राजभवन के राजेन्द्र मंडप में आयोजित पेंटिंग एवं फोटोग्राफी प्रदर्शनी का राज्यपाल ने किया उद्घाटन

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पटना- आज राजभवन परिसर स्थित राजेन्द्र मंडप सभागार में आयोजित बुद्ध, महावीर एवं बिहार की सांस्कृतिक विरासतों पर आधारित एक पेन्टिंग एवं फोटोग्राफी प्रदर्शनी का उद्घाटन राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने किया। इस अवसर पर आयोजित पेंटिंग एवं फोटो प्रदर्शनी के अवलोकन के बाद राज्यपाल ने कहा कि बिहार की कला एवं संस्कृति की विरासत अत्यन्त समृद्ध और गौरवपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि ‘पटना कलम’ एवं ‘मिथिला/मधुबनी पेन्टिंग’ की परम्परा बिहार में काफी समृद्ध रही है, जिसके कतिपय कलाकारों को ‘पद्म सम्मान’ भी मिले हैं। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन में संगीत, कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देनेवाले कार्यक्रम आगे भी आयोजित होते रहेंगे। महामहिम राज्यपाल ने प्रदर्शनी में शामिल सभी तेईस कलाकारों की प्रतिभा एवं परिश्रम की सराहना की तथा उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

आज आयोजित कार्यक्रम में बिहार के मूलनिवासी, जो दिल्ली, भोपाल आदि जगहों पर रहते हुए राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने में सफल रहे हैं, की अधिकतर पेंटिंग-कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। आज आयोजित प्रदर्शनी में अधिकांश चित्रकारों ने भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी, छठ पूजा, वैशाली के अशोक स्तंभ, राजगीर के स्तूप एवं नालंदा खंडहर, महाबोधि मंदिर, बोधगया तथा मनेर शरीफ के साथ-साथ बिहार की लोक संस्कृति को भी अपनी कलाकृति का केन्द्र बनाया है।

आज आयोजित प्रदर्शनी में -अनूपचंद (दिल्ली) की भगवान बुद्ध और बौद्ध दर्शन, अनिल बिहारी (पटना) की सीताराम की आधुनिक मानवता को संदेश, राजू श्रीवास्तव (दिल्ली -मूल निवासी बिहार) की जे॰पी॰ की सम्पूर्ण क्रांति तथा राष्ट्रकवि दिनकर की ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ के भाव पर आधारित पेंटिगें भी काफी सराही गईं। भुवनेश्वर भास्कर (आरा) की बिहार की लोकभाषाओं पर आधारित पेंटिंग तथा राजेश कुमार चंद (दिल्ली-बिहार मूल निवासी) की 1857 के स्वतंत्रता-संग्राम के महानायक बाबू कुँवर सिंह पर आधारित पेंटिंग अत्यन्त उत्कृष्ट कोटि की है।

इसी तरह भोपाल में रहने वाले बिहार मूलनिवासी धर्मेन्द्र कुमार की चंपारण के नीलहा आंदोलन तथा गाँधी का नेतृृत्व पर आधारित पेंटिंग भी काफी आकर्षक एवं गुणवत्तापूर्ण है। अनिल बिहारी के बौद्ध शिक्षा, भोपाल की रहनेवाली मनीषा गोयल की बौद्ध-दर्शन, शिखा सिन्हा की बौद्ध के शांति एवं अहिंसा के संदेश विषयक पेंटिंगें, मनोज कुमार बच्चन की कुँवर सिंह पर आधारित पटना कलम शैली की पेंटिंग, भोपाल की कुसुमलता की मगध साम्राज्य और यक्षिणी, यू॰एस॰ में रहने वाले बिहार के मुज्फ्फरपुर के मूल निवासी ए॰के॰ ढकलस की नवल किशोर (दिल्ली) की बुद्ध के शांति मार्ग, मानस जैन (उड़ीसा) की सुजाता एवं बुद्धा, नरेन्द्रपाल सिंह (दिल्ली में रहनेवाले बिहार के मूल निवासी) की राजगीर स्तूप एवं टमटम यात्रा, रवीन्द्र दास (दिल्ली -बिहार के मूलवासी) की बुद्ध और प्यार, अजय नारायण (बिहार) की चाँदनी रात में वैशाली का अशोक स्तंभ, के॰के॰ गाँधी (जम्मू कश्मीर) की राजेशचन्द्र (बिहार) की चंपारण में नीलहा आंदोलन के दौरान स्थानीय नेताओं के साथ गाँधी की बैठक, मिलनदास के॰के॰ गाँधी (जम्मू कश्मीर) की शिखा सिन्हा की ज्ञान-समाधि’, मनीषा जैन की महावीर स्वामी के संदेश, सोनल गुप्ता की इन्दिरा (दिल्ली-बिहार की मूल निवासी) की नीतिज्ञ चाणक्य, नवकिशोर (दिल्ली) की लोकपर्व छठ पूजा आदि से जुड़ी पेन्टिंगों को भी दर्शकों की सराहना मिली।

प्रदर्शनी में विख्यात फोटोग्राफी एवं विभिन्न सम्मानों/पुरस्कारों से नवाजे गये वी॰के जैन की फोटोग्राफी की भी कृतियाँ खूब सराही गईं। इनकी दर्जन भर से अधिक तस्वीरों में छठ पूजा, पटना हाईकोर्ट, मनेरशरीफ, तख्तश्री हरमंदिर साहिब का प्रकाश उत्सव, नालंदा के खंडहर, सोनपुर पशु मेला, महाबोधि मंदिर बोधगया, पटना म्यूजियम, गाँधी मैदान का रावण वध, बुद्ध स्मृति पार्क, गाँधी की बिहार यात्राएँ आदि काबिले तारीफ थीं। प्रदर्शनी में राज्य के कलाकारों, चित्रकारों, फोटोग्राफरों आदि को भी आमंत्रित किया गया था।

इस अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, कला एवं संस्कृति विभाग के अपर सचिव आनंद कुमार, राज्यपाल सचिवालय के अपर सचिव विजय कुमार, नेशनल गैलरी आॅफ माॅडर्न आर्ट के अध्यक्ष श्याम शर्मा, बिहार ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष आनंदी प्रसाद बादल, ख्यातिप्राप्त छायाकार वी॰के॰ जैन सहित राज्यपाल सचिवालय एवं कला संस्कृति विभाग के वरीय अधिकारीगण एवं गणमान्य जन आदि भी उपस्थित थे। प्रदर्शनी में पेंटिंग के 40 और फोटोग्राफी के 32 प्रदर्श लगाये गये थे, जिनका अवलोकन कर दर्शकों ने आनंद लिया और इनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।