मानवता को प्राथमिकता देते हुए सर्जन डॉ अरुण कुमार ने बचायी मरीज की जान

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आरा- कहा जाता है कि धरती पर डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होता है। कई बार मरीज के साथ परिस्थितियां बिल्कुल प्रतिकूल होती हैं, जैसे कई मौके पर मरीज की हालत ऐसी हो जाती है कि जिंदगी और मौत के फासले की दूरी न के बराबर रह जाती है। बिल्कुल ऐसी ही परिस्थिती आज भोजपुर जिले के कोईलवर थाना क्षेत्र के कोईलवर गाँव के निवासी राज कुमार के साथ आ खड़ी हुई, गंभीर रोग से ग्रसित मरीज राज कुमार की हालत इतनी नाजुक थी कि किसी भी क्षण निराश करने वाली खबर परिवार वालों को मिल सकती थी। दो दिनों से आरा सदर अस्पताल में बवासीर का इलाज करा रहे राजकुमार के ऊपर कोई भी दवा असर नहीं कर रहा था, हालात और भी ज्यादा बिगड़ती जा रही थी। पुनः जाँच के दौरान डॉक्टर ने बताया कि फौरन सर्जरी करनी पड़ेगी क्यों कि इसके अलावा कोई भी अन्य विकल्प नहीं है।

सर्जरी को लेकर आ खड़ी हुई एक और बड़ी समस्या

डॉक्टर द्वारा सर्जरी की तैयारी किये जाने के क्रम में जब मरीज के ब्लड की जाँच हुई तो रिपोर्ट में पता चला कि मरीज के शरीर में मात्र 200 ग्राम ही खून की मात्रा है, ऐसे में में पीड़ित मरीज के परिवार के सामने पहाड़ जैसी समस्या आ खड़ी हुई, क्यों कि कोई भी डॉक्टर सर्जरी के लिए हाथ लगाने के लिए भी तैयार नहीं था। मरीज के परिवार के ऊपर मानों जैसे आफत का पहाड़ टूट पड़ा। अचानक से डॉक्टर 3-4 यूनिट ब्लड जुटाने को बोल दिए वरना मरीज के जान को खतरा है क्यों कि शरीर में ब्लड की मात्रा बहुत ही कम है। डॉक्टर द्वारा ऐसी निराशा भरी बात सुनकर मरीज के परिवार हर तरफ उम्मीद के भाव से देखने लगे।

आरा रेड क्रॉस में खोखला साबित हुई 24 घंटे की सेवा

मरीज के परिजन सर्जरी कराने को लेकर जैसे ही आरा रेड क्रॉस में ब्लड लेने पहुंचे तो वहाँ ब्लड बैंक के कर्मचारियों ने कहा कि यहाँ ब्लड नहीं है आप ब्लड डोनर की व्यवस्था कीजिये। ऐसे में एक साथ एक ही ब्लड ग्रुप के 3-4 ब्लड डोनर जुटाना बहुत बड़ी मुश्किल थी। तब जाकर ऐसे में स्वामी विवेकानंद सेवा संघ और आई विन्स के दर्जनों सदस्यों ने संयुक्त रूप से समाज के कल्याण के लिए एक साथ आगे आये। इस विपरीत परिस्थिति के दौरान नागेंद्र जी, प्रणय कुमार मधुकर, अक्षय कुमार, कौशल कुमार श्रीवास्तव, विनय कुमार, विकास कुमार उर्फ बल्ली, शैलेश कुमार राय और राहुल कुमार मदत के लिए सामने आए। इनमें से एक कार्यकर्ता ने एक यूनिट ब्लड दिया क्यों कि आरा रेड क्रॉस में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने कहा कि हम एक बार में मात्र एक यूनिट ब्लड ही दे सकते हैं। बड़े देर तक गुहार लगाने बाद भी कर्मचारी ने कहा कि और ब्लड लेने के लिए आपको रात में 9-10 बजे आना होगा, मगर इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपको ब्लड उपलब्ध कराया जाएगा क्यों कि हम नहीं रहेंगे। जब कर्मचारियों से यह कहा गया कि यहाँ तो 24 घंटे की सुविधा हाल ही में बहाल की गई थी उसका क्या हुआ इतना सुनते ही कर्मचारी बात को नजरअंदाज करते हुए वे लोग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ चलते बने।

भगवान के अवतार साबित हुए आरा सदर अस्पताल के डॉ अरुण कुमार

जहाँ एक तरफ रेड क्रॉस से मात्र 1 यूनिट ब्लड मिलने के बाद कोई भी डॉक्टर मरीज के सर्जरी के लिए तैयार नहीं था वहीं दूसरी ओर आरा सदर अस्पताल में कार्यरत सर्जन डॉ अरुण कुमार और एनेस्थीसिया डॉ राजीव रंजन पल-पल मरीज के बिगड़ते हालात को देखते हुए मरीज के शरीर में मात्र 200 ग्राम खून और बाहर 1 यूनिट ब्लड के साथ ही मरीज के सर्जरी करने को तैयार हो गए। बवासीर स्पेशलिस्ट डॉ अरुण कुमार ने बड़े ही सलीक़े से मरीज का सफल ऑपरेशन कर मरीज को मौत के मुँह से बाहर निकाल दिया। ऑपेरशन के बाद डॉ अरुण कुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि जब मरीज के परिजन रिस्क कवर करने के लिए तैयार होते हैं और जब वो पूरी तरह आश्वस्त होते हैं तो डाक्टरों स्वतंत्र होकर अपना कार्य करते हैं, इस केस में भी मरीज के साथ बिल्कुल ऐसा ही था मरीज के शरीर में खून की मात्रा बहुत ही कम थी। मरीज के शरीर में मात्र 2 ग्राम हेमोग्लोबिन प्रतिशत ही मरीज के शरीर में खून था जिसमें कोई भी डॉक्टर यहाँ तक कि बेहोश करने वाले भी रिस्क लेने को तैयार नहीं थे। तो हमने सोचा कि अगर 1 प्रतिशत भी मरीज के बचने का चांस है तो क्यों न कोशिश किया जाए जिसके बाद अन्य लोग भी मेरी बात से सहमत होकर तत्काल सर्जरी की तैयारी में तत्परता से जुट गए और बहुत रिस्क के साथ इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक समाप्त किये। अब मरीज के रोग से लड़ने की क्षमता भी बहुत कम है, भगवान का भरोसा है, हमने तो डॉक्टर होने के बावजूद भी मानवता को प्राथमिकता देते हुए अपने कार्य को सफल पूर्वक पूरा किया है आगे ईश्वर की दुआ की जरूरत है। बहरहाल मरीज की जान अभी भी खतरे में है, दवा के साथ-साथ दुआ की भी उतनी ही जरूरत है।