राजधानी पटना के एडवोकेट विभिन्न मांगों को लेकर उतरे सड़कों पर

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पटना – बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आह्वान पर बिहार में भी अधिवक्ता सड़कों पर उतर आए. बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष अधिवक्ताओं के लिए कई मांगे रखी हैं. बीसीआई ने वकीलों को पेंशन, मुआवजा, आवास के लिए आर्थिक मदद समेत बजट में हर साल 50 हजार करोड़ रुपये वकीलों की सुविधाओं के लिए आवंटित करने की मांग की है.

सूबे के कई जिलों में अधिवक्ताओं ने बीसीआई के आह्वान का समर्थन करते हुए प्रदर्शन और पैदल मार्च करने का काम किया. वहीं पटना की सड़कों पर भी एडवोकेट मार्च निकाल कर सरकार का विरोध करते नजर आए, जहां आज सिविल कोर्ट से पटना के तमाम वकीलों ने राजभवन मार्च निकाला. पटना के जेपी गोलंबर पर जैसे ही वकीलों ने आगे बढ़ने की कोशिश की.

पुलिस ने घेराबंदी कर वकीलों को राजभवन जाने से रोक दिया. अधिवक्ताओं ने साफ कह दिया है कि बीसीआई की मांगों पर केंद्र सरकार को जल्द ही फैसला लेना होगा. वहीं, सभी आज न्यायिक कार्य का बहिष्कार करेंगे.

क्या है अहम मांग

अधिवक्ताओं की मानें तो 2014 में वर्तमान सरकार ने अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए 500 करोड़ रुपए देने का वादा किया था. लेकिन वर्तमान सरकार ने अभी तक वादे को पूरा नहीं किया है. उनकी प्रमुख मांगे निम्न हैं. सभी अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड के रूप में 10000 रुपये प्रतिमाह दिया जाए.

देश के सभी अधिवक्ताओं के लिए न्यायालय परिसर में भवन, पुस्तकालय, शौचालय आदि की व्यवस्था की जाए.

हर साल बजट में वकीलों की सुविधा के लिए 50 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग की है.

महिलाओं के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की जाए.

अधिवक्ताओं की असामयिक मृत्यु होने पर 50 लाख का बीमा.

परिजनों को मुफ्त चिकित्सा व्यवस्था मिले.

वृद्ध वकीलों को पेंशन दी जाए.