। हमने सात वर्ष पहले बुनकरों के बीच त्रिपुरारी चरखा का वितरण किया, जिससे उनकी कमाई प्रतिदिन 150 रूपये तक होने लगी। उन्होंने कहा कि अपनी यात्रा के दौरान मैं सिंगोरी गया था, जहाँ मुझे बुनकरों द्वारा यह बताया गया कि लूम की चैड़ाई बहुत कम है, जिससे बुनाई कार्य में काफी कठिनाई होती है। हमने तत्काल इस पर संज्ञान लेते हुए उद्योग विभाग को यह निर्देश दिया कि इनकी मांगों के अनुरूप 68 इंच के फ्रेम का लूम उपलब्ध कराया जाय। मुझे खुशी है कि आज से वितरण की शुरुआत हुई है। अब फ्रेमलूम खरीदने के लिए बुनकरों के खाते में सीधे पैसा जाएगा, साथ ही पुराने हैंडलूम को भी ठीक कर 68 इंच में बदला जायेगा।

उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग ने यह अच्छा काम किया है कि जिस चीज का उत्पादन हो रहा है, उस पर नंबर अंकित रहता है, जिससे उत्पादनकर्ता की पहचान हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मानना है कि गरीब लोग ईमानदारी से सेवा करते हैं, जिन्हें सत्ता और ताकत मिलती है वही गड़बड़ी करते हैं। अभी मंच से अंसारी समुदाय की लड़की ने अपनी बात रखी। मैं कहना चाहता हूँ कि आप सबको अपनी बात रखनी चाहिए। इस बुनाई कार्य में करीब-करीब सात समुदाय के लोग शामिल हैं। अंसारी, दर्जी, तांती एवं अन्य समुदाय के लोग इस कार्य में जुड़े हुए हैं और सबका अपना-अपना महत्व है। इस कार्य में हिन्दू, मुस्लिम सबलोग लगे हुये हैं, जिसका लाभ सबको मिलेगा। अभी इन सबको अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की गयी। मैं व्यक्तिगत तौर पर इससे सहमत हूँ लेकिन यह मसला राज्य सरकार के हाथ में नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी कृषि एवं बुनाई के कार्य में लगे हुये हैं। सरकार ने किसानों के हित के लिए कृषि रोड मैप बनाया। उन्होंने कहा कि बुनकरों को कठिनाई न हो, सरकार इसके लिए हरसंभव मदद करेगी। सभी बुनकरों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के उदेश्य से तत्काल राज्य सरकार दस हजार रुपये बैंक खाते में भेज देगी। इसके लिए 6727 हस्तकरघा को चिन्हित किया गया है। सबकी सूची बनाना अब आसान हो गया है क्योंकि उत्पादन नंबर से हस्तकरघे का नंबर मिल सकेगा। कम्बल बुनकरों को भी यह राशि हस्तांतरित की जाएगी। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का बुनकरों को लाभ देने के लिए बुनकरों के द्वारा जो अंशदान प्रतिवर्ष देना है, राज्य सरकार उनके बदले वह पैसा अब खुद वहन करेगी।
उन्होंने कहा कि सिंगोरी में सामान्य सुविधा केंद्र तो पहले से ही बना हुआ है, उसका जीर्णोद्धार कराकर उसमें प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए सवा करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गयी है। इन सबसे वस्त्रों की रंगाई एवं फिनिशिंग की उत्तम व्यवस्था हो सकेगी और बुनकरों को इस तरह की सुविधाओं का फायदा मिल सकेगा। इसके अलावा नालंदा में बुनकर प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र की स्थापना की जाएगी, जहाँ 45 हस्तकरघा, टेक्सटाइल टेस्टिंग लैब एवं डिजायन केन्द्र की भी व्यवस्था की जाएगी। भागलपुर में हस्तकरघा एवं रेशम भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत राशि 13 करोड़ 64 लाख रूपये है। यहाँ हस्तकरघा प्रशिक्षण, डिजायन एवं रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी।

