मोतिहारी के ज्ञान बाबू चौक पर अंग्रेजी हुकूमत से बंगाली विधि-विधान से होती है मां दुर्गा की पूजा

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मोतिहारी – 108 साल पुरानी दुर्गा मंडप पूजा समिति की बंगाली रीति-रिवाज से पूजा होती आ रही है. इस मंडप में ढ़ोल की ताल पर पूरे विधि-विधान से होने वाली पूजा आकर्षण का केंद्र रहता है. पूर्वी चंपारण जिले में भी दुर्गा पूजा की धूम धाम है. श्रद्धालुओं में दुर्गा पूजा को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. कई पूजा समितियां यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा कर रही हैं. जिले की सबसे पुरानी पूजा समिति बंगाली समुदाय की भवानी मंडप पूजा समिति है, जिसने लगातार 108वें साल मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की है.

माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे है भीड़ श्रद्धालु का

बंगाली विधि-विधान से होती है पूजा

भवानी मंडप पूजा समिति की बंगाली रीति-रिवाज से पूजा होती आ रही है. इस मंडप में ढ़ोल की ताल पर पूरे विधि-विधान से होने वाली पूजा आकर्षण का केंद्र है. जिसमें महिला-पुरुष सभी शामिल होते हैं. इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि ये मोतिहारी जिले की सबसे प्राचीनतम पूजा समिति है.

1912 से होती आ रही है पूजा

बताया जाता है कि डेढ़ सौ साल पहले गुलाम भारत में बंगाली समुदाय के लोग कोलकाता से काम की तलाश में यहां आए थे. उन्हीं लोगों ने 1912 में तुरकौलिया में भवानी मंडप पूजा समिति की स्थापना कर यहां पर दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी. तभी से ये पूजा समिति यहां प्रतिवर्ष पूजा करती आ रही है. हालांकि समिति ने शहर में स्थाई मंडप का निर्माण करवाया, जिसमें प्रत्येक साल प्रतिमा स्थापित की जाती है.