मुंबई में जुटे छठ व्रती

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मुंबई – बिहारी जहा भी गए अपनी संस्कृति साथ ले गए। इसलिए कहा जाता है,” जहाँ हैं बिहारी भाई वहां हैं छठी माई “! मुंबई में छठ पूजा अब इतने बड़े पैमाने पर होता है कि प्रसाशन को विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है। मुंबई में समुद्र तट पर बड़े- बड़े मंच लगाए जाते हैं। उस मंच पर बड़ी -बड़ी फ़िल्मी हस्तियां रहती हैं। लाखों की संख्या में उपस्थित लोगों के कारण यहाँ की सभी बड़ी राजनितिक पार्टियों के बड़े राजनेता मंच पर उपस्थित रहते हैं। छठ पूजा में बिहारियों की श्रद्धा , विश्वास, भक्ति एवं उनकी लाखों की संख्या में उपस्थिति के कारण महाराष्ट्र मुख्य मंत्री भी छठ पूजा कार्यक्रम शामिल हो चुके हैं।

मुंबई में रह रहे प्रवासी बिहारियों द्वारा मुंबई में किया जाने वाला सूर्य षष्ठी व्रत ( छठ पूजा ) मराठी , गुजरती सहित अन्य प्रदेशों लोगों के लिए भी श्रद्धा एवं विश्वास का त्यौहार बन गया है। मुम्बई का शायद ही को ईलाका होगा जहाँ छठ पूजा नहीं होता है। मुंबई के समुद्र तटों में गिरगाव चौपाटी, मालाबार हिल में बान गंगा, दादर में दादर चौपाटी, जुहू में जुहू चौपाटी, मलाड में अक्सा बिच, बोरीवली बीच , भयायंदर में जैसल पार्क एवं विरार बीच पर छठ पूजा का आयोजन किया जाता हैं।

मुंबई के मध्य एवं पूर्वी इलाकों में पवई झील, सायन तालाब, चेम्बूर तालाब ,मुलुंड तालाब , ठाणे तालाब, डोम्बिवली एवं कल्याण में बड़े पैमाने पर किया किया जाता है। वहीं मुंबई से सटे नवी मुंबई के वाशी, सानपाडा, जुईनगर , नेरुल , खारघर एवं पनवेल में तटों छठ पूजा का आयोजन किया किया जाता है।

मुंबई में बिहारियों का एक वर्ग जो गगनचुम्बी इमारतों में रहता है वो लोग अपनी छठ पूजा अपने स्विमिंग पूल में में ही कर लेतें हैं। वैसे मुंबई में ७० दशक से ही प्रवासी बिहारी छठ छठ पूजा करते आ रहे हैं। ८० के दशक में मुंबई में प्रवासी बिहारियों की संख्या और बढ़ गई , सब साथ मिलकर छठ पूजा करने लगे। ९० दशक में लोगों ने छठ पूजा समिति और संस्था बनाकर व्यवस्थित तरीके से एकत्रित होकर पूजा करने लगे।

सन २००० आते आते बिहारियों की सैकड़ों संस्थाएं रजिस्टर्ड कराई गईं और संस्थाओं ने मुंबई महानगर पालिका से अनुमति लेकर पूजा पूजा स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करना शुरू दिया जिससे हज़ारों की संख्या में लोग पूजा स्थल पर पहुंचने लगे। २००५ आते आते जुहू बीच पर तीन लाख से ज्यादा लोग इकठा होने लगे। इतनी बड़ी तादाद में लोगों के इक्ठा होने पर राजनीति शुरू हो गई, इसके कुछ नकारात्मक परन्तु अधिक सकारात्मक असर पड़े। लोग और अधिक संख्या इकठा होने लगे और २००७-८ आते आते जुहू बीच पर ५ लाख अधिक लोग छठ पूजा में शामिल होने लगे।

नवंबर २००९ को बिहार के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहारफॉउण्डेशन के मुंबई चैप्टर की स्थापना की। मुंबई चैप्टर चेयरमैन रवि शंकर श्रीवास्तव(आईआरएस ) ने ‘ छठ पूजा समन्वय समिति ‘ बनाकर मुंबई के विभिन्न इलाकों के छठ पूजा समितियों की समस्याएं सुनना एवं उन समस्यायों का समाधान करना शुरू किया और मुंबई की छठ पूजा को और व्यवस्थित ढंग से करने की ससर्थक कोशिश की। मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार (बिहार के गया जिले के मूल निवासी ) फ़िरोज़ अशरफ़ बताते हैं ,वो १९६५ में पत्रकारिता की पढाई करने लिए मुंबई आये थे ,उन दिनों ‘ बिहार एसोसिएशन ‘ ही बिहारियों की एकमात्र संस्था थी। चूकि बिहार एसोसिएशन अल्केम लेबोरटरी के मालिक सम्प्रदा प्रसाद सिंह की संस्था थी तो वहा सभी बड़े बिहारी इकठे होते थे और १९५० के दशक से ही उदयभान सिंह , उमाकांत मिश्र, भगवत झा, तिलकधारी झा आदि गणमान्य बिहारियों ने छठ पूजा का सार्वजानिक आयोजन शुरू कर दिया था।

उन्होंने बताया कि ६० और ७० के दशक में भी बहुत प्रवासी बिहारी थे उसमे ९५% मजदूर तबका था जो बिना परिवार के मुंबई में रहता था और छठ करने बिहार जाता था। उन दिनों बिहार को मुंबई में बिहारी मज़दूरों के लिए जाना जाता था। ८० के दशक से बिहारियों ने रोजगार और स्थाई नौकरी शुरू की और और साथ में परिवार रखना शुरू किया फिर यही छठ पूजा करने लगे। ९० के दशक से बुद्धिजीवी बिहारी मुंबई आने लगा ये सभी अपने परिवार के साथ रहते थे और और यही छठ पूजा करते थे। २००० बाद से सरकारी अधिकारी भी ट्रांसफर करा कर मुंबई आने लगे। आई ए एस , आई पी एस, आई आर एस, बैंक, रेलवे में इतने बिहारी हो गए कि अब इनके नाम से बिहार को जाना जाने लगा। ये सभी लोग यही बड़े ही भव्य तरीके से छठ पूजा करते हैं। आज मुंबई में हम सभी बिहारियों की शान और पहचान है छठ पूजा।