भारतीय राजनीति के अधिकतर चमकते सितारे छात्र राजनीति के ही उपज रहे हैं – राज्यपाल

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पटना – बिहार में छात्र राजनीति का बड़ा लम्बा और गौरवपूर्ण इतिहास रहा है, परन्तु पुनः अब समय आ गया है कि बिहार की युवा छात्र शक्ति शिक्षा के विकास-प्रयासों को गति देने में दृृढ़ संकल्पों के साथ जुट जाए।

उक्त उदगार राज्यपाल-सह-कुलाधिपति सत्य पाल मलिक ने गुरूवार को पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह के अवसर पर पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ द्वारा स्थानीय एसके मेमोरियल हाॅल में आयोजित राज्य के विश्वविद्यालयों के छात्रसंघों के वर्तमान पदाधिकारियों केे एक दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। सम्मेलन ‘बिहार की राजनीति में छात्र नेताओं की भूमिका-सह-छात्र संवाद’ विषय पर आयोजित था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल मलिक ने कहा कि छात्रसंघ के नेताओं को महाविद्यालय/विश्वविद्यालय परिसरों में यह इस बात के लिए सहयोग करना चाहिए कि नियमित रूप से कक्षाएँ चलें, समय पर कदाचारमुक्त परीक्षाएँ आयोजित हों तथा छात्राओं को भरपूर सम्मान मिले। राज्यपाल ने कहा कि ऐकेडमिक कैलेण्डर के शत-प्रतिशत परिपालन, सी॰बी॰सी॰एस॰ के अनुरूप माॅडल पाठ्यक्रम का कार्यान्वयन, नियमित सत्र-संचालन, समय पर परीक्षा-आयोजन, परीक्षाफल प्रकाशन, बायोमैट्रिक हाजिरी एवं सी॰सी॰टी॰वी॰ कैमरों का संस्थापन, महाविद्यालय/विश्वविद्यालय भवनों में ‘गल्र्स काॅमन रूम’ एवं ‘वाशरूम’ का निर्माण -ये सारी बातें आज प्राथमिकताओं में शुमार हैं और इनका निश्चित समय-सीमा में परिपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। राज्यपाल ने कहा कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करायी जा रही है ताकि राजभवन एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यालय में बैठे यह देख सकें कि कक्षाएँ नियमित रूप से संचालित हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को विकसित करने के लिए क्रमशः ‘एकलव्य’ एवं ‘तरंग’ नामक विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताओं को पुनर्जीवित कराया जा रहा है। राज्यपाल ने छात्रसंघ के शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न हो जाने पर सभी छात्र-नेताओं, विश्वविद्यालय एवं प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों आदि को धन्यवाद देते हुए कहा कि चुनाव हो जाने से विश्वविद्यालय पदाधिकारियों एवं छात्रों के बीच एक सार्थक संवाद का मंच तैयार हो गया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि इससे न मात्र विश्वविद्यालय परिसरों में शिक्षा के माहौल में सुधार होगा, बल्कि राजनीति और समाज के अन्य सभी प्रक्षेत्रों को भी नई दिशा मिलेगी।

राज्यपाल ने अपने अत्यन्त सारगर्भित संबोधन में कहा कि शिक्षा पर बजटीय प्रावधान को और अधिक बढ़ाये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोई भी मुल्क धन-संपदा, सड़कों-पुलों, महल-अट्टालिकाओं आदि से ज्यादा अपने नागरिकों के चरित्र के बल-बूते महान और ताकतवर बनता है। नागरिकों के चरित्र का निर्माण शिक्षा के द्वारा ही होता है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने ‘द्वितीय विश्वयुद्ध’ के दौरान अपने शिक्षा बजट में कोई कटौती नहीं की थी। ब्रिटेन और जर्मनी में यह अलिखित समझौता था कि दोनों एक दूसरे के विश्वविद्यालयों पर युद्ध के दौरान हमले नहीं करेंगे। ये देश शिक्षा के महत्व को जानते थे। उन्होंने कहा कि हमें अपने विश्वविद्यालयों को इस रूप में विकसित करना होगा कि ये दुनियाँ के सौ उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों की श्रेणी में जगह बना सकें। उन्होंने विश्व के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थाओं में पढ़नेवाली ‘नोबेल पुरस्कार’ प्राप्तकत्र्ता प्रतिभाओं की संख्या बताते हुए कहा कि दूसरे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय सैकड़ों की संख्या में नोबेल पुरस्कार पाते हैं, जबकि हमारे देश में बमुश्किल कुल दर्जनभर लोगों ने ही ‘नोबेल पुरस्कार’ प्राप्त कर पाने में सफलता हासिल की है।

