मिशन इंद्रधनुष के लिए 25 जुलाई से सघन दस्त पखवाड़ा का होगा आयोजन

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गया – जिलाधिकारी अभिषेक सिंह की अध्यक्षता में मिशन इंद्रधनुष का जिला स्तरीय टास्क फोर्स का बैठक किया गया। बैठक में बताया गया कि इस मिशन के अंतर्गत गया जिले में चिन्हित 1342 गांव में शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। प्रखंड के अन्य गांव में टीकाकरण को सुदृढ़ करने हेतु निर्देश दिया गया। 16 जुलाई से मिशन इन्द्रधनुष कार्यक्रम गया के चिन्हित 1342 गांव में प्रारंभ किया जाएगा। समीक्षा के क्रम में टिकारी, टनकुप्पा, शेरघाटी, मोहड़ा, मोहनपुर एवं डुमरिया का टीकाकरण कार्य संतोषप्रद नहीं पाया गया। इन्हें एक माह में कार्य में सुधार लाने हेतु निर्देशित किया गया। साथ ही सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को समन्वयन बैठक में भाग लेने तथा इसका शत-प्रतिशत आयोजन करने का निर्देश दिया गया।

समीक्षा में परैया, टिकारी, कोंच और अतरी में सप्ताहिक प्रखंड समन्वय की बैठक में पदाधिकारियों की उपस्थिति में कमी पाई गई। अतरी, परैया और कोच के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी से कारणपृक्षा तथा टिकारी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से कारणपृक्षा करने का निर्देश जिलाधिकारी ने दिया। जिलाधिकारी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि समेकित बाल विकास परियोजना एवं स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करेंगे तभी माता और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का समाधान हो पायेगा। पोषण के स्तर में वृद्धि हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सीडीपीओ और एमओआईसी के बीच अच्छा समन्वय रहेगा तो एक भी बच्चा टीकाकरण के लिए नहीं छूटेगा।

उन्होंने कहा कि प्रसव पूर्व जांच, टिकाकरण,पोषण इन सब कार्यक्रमों में दोनों विभाग का समन्वय होना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी किसी क्षेत्र में महामारी फैलती है तो सबसे पहले आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से पता चलता है। क्योंकि एकाएक किसी आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की उपस्थिति नगण्य हो जाती है। उन्होंने बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को कहा कि ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों के संबंध में पता चलने पर संबंधित बीमारी का पता लगाकर तुरंत प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से संपर्क कर उसका समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि साप्ताहिक समन्व बैठक का अपना एक महत्व है और इसे हर हाल में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समेकित बाल विकास परियोजना की प्रारंभिक जिम्मेवारी पोषण की है।

उन्होंने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि गया जिले में आकांक्षी जिला(एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट) के आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धि सबसे अच्छी रही है। यदि प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र अपनी उपलब्धि प्राप्त कर लें तो जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की स्वयं उपलब्धि प्राप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव के आंकड़ों में कमी है, इसमें निजी अस्पतालों के संस्थागत प्रसव को भी संकलित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट के लिए निर्धारित इंडिकेटर के लिए प्रत्येक माह में प्रतिवेदन करना होता है। जून तक के त्रैमासिक आंकड़ों में सभी विभागों के प्रतिवेदन शामिल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण, कृषि के क्षेत्र में अच्छी उपलब्धि रही है, जिसके कारण गया जिले की स्थिति पूरे भारत के एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में अच्छी रही है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक निर्धारित उपलब्धि प्राप्त कर लेना है और इसके लिए त्रिमासिक उपलब्धि प्राप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास अवसर है, कार्य शक्ति है, संख्याबल है। कुछ क्षेत्र में उपलब्धि अच्छी नहीं हो रही है, इसमें सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव की संख्या नहीं बढ़ रही है। इसमें निजी अस्पतालों के संस्थागत प्रसव के आंकड़ों को भी शामिल किया जाए। प्रसव पूर्व जांच के आंकड़ा में भी सुधार नहीं होने की जानकारी उन्होंने दी। उन्होंने कहा कि आशा को काम करना होगा। आशा को ससमय प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराना होगा। प्रोत्साहन राशि समय प्रदान किए जाने पर आशा पूरे मनोयोग के साथ काम करेंगी। उन्होंने कहा कि कुपोषण के आंकड़ों में भी सुधार की आवश्यकता है और इसके लिए सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जून के पश्चात प्रखंडवार समीक्षा की जाएगी और इसके उपरांत जिस प्रखंड में कमी पाई जाएगी तो उस पर विचार किया जाएगा।

25 जून से 7 जुलाई तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के संबंध में उन्होंने कहा कि इस समय डायरिया का प्रकोप बढ़ जाता है। और यह समय इस कार्यक्रम के लिए अच्छा है। इस अवधि में लक्षित समूह का पता चल जाएगा और उनका कवरेज भी हो जाएगा। उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आई ई सी मटेरियल प्राप्त कर अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लगवाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कन्या एवं महिलाओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी जितनी भी योजनाएं है उनका लाभ वंचित परिवारों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत सारे लोग अपनी बीमारी के इलाज में वर्षों की कमाई जमापूंजी को खो देते हैं। स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराकर वंचित लोगो को गरीबी से निजात दिलाया जा सकता है। इसलिए जमीनी स्तर पर आम आदमी को स्वास्थ्य सेवा का लाभ प्रदान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों से कहा कि जहां भी आंगनवाड़ी केंद्र नहीं खुल रहा है, उसे खुलवाए और उसके संबंध में WhatsApp पर मैसेज करने का भी उन्होंने निर्देश दिया।

25 जून से 7 जुलाई 2018 तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन गया जिले में किया जा रहा है। कार्यक्रम के अनुश्रवण हेतु जिला पदाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में जिला स्टेरिंग कमेटी का गठन किया गया है। इसके लिए 14 जून को जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जा चुका है।
सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के अंतर्गत 2 माह से 6 माह तक के बच्चे को ओआरएस का घोल और 10 एमजी का जिंक का डोज तथा 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे को आर एस का घोल एवं 20 एमजी के जिंक का डोज दिया जाएगा 2 माह से 6 माह तक के बच्चे को जिंक का डोज दूध में मिलाकर जबकि 6 माह से ऊपर तक के बच्चे को सीधे डोज दिया जाएगा। 

इस कार्यक्रम का उद्देश्य है राज्य में शिशु मृत्यु दर को शून्य पर लाना। उक्त कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सहित तमाम पदाधिकारी उपस्थित थे।