महिलाओं के प्रयास से ही राज्य में सफल हुई शराबबंदी- मुख्यमंत्री

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पटना, 13 जून 2016:– मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज पूर्णिया के इंदिरा गाँधी स्टेडियम में जीविका के प्रमंडल स्तरीय मद्य निषेध कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर लगभग 8 हजार जीविका की दीदियों को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं की मांग पर ही बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई तथा उनके ही प्रयास से यह सफल हुआ है। उन्होंने जीविका की दीदियों द्वारा शराबबंदी हेतु किये गए प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 में जीविका का गठन बिहार के कुछ प्रखंडो में किया गया था। आज बिहार में जीविका के 5 लाख स्वयं सहायता समूह है, जिससे लगभग 60 हजार परिवार जुड़े हुए है। हमारा लक्ष्य 2017 तक 10 लाख स्वयं सहायता समूह के गठन का है, जिससे लगभग डेढ़ करोड़ परिवारों को जोड़ा जाएगा। यह एक मौन क्रान्ति की तरह कार्य कर रहा है। आज जीविका के समूह द्वारा अनेक तरह की छोटी-छोटी व्यावसायिक गतिविधियाँ चलाई जा रही है। आने वाले दिनों में जीविका के उत्पादों की ब्रान्डिंग की जाएगी। उन्होंने कहा की स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं में जागृति आई है, बचत की प्रवृति बढ़ी है, आत्मबल बढ़ा है तथा आत्मनिर्भर होने की शक्ति बढ़ी है। स्वयं सहायत समूह का कार्य नारी सशक्तिकरण का उदाहरण है।

राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण, सड़क, पुल/पूलिया निर्माण, विद्युत सहित हर क्षेत्र में प्रगति हुई है। राज्य का आर्थिक विकास दर देश के औसत दर से लगातार आगे चल रहा है। गरीबी के कारण माता-पिता अपनी बेटियों को प्राथमिक शिक्षा से आगे की पढ़ाई नही करा पाते थे इसीलिए हमने बालिका पोशाक योजना की शुरूआत की। माध्यमिक शिक्षा हेतु बालिकाओं को प्रोत्साहन देने हेतु बालिका साइकिल योजना चलाई गई है, इसके परिणामस्वरूप नौवी कक्षा में अध्ययनरत बालिकाओं की संख्या 1.7 लाख से बढ़कर 8.5 लाख हो गई है। आगामी 2 अक्टूबर से विद्यार्थियों को इंटर के बाद की शिक्षा हेतु 4 लाख रूपयें का ऋण देने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का शुभारंभ किया जाएगा।

