भारत में भी बहने लगी है दीपक के नेपाली संगीत की बयार

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अपने एक गीत में जावेद अख्तर लिखते हैं कि पंछी, नदी व पवन को झोंके को कोई सरहद रोक नहीं सकती। उसी तरह संगीत भी सीमाओं से परे है जिसको किसी भी बंधन में बांधा नहीं जा सकता। भारत और पाकिस्तान का संगीत दोनों ही देशों में लोकप्रिय है। यही कारण है कि पाकिस्तानी फनकार भारत में अपनी मौजूदगी को लेकर उत्साहित रहते हैं लेकिन अब हम बात करेंगे नेपाल की, जिसके साथ भारत का सांगीतिक रिश्ता भी गहराता जा रहा है।

भारत में अब नेपाल के संगीत की भी बयार बहने लगी है जिसका श्रेय जाता है वहां के संगीत सम्राट दीपक बज्रायार्च को। इनकी आवाज़ सिर्फ नेपाल की वादियों तक सीमित नहीं है, भारत में भी इनका जादू चलने लगा है जिसका श्रेय जाता है डिजीट्यून्स को। फनकारों को उनका हक दिलाने व प्रमोट करने के इरादे से बनाई गई इस संस्था से निर्माता निखिल पंचमिया का नाम भी जुड़ा है जो डिजीट्यून्स के जरिए नई प्रतिभाओं को प्रमोट कर रहे हैं। निखिल कहते हैं कि दीपक की आवाज़ में मिट्टी की महक है, यही कारण है कि उनके गीत तुरंत अपील कर जाते हैं।

दुनिया के कई देशों में दीपक के शोज़ हो चुके हैं। यूट्यूब पर भी इनके नेपाली गीत छाए हुए हैं। लाइव शो के दौरान दीपक खुद को हाथों में गिटार थामे होते हैं, पर ग्रुप के अन्य सदस्य ढोल, पखवाज व डमरू का इस्तेमाल कर गीत को जानदार बना देते हैं। जल्द ही दीपक अपनी कला का प्रदर्शन करने नेपाल से मुंबई आ रहे हैं। वह चाहते हैं कि देश की इस कलानगरी में उनकी कला के नज़ारे भी लोग देख लें।