मुख्यमंत्री काफिले पर हुए हमले में जाँच टीम गठित होने के बाद टीम पहुंची नंदन गांव

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बक्सर- सूबे के मुखिया नीतीश कुमार के काफिले पर शुक्रवार को हुए हमले पर जाँच टीम गठित होने के बाद कमिश्नर आनंद किशोर एवं आईजी नैयर हसनैन खां द्वारा जाँच शुरू कर दी गयी हैं। उन्होंने गाँव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से बात की एवं गाँव में घर-घर जाकर घटना से संबंधित जानकारी हासिल की तथा घटना की जड़ तक जाने का प्रयास किया, वहीं ग्रामीण महादलित महिलाओं द्वारा विरोध का कारण नीतीश सरकार के सात निश्चय योजना के तहत चल रहे विकास कार्यो की पोल खोल रहा है।

नंदन गांव में शुक्रवार को पथराव की घटना हुई थी। इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। इसकी जांच जारी है। पुलिस ने पूछताछ के लिए लगभग डेढ़ दर्जन लोगों को उठाया है। वहीं दूसरी तरफ जांच अधिकारियों की दल शनिवार को नंदन गांव पहुंचा। जहां कमिश्नर आनंद किशोर व आईजी नैयर हसनैन खां ने नंदन गांव में भ्रमण कर के लोगों से मिलकर ग्राम पंचायत पर आमसभा बुलाई। जहां उपस्थित लोगों ने सबके सामने कहा। हमारे गांव में जो विकास हुआ है। वैसा किसी-किसी गांव में होता है।

पत्थरबाजी करने वाले लोग कहींं और से आए थे। यह हमारा किया धरा नहीं है। वहीं महादलित के लोग अपनी समस्या बता रहे थे। अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के पास गए थे, भ्रमण के दौरान वार्ड पार्षद और ग्रामीण का कहना है की लोग आए थे। बावजूद इसके घटना की बोलती तस्वीरें सबके सामने हैं। जिसमें महिलाए और बच्चियां भीड़ में युवक भी शामिल थे। शरारती तत्व कुछ गिरफ्तार हैं, कुछ घटना के बाद से गांव छोड़ फरार हैं। जिनकी पहचान में पुलिस जुटी है।

आयुक्त ने कहां जांच के बाद तय होगी कार्रवाई –

कमिश्नर आनंद किशोर जब नंदन गांव पहुंचे तो उन्होंने महादलित बस्ती होते हुए, वार्ड छह और सात का भी मुआयना किया। कहां तक गली और नाली बनी है। उसका अवलोकन करने के बाद उन्होंने लोगों से घर-घर जाकर बात की। पंचायत भवन पर ग्रामीणों को बुलाकर सभी का बाते सुने। मीडिया द्वारा पूछने पर उन्होंने कहा अभी जांच चल रही है। सभी पहलू पर विचार किया जा रहा है। जहां तक विकास की शिकायत है। वह सिर्फ एक बहाना है। घटना के पीछे कौन-कौन लोग शामिल है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। वीडियो फुटेज के आधार पर और कॉल डिटेल भी खंगाले जा रहे हैं, और जो भी दोषी पाया गया उन पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

वहीं ग्रामीण महिलाओं की माने तो सात निश्चय के विकास कार्यो का ना होना और सूबे के मुखिया द्वारा इन्ही कार्यो को लेकर अपनी पीठ थपथपाना जैसा प्रतीत होता हैं। जहाँ दिखावे के लिए नल तो लगा दिया गया हैं लेकिन उसमें जल नहीं हैं और सड़क एवं गलियों की हालत तो आप देख ही रहे हैं। तथा उनके द्वारा ये बताया गया कि हम अपनी दुःखो और मांगो को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने गये थे, लेकिन हमें मारा पीटा जाने लगा।

मुख्यमंत्री के काफिले पर हमले जैसी बड़ी घटना पर बक्सर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा हैं, एवं सात निश्चय के विकास कार्यो की पोल भी खोल रहा हैं। जरूरत हैं प्रशासन को अपनी खुफिया तंत्र को मजबूत करने की साथ ही सरकार को अपने अधिकारियों पर निगरानी की।