मांझी का भाषण लंदन में

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बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि उनकी सरकार आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है और उनका काम अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि “मैं अपना समय और ऊर्जा हाथ में लिए गए कामों में लगाना चाहता हूँ। हमलोग हर दिन नई चुनौतियां का सामना कर रहे हैं जिनमें लोगों की जीविका, अधिक समावेशी विकास, आपदाओं का जाखिम, मानव संसाधन विकास, बैंकिंग का विस्तार, लोक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, व्यापक गरीबी, ऊर्जा की पर्याप्तता आदि शामिल हैं। लेकिन बिहार इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘हमलोगों ने उत्तरदायित्व, स्वच्छता एव पारदर्शिता के साथ विकास और सुशासन उपलब्ध कराने की राज्य सरकार की क्षमता का पुनरुद्धार किया है।’

मांझी 22 सितम्बर को ‘बिहार की कथा – राज्य का पुनरुत्थान, समावेश और विकास’ विषय पर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में सार्वजनिक व्याख्यान दे रहे थे। सत्र की अध्यक्षता हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य करण बिलमोरिया कर रहे थे।

अपना व्याख्यान आरंभ करते हुए मांझी ने बिहार के औपनिवेशक इतिहास को याद किया और रेखांकित किया कि कैसे राज्य को अपने विकास के मामले में अवरोधों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘शेष भारत से बिहार का अलगाव कोई हाल की परिघटना नहीं है। इसका एक लंबा इतिहास रहा है। बिहार औपनिवेशिक शासन के दौरान बंगाल प्रांत का हिस्सा था जहां की जमीन की काश्तकारी प्रणाली स्थायी बंदोबस्ती व्यवस्था के तहत सबसे अधिक प्रतिगामी थी।’

‘अभी किए गए अनेक अध्ययनों ने दर्शाया है कि राज्य के आर्थिक प्रदर्शन पर स्थायी बंदोबस्ती व्यवस्था का अभी भी प्रभाव पड़ रहा है। जब भारत आजाद हुआ तो अधिसंरचना, ऑद्योगीकरण और समाज विकास के अन्य सूचकों के लिहाज से बिहार का स्थान सबसे नीचे था। इस परिस्थिति को केंद्र सरकार की अन्यायपूर्ण नीतियों ने और भी बल दिया जिससे बिहार जैसे गरीब राज्यों और महाराष्ट्र-पंजाब जैसे संपन्न राज्यों के बीच फासला बढ़ता ही चला गया।’ मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा।

विगत कुछ वर्षों के दौरान हुई जनता दल (यूनाइटेड) सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मांझी ने कहा, ‘राज्य के साथ जनता का आमना-सामना सुनिश्चित करने वाली नीतियों में लोक सेवाधिकार अधिनियम 2011, जनता दरबार की बैठकें, बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 और नए लोकायुक्त अधिनियम को लागू करना, पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग आदि शामिल हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘कानून एव व्यवस्था की सुधरी स्थिति, मानव पूंजी में बढ़ते निवेश और ठोस भौतिक अधिसंरचना तथा सशक्त कृषि परिदृश्य’ ने बिहार को ‘संस्थागत सुदृढ़िकरण’ के मार्ग पर ला खड़ा किया।

अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा निभाई गई भूमिका पर टिप्पणी करते हुए मांझी ने कहा कि यह सारा कायापलट नीतीश जी के बिना संभव नहीं हुआ होता। ‘मैं आरंभ में ही स्पष्ट कर दूं कि यह कायापलट नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व के बिना संभव नहीं हुआ होता। मुझे मंत्रिमंडल के सदस्य के बतौर उनके साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और मैंने उन्हें बिहार के पुननिर्माण के लिए अथक प्रयास करते देखा है।