मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूरी मजबूती के साथ काम करेगा

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पटना – राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल लालजी टंडन एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा प्रांगण में आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह का विधिवत शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ हुआ। दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को विभिन्न संकायों में स्वर्ण पदक, पी0एच0डी0 डिग्री, मास्टर डिग्री एवं बी0एस0सी0 डिग्री की उपाधि प्रदान की गई।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद के नाम पर इस केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का नामकरण किया गया है, जिसकी स्थापना राज्य सरकार ने की थी। पहले दीक्षांत समारोह में महामहिम राष्ट्रपति जी का आगमन बहुत ही उपयुक्त है। इस अवसर पर मैं राष्ट्रपति जी का हृदय से अभिनंदन करता हूँ। उन्होंने कहा कि आदरणीय रामनाथ कोविंद जी बिहार के महामहिम राज्यपाल से सीधे राष्ट्रपति बने, यह हमारे लिए गौरव की बात है और इससे हमलोगों को संतोष की अनुभूति होती है।

उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय देश का पहला एग्रीकल्चर रिसर्च केंद्र के रूप में स्थापित हुआ था जो पहले फिलिप्स ऑफ यू0एस0ए0 के नाम पर था। भयंकर भूकंप के बाद यह संस्था दिल्ली चली गयी और 1970 में यहाँ कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना राज्य सरकार ने की। इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी में परिणत करने के लिए हम लगे रहे और अंततोगत्वा 2016 में यह केंद्रीय विश्वविद्यालय बना। इसके लिए हमने हर शर्त स्वीकार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में यह एकमात्र कृषि विश्वविद्यालय था। 1908 में भागलपुर में स्थापित सबौर कृषि महाविद्यालय को वर्ष 2010 में हमलोगों ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के रूप में कन्वर्ट किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में जब यू0पी0ए0 की सरकार थी और डॉ0 मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने कृषि के मसले पर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग बुलाई थी। उस मीटिंग में एक एक्सपर्ट ने मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराकर कहा कि देश के अंदर बिहार में उत्पादन और उत्पादकता अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। हमने उस मीटिंग में कहा था कि बिहार में उत्पादन और उत्पादकता दोनों जल्द ही बढ़ेंगे और वर्ष 2008-2012 के लिए हमने पहला कृषि रोड मैप तैयार करवाया। इसके बाद बीज विस्थापन दर के मामले में धान में 11 फीसदी से 42 फीसदी, गेहूं में 10 फीसदी से बढ़कर 36 फीसदी और मक्का में 60 से बढ़कर 86 फीसदी की बढोत्तरी हुई।

2012-2017 के दूसरे कृषि रोड मैप की लॉन्चिंग तात्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने की थी और अब तीसरा कृषि रोड मैप भी राष्ट्रपति के द्वारा लांच किया जा चुका है। मीटिंग में जब एक्सपर्ट बोल रहे थे, उस समय धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 12.5 क्विंटल थी जो बढ़कर 25.25 पर पहुंच गयी, गेहूं की उत्पादकता 14 से बढ़कर 28.5 जबकि मक्का की उत्पादकता 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 40 क्विंटल पर पहुंच गयी। बिहार को वर्ष 2012 में चावल के लिए, वर्ष 2013 में गेहूं के लिए और वर्ष 2016 में मक्का उत्पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार भी मिला। इसके लिए मैं किसानों, कृषि विशेषज्ञों एवं सभी एग्रीकल्चर एक्सपर्ट को बधाई देता हूँ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन हमारे लिए चुनौती है। पहले बिहार में 1200 से 1500 मिलीमीटर रेनफॉल हुआ करता था, जो अब घटकर 800 मिलीमीटर से भी कम पर पहुंच गया है। इस वर्ष बिहार के 23 जिलों के 275 प्रखंडों को सूखा घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में प्रकृति के साथ जो छेड़छाड़ हो रही है, उसके कारण ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की समस्याएं उपजी हैं, इसके लिए बिहार के लोग कसूरवार नहीं है लेकिन बिहार के लोगों को इसका शिकार होना पड़ रहा है क्योंकि दुनिया के किसी भी इलाके में कुदरत के साथ छेड़छाड़ होती है तो उसका दुष्प्रभाव दूसरी जगहों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, सबौर कृषि विश्वविद्यालय और बोरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया की जो यहां शाखा खुली है, इन सबको मिलकर लोगों को अल्टरनेटिव सुझाव देना होगा ताकि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए क्रॉप साइकिल का कॉन्सेप्ट डेवेलप किया जा सके। इसके लिए सिर्फ पूसा और सबौर में ही नहीं बल्कि कृषि विज्ञान केंद्र में भी एक्सपेरिमेंट होना चाहिए। इसके लिए जरूरत पड़ने पर जमीन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज से अगर एसेस नहीं किया गया तो बहुत बड़ा संकट उत्पन्न हो सकता है क्यांेकि आज भी बिहार में 76 प्रतिशत लोग आजीविका के लिए कृषि पर ही निर्भर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल के अंत तक हर घर को बिजली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का हमारा लक्ष्य था, जिसे 25 अक्टूबर 2018 को ही पूरा कर लिया गया। उन्होंने कहा कि अब अगले साल तक अलग एग्रीकल्चर फीडर के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 1927 में पटना में वेटरनरी कॉलेज की स्थापना की गई थी और अब हमलोगों ने पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहाँ इतने अधिक संस्थान स्थापित हो गये हैं, अब उसे सुदृढ़ करने की दिशा में सोचिये।

उन्होंने कहा कि कृषि की पढ़ाई करने के लिए अधिकांश विद्यार्थी एडमिशन लेते थे लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते थे, जिसे देखते हुए राज्य सरकार की तरफ से ऐसे विद्यार्थियों को किताब खरीदने के लिए 6 हजार रुपये के साथ ही प्रतिमाह 2 हजार रुपये देने का प्रबंध किया गया है। उन्होंने कहा कि हमलोग चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग एग्रीकल्चर की पढ़ाई पर ध्यान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूरी मजबूती के साथ काम करेगा और टॉप टेन केंद्रीय यूनिवर्सिटी में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भी शुमार होगा। मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार इसमें भरपूर सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि मैं दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक एवं उपाधि हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देता हूँ।