मुख्यमंत्री नितीश कुमार का मध् निषेध दिवस पर की शिरकत , महाराष्ट्र पर दिया बड़ा बयान

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महाराष्ट्र मुद्दे पर बड़ा बयान दिया नीतीश कुमार ने कहा की जो भी परिस्थिति है, जो भी होना था, वो हुआ है। इसमें कोई खास बात नहीं है।जिन्होंने इस्तीफा दिया उसी से जाकर प्रतिक्रिया ले।ये मौका था नीतीश कुमार जब मध निषेध दिवस पर पटना के बापू सभागार, अशोक कन्वेंशनल हॉल में शिरकत करने पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 नवंबर को हम सब लोगो ने मध निषेध दिवस मनाना शुरू किए थे। 2011और शराबबंदी लागू करने देने के बाद हम लोगो नशा मुक्ति दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है।

नीतीश कुमार ने कहा कि मैं उस वक़्त को याद करता हूं की जब इंजीनियरिंग कॉलेज के फर्स्ट ईयर में कॉलेज में हमारा नामांकन हुआ तो हम एक लॉज में रह रहे थे और वहां महीने के पहले चार पांच दिनों में रात में सुनते थे कि लोग घर मे लोग झगड़ा कर रहा है और आपस मे गंदी गंदी गालियों का प्रयोग करते थे। तो जब पता किये की ये लोग तनख्वाह मिलने के शराब पी कर घर मे झगड़ा करते है।उस समय हमारी उम्र 16 से 17 वर्ष की थी।उस समय मेरे मन मे बात आई कि लोग नौकरी करते है पैसा खर्च करते है शराब पीते है और घर मे झगड़ा करते है तो उस समय से ही मेरे मन में यह बात आई कि यह तो बड़ी बुरी चीज है।इसके बाद छात्र जीवन से आगे राजनीत जीवन मे आये तो मेरे मन मे हमेशा यह बात रही, की बिहार में शराबबंदी लागू हो।लेकिन एक बार 1977 मे लागू होने के बाद यह पूरे तौर पर कामियाब नही हो सकी,सफल नही हो पाने को लेकर मन मे हमेशा एक भ्रम रहता था कि कैसे करे।

सत्ता में आने के बाद मेरे मन मे निरंतर यह बात थी कि पहले अभियान चलाए की लोग शराब पीना बंद करे।ये सब काम हमलोगों ने करना शुरू किया।तो जैसा हमने कहा कि शराब पीनो वालो की संख्या बढ़ती चली गई।जो 9 जुलाई को मीटिंग में महिलाओं की मांग पर की शराबबंदी लागू करिए,तो मेरे मन मे जितनी भी आशंकाएं थी कि शराबबंदी नही लागू कर पाएंगे। वो सब पता नही दूर हो गया।तो मैंने माइक पर चर्चा कर दी कि अगली बार आ जायेंगे तो शराबबंदी लागू कर देंगे और उसका पूरे बिहार में लोगो के मन पर ये प्रभाव पड़ा।महिलाओं को बच्चो को लगने लगा,और उसके बाद जैसे ही बिहार के लोगो ने मुझे काम करने का मौका दिया तो ये 26 नवंबर को जब मध निषेध दिवस था तो उसी दिन 2105 में हमने कह दिया इसके लिए पूरी तैयारी हो और 1 अप्रैल से 2016 हमलोग शराबबंदी लागू करेंगे और बाद बड़े पैमाने पर कानून में संसोधन किया गया।वो संशोधन 30 मार्च को ही हो गया।लेकिन उसके लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला पूरे बिहार में, जो अभियान चला उसमे जीविका का, शिक्षा विभाग का बड़ी भूमिका हुई और इस अभियान को इन लोगो के माध्यम से पूरा किया गया।पूरे बिहार में बच्चो के पिता ने एफिडेविट लिख कर दिया और 1 करोड़ 19 लाख लोगों ने एफिडेविट करके अपने बच्चों को दिया की हम शराब नहीं पिएंगे और शराबबंदी के लिए प्रयास करेंगे।इसके लिए 9 लाख जगहों पर नारे लिखे गए 25 लाख जगहों पर नुक्कड़ नाटक दिखाया गया और जगह जगह गीत गाते गए तो इस तरह का अभियान चलाया गया और इस अभियान का पूरा जनसमर्थन था।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जब इस कानून का अमेनमेन्ट कर रहे थे विधानसभा सहित विधानपरिषद में भी सभी लोगो ने संकल्प लिया था और पुलिस वालों ने भी संकल्प लिया कि पूरे तौर पर शराबबंदी के पक्ष में रहेंगे।अब ये सब होने के बाद बीच बीच कुछ लोगो का दिमाग तो गड़बड़ तो होता ही है। आप कितना भी कुछ कर लीजिए हर आदमी को ठीक कर लीजिएगा?आज कल कितना तरह का लोग बोलता है इतना तरह का काम हुआ।उसके बाद भी हमने साहस नहीं छोड़ा अभियान चलाते रहे।जिस तरह से 21 जनवरी 2017 में मानव श्रृंखला बनी पूरे बिहार में हम लोगों का अंदाज था की दो करोड़ लोगों की भागीदारी होगी लेकिन अचंभे की बात है कि क्या मानव श्रृंखला बनी एक लाइन में लोग खड़े नहीं हो सके एक लाइन के पीछे दूसरा लाइन तीसरा लाइन चौथा लाइन और इस तरह से पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनी उस मानव श्रृंखला का कुल मिलाकर जो आकलन हुआ वह 4 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने मानव श्रृंखला में हिस्सा लिया दुनिया में आज तक इतनी बड़ी मानव श्रृंखला नहीं बनी।

