मुख्यमंत्री ने कहा – नीति आयोग की बैठक में हमलोग बिहार के विकास के संबंध में अपनी बातें रखेंगे

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पटना – आज 1, अणे मार्ग स्थित लोक संवाद में ‘लोक संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में राजस्व एवं भूमि सुधार, मद्य निषेघ, उत्पाद एवं निबंधन, षिक्षा, गृह, समाज कल्याण एवं सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित मामले पर 07 लोगों द्वारा मुख्यमंत्री को सुझाव दिये गये।

आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में पटना के ज्ञान प्रकाश, भागलपुर के दीपक कुमार झा, नालन्दा के विशाल उपेन्द्र सिंह, मुजफ्फरपुर के सुबोध ठाकुर, दरभंगा के अहमद रजा, पूर्णिया के मनोज कुमार और पटना की बसंती देवी ने अपने-अपने सुझाव एवं राय मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। लोगों के प्राप्त सुझाव एवं राय पर संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/सचिव ने वस्तु स्थिति को स्पष्ट किया। लोगों से प्राप्त राय एवं सुझाव पर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया।

लोक संवाद कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मंडल, समाज कल्याण मंत्री श्री रामसेवक सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक गुप्तेष्वर पाण्डेय, प्रधान सचिव मंत्रिमंडल समन्वय संजय कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष सचिव चन्द्रशेखर सिंह सहित संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव उपस्थित थे।

आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम के उपरांत मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा चुनाव के दौरान हुये गतिविधियों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के पहले से ही विरोधियों द्वारा मेरे बारे में कई बातें कही जाती थी, मैं उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था। चुनाव के दौरान जनता के बीच हमलोगों ने अपनी बातों को रखा, हमनें 171 मीटिंग की। जनता ने अपना रिस्पांस दिया और जनता नेे उन्हें कहां पहॅुचाया आप सब जानते हैं। वोटिंग करने के बाद और चुनाव परिणाम आने के बाद आप सब के प्रश्नों का मैंने जवाब दिया हैं। अब इन प्रश्नों का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने काम के आधार पर हमलोगों को अपना समर्थन दिया है। हमलोग चुनाव के बाद फिर से लोगों की सेवा में लग गये हैं। चुनाव के दौरान भ्रमण के क्रम में जनता के बीच की अन्य समस्याओं की जो जानकारी मिली है, उसके समाधान के लिए भी लगे हैं। मंत्रियों, अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में विधि व्यवस्था से संबंधित समीक्षा बैठक की गयी है और 25 जून को दोबारा इस संबंध में बैठक होगी। पिछले वर्ष 800 मिलीमीटर से भी कम वर्षा हुई थी। उसके लिए 22 जिलों के 280 प्रखण्डों को सूखाग्रस्त घोषित कर उन्हें सब्सिडी दी गई थी, फसल सहायता योजना का लाभ भी दिया गया था। इस वर्ष भी वर्षा कम होने की संभावना को देखते हुये इन सबसे संबंधित बैठक भी की गई है। हमलोगों ने पीने के पानी एवं सिंचाई संबंधित समस्याओं पर भी बैठक की है।

भू-जल स्तर में कमी होने से पेयजल समस्या हो रही है। इसके समाधान के लिए पुराने चापाकलों की मरम्मत, ज्यादा गहराई तक नये चापाकलों को लगाना और इसके अलावे भी जहां समस्या हो रही हैं वहां पानी के टैंकर की व्यवस्था की जा रही है। हर घर नल का जल योजना को भी तेजी से लागू किया जा रहा है। पेयजल सकंट की जहां भी समस्या सामने आती है अधिकारी उस पर त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। इसके लिए प्रत्येक सप्ताह मुख्य सचिव के स्तर पर बैठक होती है।

केन्द्र सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होेने से संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में हम पहले ही जवाब दे चुके है। कहीं कोई समस्या नहीं है। बिहार के विकास के लिए, बिहार के हित के लिए किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आयेगी, मुझे ऐसा पूरा भरोसा है। केन्द्र द्वारा पहले ही बहुत योजनाओं को मंजूरी दी गई है उसका क्रियान्वयन किया जा रहा है। जब भी केन्द्र के प्रतिनिधियों से बातचीत होता है उसका सदुपयोग हमलोग बिहार के हित के लिए करते है। नीति आयोग की बैठक में हमलोग बिहार के विकास के संबंध में अपनी बातें रखेंगे।

