राज्य में अगर दलितों का कोई शुभचिंतक है तो उसका एकमात्र नाम जीतन राम मांझी है – हम

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पटना – हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से0) अनुसूचित जाति/जनजाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएल वैश्यन्नी ने कहा कि वास्तविकता यह है कि सिर्फ हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी में ही वह ताकत है जो बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के पदचिन्हों पर चलकर दलित समाज को एक नई दिशा दे सके|

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉक्टर भीमराव के 127वीं जयंती के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए एनडीए के नेताओं के द्वारा दलित समाज को यह भड़काने का एक बड़ा षड्यंत्र था| हम कह सकते हैं कि देश और राज्य में दलित समाज की एकजुटता के कारण ही सभी राजनीतिक दल के नेताओं में इनकी ताकत का डर बैठा दिया है| आज SC/ST के लोगों को और भी एकजुट होने की आवश्यकता है|

आगे उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों को बांटने के साथ उसे और कमजोर करने का काम किया है आज पूरे देश में हर राज्य में जिस तरह से SC/ST के लोगों में एकजुटता बड़ी है उसी का नतीजा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को अपनी कुर्सी बचाने के लिए दलितों की चिंता सताने लगी है जो एक दिखावा मात्र है|

उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने हाथों से उन्हें ताजपोशी कर मुख्यमंत्री बनाया था इसके बाद जब मांझी ने बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के पदचिन्हों पर चलते हुए दलित समाज की विकास के लिए काम करना चाहे तो उन्हें कुर्सी से हटाने का राजनैतिक खेल खेला गया| इसका बड़ा कारण यह था कि यदि जीतन राम मांझी ने दलित समुदाय के लिए काम करना शुरू कर दिया और वह जब स्थापित हो जाएगा तो आने वाले समय में उसको हटाने की ताकत किसी को नहीं होगी कारण सिर्फ इतना था| राजनीति यहां हो रही थी कि दलितों के नेता के रूप में मांझी को स्थापित नहीं होने दिया जाए| जिससे कि उनकी बागडोर उनके हाथों में बनी रहे|

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश और राज्य में अगर दलितों का कोई शुभचिंतक है तो उसका एकमात्र नाम जीतन राम मांझी है| जिसके हाथों दलितों का विकास निश्चित होगा| बाकी लोग तो दिखावा कर रहे हैं, सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए| उन नेताओं को अनुसूचित जाति/जनजाति के लोग कभी माफ नहीं करेंगे |