उसके बाद हम लोगों ने बाल विवाह दहेज प्रथा के खिलाफ 21 जनवरी 2018 में मानव श्रृंखला बनाई थी वह भी बहुत अच्छी मानव श्रृंखला थी लेकिन जिस प्रकार शराबबंदी और नशा मुक्ति के लिए जो मानव श्रृंखला बनाई थी उसमें 14,000 किलोमीटर तक मानव श्रृंखला बनी थी।

हम तो निरंतर इसकी समीक्षा करते रहते हैं लेकिन कुछ लोग गडबड़ करने वाले होते हैं।आज कल सब बोलता है कि होम डिलीवरी हो रहा है।ये होम डिलीवरी वाला बात कौन कौन प्रचारित कर रहा ये आप जानते है?जिसको होम में पीने की आदत होती है,वही होम डिलीवरी की बात कहता है वो पीने वाला और ये कारोबार जो इन चीज़ों का धंधा करना चाहता है वैसे लोगो के मन में ये बात आती है।

इस मामले 2 लाख से ज्यादा लोगो पर मुकदमा हुआ, जेल के अंदर भी लगभग 8 हज़ार लोग है।बहुत लोग आजकल प्रचारित क्या कर रहा है की 2 लाख गरीब गुरबा लोग जेल में है।हमने तो कहा कि बिहार में जेल में रहने की कैपिसिटी 40 हज़ार है ये दो लाख आदमी कहा से जाएंगे।ये कभी संभव है।लेकिन तरह तरह का प्रचार कर रहे है

जो लोग कमाते थे अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद कर देते थे।घर मे लौट कर जाते थे झगड़ा करते थे।क्या हाल महिलाओं का क्या, हाल बच्चो का,
तो ये चलाया गया और इसका कितना लाभ हुआ। हम तो पूरे बिहार में घूमते रहे महिलाओं से पूछते रहे कि अपना अनुभव बताए, इसी बीच यात्रा के दौरान एक महिला से बात हुई जिसकी हम सभी जगह चर्चा करते रहते है……

एक महिला ने अपना अनुभव बताया कि मेरे पति शराब पीते थे, शाम को घर लौट कर आते थे तो झगड़ा करते थे और देखने मे क्रूर लगते थे।शराबबंदी लागू हो गया अब शाम में घर आते है, बाजार से सब्जी खरीद कर लाते हैं, हँसते है, मुस्कुराते है और अब देखने मे अच्छे लगते है।ये कितनी बड़ी बात है पहले मारपीट करता था और अब मुस्कुराता है, पहले देखने मे क्रूर लगता था और अब अच्छा लगता है।

मुख्यमंत्री ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर रोज आप आधे घंटे एक बैठक करे और केस की समीक्षा कर ताकि शराबबंदी में कितनी सफलता मिली ये लोगो को पता चले।

नीतीश कुमार ने मंच से ऐलान किया कि आगामी 21 जनवरी 2020 को हम तीन मुद्दे पर भव्य मानव श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा और यह मुद्दा नशा मुक्ति जल जीवन हरियाली और दहेज प्रथा को लेकर की जाएगी