उन्होंने कहा कि बुनकरों के काम का स्तर इतना बढ़े कि उनमंे प्रतिस्पद्र्धा की भावना विकसित हो। हमलोगों को खादी निर्मित एवं हैंडलूम निर्मित चीजें तो पसंद आती हैं, यह लोगों को भी पसंद आये। उन्होंने कहा कि यह आकर्षक बने ताकि नई पीढ़ी को भी यह पसंद आये। उन्होंने कहा कि बिहार में निर्मित खादी, हैंडलूम के उत्पादों की बिक्री दर में सब्सिडी दी जाएगी। उद्यमी पंचायत के दौरान बुनकरों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई थी, इनसे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि हस्तकरघा समितियों, संघों के कर्ज की माफी की जो मांग उठी है, उसके संबंध में फुल टाइम सेटलमेंट पर सरकार विचार करेगी। बैंकर्स समिति से भी इस संबंध में विचार-विमर्श किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अब्दुल कयूम अंसारी साहब की धरती है। आपलोग सब मिल-जुलकर प्रेम, मित्रता, भाईचारे के भाव के साथ रहें। समाज में सद्भाव बना रहे। कुछ चंद कारखाने लगने से विकास नहीं होता है। घर-घर का विकास हो, घर-घर की आमदनी बढ़े, यही हमारे विकास का मतलब है। उन्होंने कहा कि हर तबके का विकास हम चाहते हैं। हम न्याय के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। बुनकर संघ के चुनाव के लिए जो सहयोग राशि बुनकर संघों को जमा करनी पड़ती थी, वह राषि अब चुनाव एजेंसी में राज्य सरकार जमा करेगी। हमारी अपेक्षा है कि लोकतांत्रिक ढंग से आपलोग समय पर चुनाव करायें ताकि बुनकरों की समस्याएं, उनकी आवाज को बेहतर ढंग से सरकार के समक्ष रखा जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपलोगों के साथ निरंतर सम्पर्क, संवाद बना रहना चाहिए ताकि आपकी समस्याओं से हम अवगत हो सकें। हम आपका संस्थागत विकास चाहते हैं, हम चाहते हैं कि सिर्फ एक बुनकर का नहीं सभी बुनकरों का विकास हो। अभी प्रदर्शनी में मरीजों के वस्त्रों को दिखाया गया है, स्वास्थ्य मंत्री ने इससे प्रभावित होकर हैंडलूम से निर्मित वस्त्रों को सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराने की बात कही है। आज सांकेतिक रूप से पाँच बुनकरों को 68 इंच के फ्रेमलूम का वितरण किया गया है और 500 लाभार्थियों की सूची जारी की गयी है। सभी के पैसे खाते में चले जायेंगे। उद्योग विभाग भी अधिक से अधिक बुनकरों का रजिस्ट्रेशन कराये। उन्होंने कहा कि आपलोग पूरी बुलंदी से और मजबूती से काम कीजिये। आपके द्वारा बनाये गये उत्पादों की मांग बढ़ाने के लिए हमलोग प्रचार-प्रसार करेंगे। हमलोगों से जो भी संभव होगा सहायता उपलब्ध कराते रहेंगे।

मुख्यमंत्री का स्वागत उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ0 एस0 सिद्धार्थ ने सिक्की कला पर आधारित पुष्प-गुच्छ भेंटकर किया। बिहार राज्य हस्तकरघा बुनकर सहयोग संघ लिमिटेड के अध्यक्ष मोहम्मद नकीब अंसारी ने मुख्यमंत्री का स्वागत अंगवस्त्र भेंटकर किया। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने बुनकरों द्वारा निर्मित वस्तुओं से सजी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री द्वारा सांकेतिक रूप से पाँच लाभुकों के बीच 68 इंच फ्रेम लूम का वितरण किया गया, साथ ही 500 लाभार्थियों से संबंधित बुकलेट का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिहार राज्य हस्तकरघा बुनकर सहयोग संघ लिमिटेड पटना की वेबसाइट को भी लॉन्च किया। हस्तकरघा एवं रेशम भवन भागलपुर एवं बिहारशरीफ में बुनकर प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र, सिगोड़ी में सामान्य सुलभ सुविधा केंद्र का मुख्यमंत्री ने रिमोट के जरिये शिलान्यास किया।

कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय, बिहार राज्य हस्तकरघा बुनकर सहयोग लिमिटेड के अध्यक्ष मोहम्मद नकीब अंसारी, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ0 एस0 सिद्धार्थ ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विकास आयुक्त शशि शेखर शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक लोकेश सिंह, हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक नरेंद्र कुमार सहित उद्योग विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारीगण एवं हस्तकरघा से जुड़े हुए अनेक बुनकर उपस्थित थे।