राज्यपाल ने कहा कि जाॅन डोबास ने लिखा है कि ‘छात्रसंघ के दफ्तरों में जाने से युवाओं का व्यक्तित्व जितना विकसित होता है, उतना कक्षाओं मंे घंटों पढ़कर भी नहीं हो पाता। राज्यपाल ने भारत में छात्र राजनीति के इतिहास पर व्यापक रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र की लड़ाई को जीतने में बिहारी छात्र-नेताओं से काफी ताकत मिली थी। उन्होंने 66-67 के यू॰पी॰ के छात्र-आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोहिया जी ने इसे ‘आजाद भारत की पहली पीढ़ी का विद्रोह’ माना था। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के अधिकतर चमकते सितारे छात्र-राजनीति की ही उपज रहे हैं। 

राज्यपाल ने कहा कि बिहार का अत्यन्त गौरवमय इतिहास रहा है। भारत का ‘स्वर्णयुग का इतिहास’ दरअसल बिहार का ही इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के युवा कठोर परिश्रमी और प्रतिभावान होते हैं। नई दिल्ली के छोटे से कमरे में तंगी में रहकर भी बिहारी युवा ‘इंडियन सिविल सर्विसेज’ की परीक्षा में काफी संख्या में सफलता प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि आज केन्द्र एवं विभिन्न राज्यों के प्रशासन में काफी संख्या में बिहारी आई॰ए॰एस॰ एवं आई॰पी॰एस॰ अधिकारी कार्यरत मिल जाते हैं। उन्होंने बिहार को विलक्षण प्रदेश बताते हुए कहा कि यहाँ जल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है। उन्होंने कहा कि ‘दूसरी हरित क्रांति’ बिहार में ही प्रतिफलित होगी। श्री मलिक ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत को अगला ‘नोबेल पुरस्कार’ किसी बिहारी और वह भी किसी कन्या प्रतिभा के माध्यम से ही मिलेगा।

उन्होंने कहा कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय में 29 में से 20 स्वर्णपदक छात्राएँ ही हासिल कर रही हैं। छात्राएँ ज्ञान विज्ञान के हर क्षेत्र तथा कबड्डी, बाॅक्सिंग, सूटिंग, मुक्केबाजी हर प्रकार के खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने छात्रों से भी पढ़ने-लिखने एवं सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने का आह्वान किया। छात्र संघ के चुनावों में छात्राओं की काफी कम संख्या में सफलता पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बिहार में छात्र-राजनीति में भी छात्राओं को आगे आना चाहिए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि छात्राओं को भरपूर सम्मान मिलना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि छात्र समस्याओं को लेकर राजभवन एवं राज्य सरकार दोनों बेहद संजीदा हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं के प्रति शिष्टतापूर्ण और सम्मान का व्यवहार हो, इसे सुनिश्चित कराया जाएगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विद्यार्थियों से राज्य सरकार की ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ का भरपूर लाभ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों को चार प्रतिशत एवं छात्राओं को एक प्रतिशत ब्याज-दर पर शिक्षा ऋण उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की गई है। श्री मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री एवं वे स्वयं छात्र राजनीति से ही उभरकर आज राज्य में शीर्ष पदों पर हैं, अतएव वे छात्र-हितों को कभी भी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि शिक्षक नियुक्ति एवं समय पर वेतन भुगतान को लेकर भी सरकार पूरी तरह गंभीर है।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने छात्रसंघ की ‘स्मारिका’ का का भी विमोचन किया। कार्यक्रम को पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रास बिहारी प्रसाद सिंह एवं पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष दिव्यांशु भारद्वाज ने भी संबोधित किया। संचालन पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष (पी॰यू॰) आशीष सिन्हा ने किया, जबकि धन्यवाद-ज्ञापन छात्रसंघ (पी॰यू॰) के कोषाध्यक्ष नीतीश पटेल ने किया। इस अवसर पर जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ हरिकेश सिंह, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, पूर्व छात्र नेता एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा, प्रो॰ शिवजतन ठाकुर, पी॰यू॰ छात्रसंघ की उपाध्यक्ष योशिता पटवर्द्धन आदि भी उपस्थित थे।