मगही भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर महिला समाज ने किया प्रदर्शन

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औरंगाबाद: समाहरणालय के समक्ष मगही महिला समाज के तत्वाधान में मगही भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने, अश्लील साहित्य, सिनेमा, विज्ञापन और पोस्टर पर रोक लगाने सहित कई मांगों को लेकर धरना दिया गया और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम से प्रेषित ज्ञापन जिला पदाधिकारी को सौंपा गया। धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए महिला समाज की सचिव अर्चना देवी ने कहा कि मगध की मातृभाषा मगही की उपेक्षा के कारण मगधवासी कुंठा और हीन भावना से ग्रसित हो गए हैं। एक समृद्ध भाषा होने के बावजूद इसे उचित सम्मान नहीं मिल रहा है दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों में अपसंस्कृति परोसकर भोगवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।

रोजगार के भरपूर संसाधन होने के बावजूद लोग पलायन को बाध्य है। शोषण और भ्रष्टाचार का साम्राज्य है। लेकिन हीन भावना और कुंठा के चलते मगध के लोग सभी मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं। इसलिए मगधवासी में स्वाभिमान और गौरव पैदा करने के लिए मगही भाषा को उचित स्थान देना आवश्यक है ताकि यह धरती अपनी उन्नत सभ्यता, संस्कृति एवं इतिहास को लोगो के सामने ला सके और विश्व में अपनी पहचान स्थापित कर सके। धरने को संबोधित करते हुए महिला समाज की संगठन सचिव सावित्री देवी ने कहा कि किसी भी समुदाय की पहचान उसकी अपनी मातृभाषा से होती है क्योंकि इसके माध्यम से ही हम अपनी भावनाओं, परंपराओं, लोक संस्कृति और रीति रिवाजों को प्रदर्शित कर सकते हैं। मगध भी एक उन्नत एवं समृद्ध प्रदेश है।

जिसके पास जीवन के हर पहलू को समृद्ध करने वाले उन्नत संस्कृति एवं प्राकृतिक संसाधन है परंतु अभी तक इसे उपेक्षित रखा गया है। धरना प्रदर्शन में गौरी शंकर यादव, रामाश्रय प्रजापति, युगल किशोर सिंह, रामप्रवेश शर्मा, मंतोष कुमार, भगवान राम, विनय गुप्ता, रणविजय सिंह, जगनारायण पासवान, संयुक्ता देवी, कल्याणी देवी, इंदु देवी, गीतांजलि देवी, सरिता कुमारी, सुनीता कुमारी, अनीता देवी, मनोरमा देवी, प्रभा देवी, गायत्री कुमारी, मीरा देवी, सीमा देवी, माया देवी आदि ने भी अपने अपने विचारों को रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीमा देवी ने जबकि संचालन कुसुम कुशवाहा ने किया।