विशेष राज्य के दर्जें के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि 14वें वित्त आयोग ने अपने एक वाक्य से इसे खारिज कर दिया था लेकिन 15वें वित्त आयोग के समक्ष बिहार एनडीए के तीनों घटक दलों ने अपनी बात रखी है। अगले पांच वर्षों में बिहार को विकसित राज्य की श्रेणी में लाने के लिए हमलोग काम करेंगे।

हाल ही में जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी सदस्यता अभियान चल रहा है और अक्टूबर से पंचायत स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक के प्रतिनिधियों का चयन होना है। हमारी पार्टी शुरू से ही धारा 370 हटाये जाने के पक्ष में नहीं है। हमारा मानना है कि राम मंदिर का निर्माण कोर्ट के निर्णय से या लोगों की सहमति से हो। हमलोग काॅमन सिविल कोड को थोपे जाने के पक्ष में नहीं हैं। महागठबंधन के लोगों की बातों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि न हम उनके आलोचनाओं पर ध्यान देते थे और नहीं जो वे आज कह रहे है उस पर ध्यान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों की दिलचस्पी काम में है। सड़कों के निर्माण के साथ-साथ अब उसके रख-रखाव के बारे में नियम बना दिये गये है। भवनों के निर्माण के साथ-साथ उसका मेनटेंनेंस, फर्नीसिंग का भी नियम बनाया गया है। हाल ही में मुजफ्फरपुर में बच्चों की हो रही मौत के संबंध में पूछे गये प्रश्न का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गोरखपुर से बरसात के पहले शुरू होता है। इस बीमारी को मस्तिष्क ज्वर (ए0ई0एस0) के रूप में चिन्ह्ति किया गया था, इसके लिए पहले भी कमिटी बनी थी और उसके बारे में कई सुझाव आये थे। इस संबंध में और जागरूकता फैलाने की जरूरत है ताकि लोग बच्चों की इस बीमारी से बचाव के लिए उचित देखभाल कर सकें। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देष पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने इस संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

भूमि विवाद के निपटारे से संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्लाॅक स्तर पर हर सप्ताह थाना प्रभारी और अंचलाधिकारी की बैठक होती है। अनुमंडल स्तर पर एसडीएम और डीएसपी की और जिला स्तर पर डीएम और एसपी की बैठक होती है। भूमि विवाद के निपटारे के लिए नया सर्वे सेटलमेंट कराया जा रहा है। बंटवारा के आधार पर 100 रूपये में रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है और भी कई प्रक्रियायें चलाकर भूमि विवाद से संबंधित समस्याओं के समाधान के प्रयास किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर भूमि एवं राजस्व सुधार विभाग के प्रधान सचिव श्री ब्रजेष मेहरोत्रा ने इस संबंध में विस्तार से बताया। हाल ही में थानों के बीच सीमा विवाद के संबंध में हुई घटना के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई घटना होती है तो जिस थाने को पहले दिखे उसे कार्रवाई करनी होगी और बाद में उसे अनुसंधान के लिए जिसके सीमा में पड़ता है उसको सौंपना चाहिये। डी0जी0पी0 ने इस संबंध में कार्रवाई की बात कही है।

टाउन प्लानिंग के संबंध में पूछे गये प्रश्न का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की ग्रामीण आबादी ज्यादा है इसलिए वहां पर कई विकासात्मक कार्य किये जा रहे हैं लेकिन शहरों की भी उपेक्षा नहीं की जा रही है। सात निष्चय योजना के अंतर्गत हर घर नल का जल सभी वार्डों तक पहॅुचाया जा रहा है। वर्ष 2005 के समय शहरों की स्थिति और आज की स्थिति को देखकर शहरों के विकास के संबंध में अंदाज लगाया जा सकता है। शहरों के विकास से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा की जाती है।