उन्होंने पूर्णिया के जीविका समूह के कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि पूर्णिया में जीविका समूह द्वारा जन वितरण प्रणाली की दुकान पूर्ण ईमानदारी से चलाया जा रहा है। उन्होंने शराबबंदी के विरूद्ध जीविका के दीदियों के कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि 9 जूलाई 2015 को ग्राम वार्ता के पटना में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा शराबबंदी की पूरजोर मांग पर ही मैंने घोषणा की थी कि अगली बार सत्ता में आने पर शराबबंदी लागू करेंगे। नई सरकार के गठन के उपरांत 26 नवम्बर 2015 को मद्य निषेध अवसर पर मैंने घोषणा की कि 1 अप्रैल 2016 से राज्य में शराबबंदी लागू की जाएगी। 1 अप्रैल 2016 को शराबबंदी लागू होने के उपरांत व्यापक जन समर्थन को देखते हुए 5 अप्रैल 2016 से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई। कानून के लागू करने से पूर्व जनवरी 2016 से ही मद्य निषेध हेतु व्यापक जन जागृति अभियान चलाया गया। 1.19 करोड़ अभिभावको से शराब नही पीने का संकल्प पत्र भरवाया गया, दीवार लेखन के माध्यम से 9 लाख से अधिक मद्य निषेध से संबंधी नारा का प्रदर्शन किया गया, लगभग 8 हजार 5 सौ नुक्कड़ नाटक आदि के आयोजन के माध्यम से वातावरण निर्माण किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा की आज समाज का हर तबका खुश है, यहां तक कि शराब पीने वाले लोग भी अब शराबबंदी की तारीफ कर रहे हैं। इससे शराबी के स्वास्थ्य एवं स्वभाव में भी परिवर्तन आया है। आज बिहार शराबबंदी लागू होने के उपरांत अन्य राज्यों में भी इसके पक्ष में मांग उठ रही है। उन्होंने जीविका के दीदियों से आह्वान करते हुए कहा कि इस जन चेतना को अनन्त काल तक बनाए रखना है तथा लगातार सतर्क रहना है। जहां भी शराब की भट्ठी मिले, उसे नष्ट कर दें, प्रशासन आपके साथ है। भले ही राज्य को शराब की बिक्री से 5 हजार करोड़ रूपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त हो रहा था, परन्तु यह नैतिक व्यवसाय नही था। लोगों द्वारा कई हजार करोड़ रूपये शराब पीने में व्यय किया जाता था। समाज में भी अशांति का वातावरण बना रहता था परन्तु अब स्थिति बदल गई है। एक अध्ययन के अनुसार जेल में सजा काट रहे मुजरिमों में से 41 प्रतिशत द्वारा शराब के नशे में अपराध किया गया पाया गया है। शराबबंदी के उपरांत राज्य में संज्ञेय एवं अन्य अपराधों के सभी शीर्षों में कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने शराबबंदी के उपरांत शराब के धंधे में शामिल लोगों के सामने उत्पन्न आजीविका की समस्या के समाधान की दिशा में जिला प्रशासन पूर्णिया द्वारा किये गए प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। पूर्णिया के लाइन बस्ती में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं द्वारा शराब का व्यवसाय किया जाता था। शराबबंदी के उपरांत उनके सामने आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गई थी। जिला प्रशासन की पहल से आज इस बस्ती की 9 महिलाओं को गौ पालन हेतु जिला गव्य विकास कार्यालय के माध्यम से स्वीकृत योजना के तहत् एक-एक लाख रूपये का चेक मुख्यमंत्री के हाथों वितरित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन पूर्णिया का यह कदम राज्य के लिए एक नजीर है।

उन्होंने कहा कि हम सिर्फ शराबबंदी में ही नही लगे हैं, जनता की शिकायत के निवारण हेतु कानूनी अधिकार प्रदान करने के लिए 5 जून से बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम को लागू किया गया है। महिला सशक्तिकरण हेतु राज्य सरकार की नौकरी में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। सरकार हर दिशा में कार्य कर रही है। मेधा घोटाला को मैंने जाँच का नही बल्कि अपराध का विषय मानते हुए पुलिस को अनुसंधान कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। सभी बी0एड0 काॅलेजों की भी जाँच कराई जा रही है कि काॅलेज में कक्षा का आयोजन होता है या नही, सिर्फ डिग्री तो नही बांटी जा रही है, हम धीरे-धीरे सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करेंगे।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने जीविका द्वारा लगाए गए स्टाॅल का अवलोकन किया तथा बारीकी से उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त किया। मुख्यमंत्री से पूर्व मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक ने भी सभा को संबोधित किया। स्वागत भाषण ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री अरविन्द कुमार चौधरी द्वारा दिया गया।

इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री श्री अब्दुल जलील मस्तान, कृषि मंत्री श्री रामविचार राय, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री श्री अवधेश कुमार सिंह, मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री पी0के0 ठाकुर, विकास आयुक्त श्री शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव शिक्षा श्री आर0के0 महाजन, प्रधान सचिव गृह श्री आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीश चंद्रा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष कुमार वर्मा, प्रमंडलीय आयुक्त श्री सुधीर कुमार, पुलिस महानिरीक्षक दरभंगा प्रक्षेत्र श्री उमाशंकर सुधांशु, पुलिस उप-महानिरीक्षक पूर्णियाँ क्षेत्र श्री उपेन्द्र कुमार सिन्हा सहित चारो जिला के जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।