यह केंद्रीय विश्वविद्यालय फिर विवादों के घेरे में

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पटना: बिहार के मोतिहारी में केन्द्रीय विश्वविद्यालय खुलने बाद आए दिन इस से जुड़ी कई विवाद सामने आ रहे है। पहले तो यह विश्वविद्यालय कहां खुले इसपर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराहठ रही। विश्वविद्यालय किसके नाम पर खुले इसको लेकर आन्दोलन हुआ। आखिरकार मोतिहारी में विश्वविद्यालय खुला और इसका नाम महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय रखा गया।

विश्वविद्यालय खुलने के बाद भी विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। पहले उर्दू फैकल्टी को लेकर लोग सड़क पर उतर आन्दोलन किया। अब संस्कृत फैकल्टी के लिए आंदोलन कि तैयारी चल रही है।

मोतिहारी के महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय जिसे जल्द से जल्द चालू कर बच्चों की पढाई के लिए आनन फानन में भाड़े के भवन में शुरू किया जा रहा है। जरुरत के अनुसार इसमें कर्मचारियों और विभिन्न विषयों के प्रोफेसर की बहाली की गई। साथ ही कुछ विषय की पढाई के लिए छात्रों का नामांकन भी किया जा रहा है।

सबसे बड़ी बात है कि इस विश्वविद्यालय में उर्दू और संस्कृत कि पढाई नहीं हो रही है जिसको लेकर इस विषय के छात्र इस विश्वविद्यालय से दूर हैं। पर अब इस मुद्दे को लेकर आए दिन आंदोलन हो रहा है। पहले उर्दू के फैकल्टी चालू करने के लिए हजारों कि संख्या में लोग सड़क पर उतर आंदोलन किया। अभी इस आंदोलन का कोई नतीजा निकला भी नहीं था कि अब एक और तबका संस्कृत कि पढाई चालू करने को लेकर आंदोलन का रूप रेखा तैयार कर लिया है। इस आंदोलन को संस्कृत विकास संघर्ष मोर्चा नाम दिया गया है।

इस आंदोलन को तेज गति देने के लिए कई आंदोलनकारी संगठन भी सामने आए। उनका साफ कहना है कि ये आंदोलन तबतक जारी रहेगा जबतक उनकी मांगे पूरी न हो जाती।

वहीं उर्दू पढ़ने वालों का मानना है कि उर्दू बिहार कि दूसरी जुबान है और इस विश्व विद्यालय में जगह नहीं दिया जा रहा है। दूसरी तरफ लोगों का मानना है कि संस्कृत ही सभी भाषा की जननी है। और संस्कृत कि पढाई के नहीं हो रही है। बहरहाल अब देखने वाली बात होगी कि सभी समस्याओं से लड़ते हुए इस केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरविन्द अग्रवाल इस समस्या से कैसे निपट पते है।