मॉब लिंचिंग या सेल्फ डिफेंस ?

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धनंजय झा

बेगूसराय – भीड़ तंत्र द्वारा तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में बेगूसराय के एसपी और एडीजी मुख्यालय के बयान में विरोधवास देखने को मिल रहा है। एसपी जहां इसे मॉब लिंचिंग का मामला मान रहे है। वहीं एडीजी मुख्यालय इसे सेल्फ डिफेन्स में भीड़ द्वारा की गई कार्रवाई बनाना चाहते है। एडीजे मुख्यालय और एसपी का अलग-अलग बयान कहीं न कहीं मामले को दूसरी ओर ले जाकर विरोधी की बोलती बंद करने की कोशिश है।

सरकारी मशीनरी द्वारा जिस तरह घटना को दूसरी ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है कहीं न कहीं इससे आम जनता भी पशोपेश में है। जनता पुलिस के एक वरीय अधिकारी के बयान को सही माने या एसपी के बयान को सही माने, पशोपेश में है। आम जनता पटना में बैठे पुलिस के वरीय अधिकारी के द्वारा जिस तरह का बयान दिया जा रहा है उससे ऐसा लगता है कि बिना घटना को जाने, बिना जांच किये और बिना एसपी से बात किये हुए ही दिया गया बयान मान रही है। क्या सरकार इसे सेल्फ डिफेंस करार देकर बेगूसराय में तेजी से बढ़ते अपराध पर पर्दा डालना चाहती है। देश भर के लोगो को झकझोर देने वाली इस घटना में महज एक पुलिस अधिकारी को सस्पेंड कर सरकार क्या बतलाना चाहती है।

इतने बड़े मामले में अगर पुलिस और उनके वरीय अधिकारी समय पर आते तो भीड़ को काबू में कर तीनो की जान बचाई जा सकती थी। जब पुलिस मानती है ये सभी कुख्यात अपराधी हैं तो पुलिस इन्हें छुट्टा क्यों छोड़ रखी थी। कई ऐसे गंभीर प्रश्न है जिसका जवाब सरकार के पास या पुलिस के बड़े अधिकारी के पास नहीं है। सिर्फ बिना होमवर्क किए ही बयान दिए जा रहे हैं जो जनता में एक गलत संदेश दे रही है। फिलहाल ये पूरा मामला मॉब लिंचिंग और सेल्फ डिफेंस की कार्यवाही में उलझ कर रह गई है।