मैट्रिक रिजल्ट : खराब प्रदर्शन के लिए आखिर दोषी कौन ?

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पटना: बिहार बोर्ड ने रविवार को मैट्रिक का रिजल्ट जारी किया था। बिहार के कई छात्र और छात्राओं के लिए रिजल्ट का दिन ख़राब रहा। बिहार के छात्र और छात्राओं के बिहार बोर्ड की परीक्षा का रिजल्ट देखकर होश उड़ गए। जिसका कारण बिहार राज्य के कुल पन्द्रह लाख सैतालिस हजार तेरासी परीक्षार्थीयों ने बिहार बोर्ड की परीक्षा दी थी जिसमे सात लाख इक्कीस हजार नौ सौ उनसठ परीक्षार्थी ही पास हो पाये है और बाकी के आठ लाख पच्चीस हजार एक सौ चौबीस परीक्षार्थी फेल हो गए।

बिहार में 54% परीक्षार्थीयो के फेल होने की वजह का पता लगाने के लिए कई स्कूलों का सर्वे किया जिसमें पटना सिटी के राजकीय गांधी आर्य कन्या विधालय में 265 लड़कियों ने बोर्ड की परीक्षा दी थी जिसमे 131 लड़कियां ही पास हुई बाकी 134 फेल हो गई ।

वही पटना सिटी के दीवान बहादुर राधाकृष्णन जालान स्कूल में 322 लडको ने परीक्षा दी थी जिसमे 178 लड़के ही पास हुए बाकी के 144 फेल हो गए। पटना सिटी के नारायणी कन्या उच्च विधालय के 735 लड़कियों ने बोर्ड की परीक्षा दी थी जिसमे 356 ही पास हुई जबकि 379 लड़कियां फेल हो गई ।

पटना सिटी के मारवाड़ी हाई स्कूल के 430 लडको ने परीक्षा दी थी जिसमें 293 ही पास हुए बाकी के 137 फेल हो गए। शिक्षको से जब इतने परीक्षार्थीयो के फेल होने की वजह पूछी गई तब अधिकतर शिक्षको ने स्कूल में शिक्षको की कमी और शिक्षको को गैर शिक्षण कार्यो में लगाने की बात कही तो कुछ शिक्षको ने परीक्षा में कड़ाई और जांच के साथ क्लास रूम में कैमरे लगे रहने से परीक्षार्थीयो का नर्वस से तनाव में आकर परीक्षा देना भी कारण बताया।

फेल हुए छात्र – छात्राओं ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई ना होना और परीक्षा के दौरान जगह जगह, चेकिंग होना और क्लास रूम में कैमरे से परेशानी और बार बार पुलिस प्रसाशन का आना और शिक्षकों का परीक्षार्थीयों के सीट पर आकर बगल में बैठ जाना जिससे तनाव के कारण परीक्षार्थीयो को लिखने में दिक्क़ते आती थी ।