यहां शहीदों के नाम पर जलेंगे दीये

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भोजपुर: वतन पर मिटने वालों के लिए सम्मान क्या होता है ? उनके लिए लोगों का अरमान क्या होता है? अगर ये जानना है तो आप भोजपुर जरूर आइए जहां उरी हमले में शहीद अशोक सिंह के गांव रकटू टोला के लोग इस बार उनके सम्मान में दीपावली नहीं मना रहे हैं बल्कि शहीदों के नाम पर दीये जलाएंगे, पटाखे और मीठाइयां नहीं बाटेंगे गांव वाले।

बिहार के भोजपुर मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है यह गांव है। जहां उरी हमले में वतन के लिए अशोक सिंह शहीद हो गए थे। पीरो अनुमंडल के जितौरा महाल पंचायत का यह छोटा सा टोला इतना मशहूर होगा किसी ने सोचा नहीं था। लेकिन उरी हमले में जब इस गांव के रहने वाले अशोक सिंह जब वीरगति को प्राप्त हुए तो पूरे देश की जनता इस छोटे से टोले से वाकिफ हो गए। अशोक इस गांव के लोगों को और अपने परिवारों को छोड़कर तो चले गए। लेकिन एक नाम छोड़ गये जिसने पुरे गांव वालों का सर फक्र से ऊंचा कर दिया।

देश के लिए शहीद हुए अशोक ने गांव का नाम देश के शान में गढ़ दिया। आज इस शान को पाकर गांव वालों ने भी शहीद अशोक के इस शान और सम्मान को बरकरार रखते हुए इस बार दीपावली न मनाने का निर्णय लिया है। गांव वालों का कहना है अपना गांव एक परिवार है और अशोक सिंह उस परिवार के सदस्य थे। इसलिए पुरे गांव के लोग इस बार दीपावली नहीं मनाएंगे। केवल शहीदों के सम्मान में दीप जलेंगे लेकिन मिठाई और पटाखे नहीं छोड़े जाएंगे।

शहीद की पत्नी संगीता देवी ने घर में पड़े सभी चाइनीज समानों को जलाया और साथ ही लोगों से सभी से चाइनीज वस्तुओं का वहिष्कार करने के लिए अपील की। उन्होंने कहा कि वो देश जो हमारे देश के दुश्मन को सह देता हो उसे सबक सिखाना भी हमारा दायित्व बनता है। दीपावली के लिए लोगों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार परिवार दीपावली नहीं मनाएंगे। लेकिन शहीदों के नाम दीये जरूर जलाये जाएंगे। उन्होंने सभी शहीदों के नाम दिया जलाकर सच्ची श्रद्धांजलि की बात कही।

जब शहीद की पत्नी से पहले की दीपावली के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पहले उनके पति फोन पर बात कर लिया करते थे और परिवार के सभी लोगों के लिए जरुरी फरमाइशों की लिस्ट को पूरा करने के लिए कहते थे। हालांकि वे दीपावली में घर नहीं आते थे पर उनका साथ परिवार की जरूरतों के रूप में खड़ा मिलता था। चंद लाइन बोलकर वो पुरानी यादों में खो गयीं और बिलखने लगी।

दीपावली दीपों, पटाखों और मिठाइयों का त्योहार है। भले ही इस बार मिठाइयां और पटाखे नहीं फूटेंगे लेकिन लोगों के दिल में आतंक के खिलाफ फूटने वाला ये वो गुस्सा है, जिसने देश के लिये खो देने वाले अपनों के प्रति एक मिठास दिल में ऐसा पैदा कर दिया है जो किसी भी मिठाई से कम नहीं है। दीप ये स्नेह का है, प्यार का है, जज्बात का है जो जलेगा जरूर जिसमें एक सच्चाई और देशभक्ति की लौ भी इस दीपावली पर जलेगी।