यहां फलों की दी जाती है बलि

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भागलपुर: आप ने दुर्गापूजा के दौरान पशु बलि देने की बात तो सुनी होगी। लेकिन बिहार के भागलपुर की कालीबाड़ी दुर्गा पूजा समिति में फलों की बलि दी जाती है। यह परंपरा एक या दो साल से नहीं बल्कि 40 वर्ष से अनवरत जारी है। इतना ही नहीं यहां केले के पेड़ को गणेशजी की पत्नी की तरह पूजा जाता है। इससे पहले केले के पेड़ को गंगाजल से नहलाया जाता है और उसके बाद सोलह शृंगार किया जाता है।

कालीबाड़ी दुर्गापूजा समिति के सचिव ने बताया कि पूजा पूरी तरह से बांग्ला रीति रिवाज से की जाती है। पशु बलि की जगह हम कई तरह के फलों को सातवीं पूजा के दिन चढ़ाते हैं। इसे हम फल की बलि कहते हैं। देवी को खीर पूरी की जगह सब्जी और दाल का भोग लगता है। इस बार चने की दाल और आलूदम का भोग लगेगा।

पांचवी पूजा को देवी की प्रतिमा की स्थापना कर दी जाती है और ढाक बजने लगता है। ढाक बजाने वाले कोलकाता से आते हैं। पूजा में गणेशजी की बहू (पत्नी) के रूप में केले को उनकी प्रतिमा के बगल में बैठाया जाता है। महिलाएं सुबह टोली में उसे गंगा नदी ले जाती हैं।

गंगा नदी से उसे नहलाया जाता है फिर साड़ी पहना कर पूजा में लाया जाता है। सात तरीके से केले का शृंगार किया जाता है। इसके बाद मां के सामने डलिया में काफी सामग्री रखते हैं और उसे स्पर्श कराते हैं। सभी प्रकार के फल देवी को अर्पित किए जाते हैं।