भारतवर्ष की पहली ड्राई-केमिस्ट्री आधारित मिट्टी जाँच प्रयोगशाला का लोकार्पण वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया

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पटना – बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार द्वारा भारतवर्ष की पहली ड्राई-केमिस्ट्री आधारित मिट्टी जाँच प्रयोगशाला का लोकार्पण वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकास भवन, नया सचिवालय स्थित विभागीय सभागार में किया गया। कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर में सीमेट-इण्डिया की मदद से ड्राई-केमिस्ट्री आधारित मिट्टी जाँच प्रयोगशाला की स्थापना की गई है। भारतवर्ष में इस तरह की यह पहली प्रयोगशाला है। इस प्रयोगशाला में 2 तरह के मशीनों का लगाया गया है। पहला एक्स आर॰एफ॰ (ट्रेसर आई॰ फाइव) मशीन, जिसकी कीमत 65 लाख रूपये है। इस मशीन के द्वारा मिट्टी एवं पौधों में उपस्थित कुल पोषक तत्वों की जाँच तुरन्त की जा सकती है। दूसरा एम॰आई॰आर॰ स्पेक्ट्रोमीटर मशीन, इसकी कीमत 40 लाख रूपये है। इस मशीन के द्वारा मिट्टी एवं पौधों के नमूनों में उपस्थित पोषक तत्वों की स्पेक्ट्रल सिगनेचर प्राप्त होती है, प्राप्त स्पेक्ट्रल सिगनेचर को अन्य साॅफ्टवेयर के माध्यम से गणना कर लिया जाता है। यह मशीन किसी भी रसायन के उपयोग के बिना मिट्टी की जाँच करने की तीव्र एवं कम लागत वाली विधि है। इस मशीन के द्वारा 30 सेकेंड के भीतर मिट्टी के नमूनों की जाँच की जा सकती है।

मंत्री ने कहा कि इस प्रकार की मशीनों के द्वारा मिट्टी की डिजिटल मैपिंग, इन्फ्रारेड, एक्स-रे डिफ्रैक्शन तकनीकी के आधार पर मिट्टी के यौगिकों का गुणात्मक एवं मात्रात्मक विश्लेषण किया जाता है। इस प्रयोगशाला में प्रयुक्त मशीनों के द्वारा रिमोट सेंसिग, एकीकृत मिट्टी प्रबंधन तथा नए सांख्यिकीय उपकरणों का संयुक्त रूप से उपयोग किया जाता है, जो किसानों, प्रसार कर्मियों और नीति निर्माताओं को त्वरित समाधान हेतु तैयार किया गया है। इस प्रयोगशाला में उपयोग होने वाली मशीनों की खासियत यह है कि इन मशीनों को खरीद के उपरांत किसी भी तरह का खर्च जैसे कि विभिन्न प्रकार के केमिकल का व्यवहार नहीं होता है तथा इसके प्रयोग से मानवजनित गलतियों की सम्भावनाएँ भी नगण्य होती है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान मिट्टी जाँच के तरीके से 12 पारामीटर पर एक नमूना को जाँचने में औसतन 8 घण्टे का समय लगता है। इस प्रकार एक दिन में अधिकत्तम 50 नमूनों की जाँच की जा सकती है। इस नये मिट्टी जाँच प्रयोगशाला के स्थापित होने से 12 पारामीटर पर एक नमूना को जाँचने में मात्र 30 सेकेण्ड का समय लगता है, जिससे एक दिन में लगभग एक हजार नमूनों की जाँच की जा सकेगी। डाॅ॰ कुमार ने कहा कि इन मशीनों के रख-रखाव एवं प्रयोग की जानकारी हेतु सीमेट के सौजन्य से विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग के 2 तथा सीमेट के एक वैज्ञानिक को 7 दिनों का व्यक्तिगत प्रशिक्षण इसी वर्ष मार्च महीना में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान (आई॰सी॰आर॰ए॰एफ॰), नैरोबी, किनीया के द्वारा दिया गया है। इन स्वाॅयल इंटेलिजेंस सिस्टम (एस॰आई॰एस॰) आधारित नई पहल से मिट्टी परीक्षण और मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन करने में सहायक तथा यह तकनीकी कृषि उपज को बढ़ाने और किसानों को समृद्ध बनाने में मददगार सिद्ध होगी। पूरे भारतवर्ष में रिकाॅनाईजेंस स्वाॅयल सर्वे की शुरूआत 1955 ई॰ में बिहार से ही शुरू हुआ था, पुनः शुष्क मृदा रसायन (ड्राई स्वाॅयल केमिस्ट्री) की शुरूआत बिहार से ही शुरू हो रही है। यह हमलोगों के लिए गौरव की बात है।

इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के कुलपति डाॅ॰ ए॰के॰ सिंह, कृषि निदेशक आदेश तितरमारे, सीमेट के रीजनल टीम लीडर एंड्रियू मैकडाॅनल, सीमेट के सीनियर एग्रोनाॅमिस्ट एवं कन्ट्री हेड डाॅ॰ आर॰ के॰ मल्लिक, बिहार कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक, प्रसार शिक्षा डाॅ॰ आर॰के॰ सोहाने, कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक डाॅ॰ अरविन्द कुमार सहित कृषि विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।