मोहम्मद गजनी ने देखा था ब्रह्मेश्वर नाथ का चमत्कार

3129
0
SHARE

पटना: बिहार के भोजपुर- बक्सर जनपद के सीमा क्षेत्र में ब्रह्मपुर धाम से चर्चित बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ का मंदिर प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी की दूरी पर स्थित है।

ब्रह्रा जी दूारा स्थापित अति प्राचीन शिवलिंग बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ जी की चर्चित स्थल भगवान शंकर के प्रधान तिर्थों में इनकी गणना अनेकों पुराणों में मिलता है। शिव महापुराण की रुद्र संहिता में यह महादेव धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाले है इन्हें मनोकामना महादेव भी कहा जाता है। इस मंदिर कि सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस मंदिर का मुख्य दरवाजा पश्चिम मुखी है। जबकि देश के अन्य शिव मंदिरों का दरवाजा पूरब दिशा में है।

किवंदतियों का मानना है कि जब मुस्लिम शासक मोहम्मद गजनी ब्रह्मपुर आया था। तब यहां के लोगों ने गजनी से अनुरोध किया कि इस शिव मंदिर को नहीं तोड़े नहीं तो बाबा उसका विनाश कर देंगे। इसी बात को लेकर गजनी ने बाबा ब्रह्मेश्वर को चैलेंज किया था। इसपर गजनी ने कहा कि ऐसा कोई देवता नहीं हैं। अगर हैं, तो मंदिर का प्रवेश द्वार जो पूरब दिशा में है वह रात भर में पश्चिम की ओर हो जाएगा? अगर ऐसा होता है तो वह मंदिर को छोड़ देगा और कभी मंदिर के पास नहीं आएगा।

अगले दिन गजनी जब मंदिर का विनाश करने आया तो दंग रह गया। उसने देखा कि मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम की तरफ हो गया है। इसके बाद वह वहां से हमेशा के लिए चला गया।

कहा जाता है कि जो भी दरबार में आता है बाबा उसकी मनोकामना पूरी करते हैं। यही कारण है कि हजारों लोग दर्शन के लिए यहां पर आते हैं। यहां आपने आप निकले ब्रह्मेश्वर शिवलिंग का दर्शन होता है।

ब्रह्मेश्वर शिव मंदिर का गर्भगृह बहुत बड़ा है। बहुत कम जगहों पर इतना बड़ा गर्भगृह दिखता है। मंदिर में प्रवेश करते ही आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास होता है। कहा जाता है कि मंदिर की सफाई करने वाले कुष्ट रोगी भी बाबा की कृपा से ठीक हो जाते हैं।

मंदिर के पास बहुत बड़ा तालाब है। यह तालाब कब बना स्पष्ट नहीं है। इस तालाब की खास बात यह है कि इसमें सालों भर पानी रहता है। मंदिर में पूजा करने वाले लोग यहां स्नान करते हैं। प्रशासनिक लापरवाही के कारण तालाब की सफाई नहीं हो पाती है, जिसके कारण तालाब का पानी हरा हो गया है। इस तालाब से मंदिर की खूबसूरती बढ़ जाती है।

ब्रह्मपुर धार्मिक पर्यटन का लोकप्रिय केंद्र है। बिहार, यूपी और झारखंड के साथ-साथ कई दूसरे राज्यों के लोग बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। वहां के पुजारी का कहना है कि बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ जी का यह मनोकामना लिंग है। भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ जिस अवधी में विवाह किया, उसी काल में इनकी स्थापना हुई। यहां जलाभिषेक का महत्व सालों भर है लेकिन सावन में कांवरियों का जलाभिषेक का विशेष महत्व है।