यहां कभी भी हो सकता है बनारस जैसा हादसा !

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विशाल

भोजपुर- देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस कैंट में कल जहां निर्माणाधीन पुल गिरने से कई लोगों की मौत हो जबकि कितने लोगों के घायल होने से पूरा देश मर्माहत है। वहीं भोजपुर का एक मात्र रेलवे ओवरब्रिज मरम्मती ना होने के कारण बड़ी दुर्घटना का अंदेशा जाहिर कर रहा है।

आरा का एक मात्र रेलवे ओवरब्रिज की हालत पिछले काफी समय से मरम्मत न होने के कारण खस्ता हालात में है। आप इन तस्वीरों को देख कर ही अंदाजा लगा सकते है की ये रेलवे ओवेरब्रिज जर्जरता के कारण किस हालात में है ब्रिज की दीवारे क्षतिग्रस्त हो गयी है तेज़ रफ़्तार से दौड़ाने वाली गाड़ियों की सड़के आह भर्ती हुई नजर आ रही है, इतना ही नहीं इस पुल को खड़ा रखने वाला पिलर भी अपनी बदनसीबी की कहानी आने जाने वाले राहगीरों से बयाँ कर रही है, रेलवे लाइन के दोनों पार जिले की बड़ी आबादी को शहर से जोड़ने वाला यह एक मात्र ओवर ब्रिज है। जो आज जर्जरता के कारण इसका अस्तित्व खतरे में है।

ओवर ब्रिज के इन जर्जर खंबे को देख राह से गुजरने वाले लोगों का कलेजा दहल जाता है। ब्रिज की छड़े आह भरती हुई बाहर की ओर निकल चुकी है। पुल से प्रतिदिन वीआईपी से लेकर भारी वाहन और कई छोटी बड़ी गाड़ियाँ गुजरती हैं। लेकिन इसके खस्ता हालात पर किसी की नजर नहीं पहुंचती है। पुल से गुजरने वाले राहगीर हर समय वहां से जितना जल्दी हो सके गुजरना मुनासिब समझते हैं क्योंकि कब ये पुल धराशाई हो जाए और वह उसकी चपेट में खुद ना आ जाए।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 06-07 में पश्चिमी रेलवे गुमटी पर बने ओवरब्रिज का उद्घाटन अपने हाथों से किया था। एक समारोह आयोजित कर पुल पर परिचालन प्रारंभ किया गया था। ओवरब्रिज के बनने के बाद शहरवासियों के चेहरे पर खुशी का ठिकाना नहीं था। क्योंकि ओवरब्रिज की कमी लंबे अर्से से महसूस की जा रही थी। इसके निर्माण में तकरीबन छह-सात करोड़ रुपये खर्च हुए थे। निर्माण कार्य चलने के बाद भी प्राक्कलन राशि में वृद्धि की गई थी जिससे की निर्माण में कोई रूकावट नहीं आये। आरा-मुगलसराय रेल खंड पर बने इस ओवरब्रिज के नीचे से हर रोज सैकड़ो रेल गाड़ियां गुजरती है।

विभाग ने इसके रिपेयर पर जरा सा भी ध्यान दिया होता तो शायद इस पुल का रेलिंग क्षतिग्रस्त नहीं होता और न ही टूटे-फूटे सड़के होती, पुल के खम्बे और फुटपाथ को कभी उद्घाटन के बाद से देखा ही नहीं वो किस हालात में है। पश्चिमी रेलवे गुमटी पर बने ओवरब्रिज पर कई जगह बड़े-बड़े गड्डे उभर आये है। जिसके चलते लोहे का छड़ भी दिखायी पड़ने लगा है। बावजूद इसकी मरम्मत के प्रति बिहार राज्य पुल निगम उदासीन बना हुआ है। जिसकी वजह से ओवरब्रिज की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती ही जा रही है। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो पुल का वजूद खतरे में पड़ सकता है।

बरसात के दिनों में ओवरब्रिज पर जलजमाव का होना आम बात है। ऐसे में इससे पुल को भी क्षति पहुंचती है। दरअसल पुल पर निचले हिस्से में बरसात के पानी के निकलने के लिए को कोई नाली नहीं बनाई गई है। जिससे की पानी का जमाव नहीं हो और आसानी से जल की निकासी हो सके। जिसके चलते ओवरब्रिज को नुकसान हो रहा है। पुल पर गढ्डें हो जाने के चलते भी जलजमाव हो रहा है। लेकिन विभाग की उदासीन रवैया शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है तभी तो इसकी ओर देखना भी मुनासिब नहीं समझते।

बहरहाल पश्चिमी ओवरब्रिज केवल शहर के मुहल्लों को ही एक-दूसरे से नहीं जोड़ता, बल्कि पुल के रास्ते तीन प्रमुख मार्ग पर जुड़ते है। इनमें आरा-बक्सर, आरा-सासाराम तथा आरा-मोहनियां मार्ग प्रमुख है। उत्तर प्रदेश जाने वाले राहगीर भी इसी पुल के रास्ते से होकर आते-जाते है। जिसके चलते पुल कई मायने में महत्वपूर्ण है। लेकिन इस महत्वपूर्ण पुल की देखभाल के प्रति सरकारी रवैया ठीक नहीं दिखायी दे रहा है। जिसके चलते ओवरब्रिज की दुर्दशा दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। जब इस ओवरुब्रिज के खस्ता हाल के बारे में जिले के जिलाधिकारी से बात की गई की तो उन्होंने अनजान बनते हुए पूछा कौन ओवर ब्रिज और उसे दिखवा लेने की बात कही।