मच्छरदानी में भैंस !

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दिलीप कुमार

कैमूर – जिले का एक ऐसा गांव जहां मच्छरदानी में भैंस रहती है, सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगता है लेकिन यह मामला बिल्कुल सही है। कैमूर जिले के मोहनिया थाना क्षेत्र के अमेठ पंचायत के सरेया गांव का है। जो मोहनिया प्रखंड से 7 किलोमीटर दूर बसा हुआ है। यहां की कुल आबादी लगभग 700 के आसपास है, और इस गांव में सिर्फ यादव बिरादरी के लोग रहते हैं। सभी लोग जानवर पशुपालन के तौर पर रखे हुए हैं, जो दुधारू है। गांव के सभी लोग अपने जानवरों को मच्छर से बचाने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करते हैं।

गांव के ग्रामीण बताते हैं कि गांव में मच्छरों का प्रकोप बहुत ज्यादा है। जिससे हमारी पशु मच्छरों के काटने से व्याकुल होकर कम दूध दिया करती थी। अच्छे से ना खाती थी, ना बैठ पाती थी। तब जाकर हम लोगों ने मच्छरदानी का प्रयोग करना शुरू किया, और गांव में जितनी पशु है उनके बराबर लंबाई चौड़ाई के मच्छरदानी सिल्वा कर लगाए। जिनमें गाय दिन में बिना मछरदानी की जाती है और रात होते ही सभी गायों को मछरदानी से पैक कर दिया जाता है, जिससे हमारी गाय प्रतिदिन एक से डेढ़ लीटर दूध ज्यादा देने लगी।

वहीं पशु डॉक्टर ने बताया कि मवेशियों को मच्छर और मखियों से कई प्रकार के रोग होते हैं। जानवरों को छोटे-छोटे कीट काटते रहते हैं जिसके कारण कई रोग उत्तपन्न होते हैं और दूध उत्पादन में भी इसका असर देखने मे मिलता है। जो पशु पालक और किसान इस तरह अपने मवेशी को रखता है उसे एक तो मवेशी के बीमारी से निजात मिलेगा और दूध भी बढ़ेगा। इस तरह जानवरो की बीमारी से भी पशु पालक मुक्त रहेगा। मच्छरों के काटने से वह अच्छे से खा नहीं पाती है, और जब शरीर को आराम नहीं मिलेगा तो वह दूध सही नहीं दे पाएगी। लेकिन पहली बार सुनने में आया है कि किसी गांव के लोग मच्छरदानी में पशुओं को रख रहे हैं बढ़िया है।