भोला पासवान शास्त्री दलितों के नहीं बिहार के सर्वमान नेता

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पटना: बुधवार को राष्ट्रीय दुसाध महासभा के तत्वाधान में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भोला पासवान शास्त्री की 102 वीं जयंती अभियन्ता भवन पटना में आयोजित की गई। जयन्ती समारोह का उद्घाटन करते हुए कला एवं संस्कृति मंत्री शिवचन्द्र राम ने करते हुए कहा कि स्व. पासवान दलितों ही नहीं अपितु गरीब, गुरूबों, पिछड़ों अतिपिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों के सर्वमान नेता थे।

उन्होनें हमेशा सादा जीवन उच्च विचार की शैली में अपनी जिन्दगी जिये है। इसे आमलोगों में प्रचारित प्रकासित करने की जरूरत है। माननीय मंत्री जी ने महागठबंधन के सरकार के द्वारा शराब बंदी पर चर्चा करते हुए कहा इसे दलितों का जीवन स्तर में काफी सुधार आयेगा।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येन्द्र पासवान ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्व. शास्त्री ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, संघर्षशील सरल एवं शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वे संयुक्त बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री के पद पर सुशोभित हुए। वे तत्कालिन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के मंत्री मंडल में भी केन्द्रीय मंत्री के रूप में काम कर चुके थे। पासवान ने माननीय मंत्री को दस सूत्री मांगों का ज्ञापन सौपा, जिसमें आदम कद प्रतिमा पटना में लगाने की मांग की, तथा दरोगा राय पथ में स्मारक निर्माण हेतु भू-खण्ड आवंटित किये जाने की मांग प्रमुख है।

जयंती समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए माननीय मंत्री आलोक कुमार मेहता जी ने उन्हें महान समाजवादी विचारक दलितों, गरीबों का नेता बतायें। जयन्ती समारोह को संबोधित करते हुए राजद के राज कार्यकारिणी के सदस्य भाई अरूण कुमार ने कहा कि पटना में एक भी दलित मुख्यमंत्री का प्रतिमा नहीं है। इसलिए सरकार को अविलम्ब इनकी एक आदम कद प्रतिमा लगनी चाहिए।

जयंती समारोह को संबोधित करने वाले लोगों में भूषण पासवान, चंदन पासवान, अनुपम पासवान, प्रदीप पासवान, मनोज पासवान, डा. अभिजित पासवान, सुदर्शन पासवान, शत्रुध्न पासवान, डा. शशि पासवान, सकलदीप पासवान, सतीश पासवान, अशोक पासवान को भी महेन्द्र पासवान, बबलू पासवान, संजीत पासवान एवं रामधनी पासवान प्रमुख थे।