राज्य में बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों के उन्नत प्रभेदों का विकास -डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना- कृषि मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर द्वारा विगत तीन-चार वर्षों में राज्य के विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों तथा परिस्थितियों के अनुरूप फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने एवं किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए विभिन्न फसलों के प्रभेदों को विकसित करने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया है। यह बहुत ही हर्ष का विषय है।

मंत्री ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर द्वारा सिंचित मध्यम जमीन के लिए धान के सबौर सुरभित, सबौर , भागलपुर कटरनी तथा सबौर दीप प्रभेद विकसित किया गया है। कम सिंचाई वाले क्षेत्र के लिए सबौर अध्र्दजल, सुखा जलवायु वाले क्षेत्र के लिए सबौर हर्षित धान, सुखा जलवायु एवं अचानक आई बाढ़ एवं जल-जमाव वाले क्षेत्र के लिए सबौर सम्पंन धान का प्रभेद विकसित किया गया है।

इसी प्रकार गेहूँ के सिंचित, समय पर बुआई के लिए सबौर समृद्धि प्रभेद, वर्षा आधारित समय पर बुआई के लिए सबौर निर्जल तथा सिंचित, विलम्ब से बुआई के लिए सबौर श्रेष्ठ प्रभेद को विकसित किया गया है। मक्का के खरीफ मौसम के लिए सबौर संकर मक्का-1 तथा खरीफ एवं रबी दोनों मौसम के लिए एच॰डी॰एम॰ 117 प्रभेद विकसित किये गये है।

खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ बागवानी फसलों में मखाना के लिए सबौर मखाना-1, जिसकी उत्पादकता 32 से 35 क्विं॰ प्रति हेक्टेयर है तथा 50-60 प्रतिशत लावा प्राप्त किया जा सकता है, को विकसित किया गया है। शुष्क जलवायु में सहनशील बेल के किस्म सबौर बेल-1, जिसका फल का औसत वजन 1 किलोग्राम है, को विकसित किया गया है।

डाॅ॰ कुमार ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर द्वारा राज्य के अन्नदाता किसानों के हित में तथा जलवायु परिवत्र्तन के मद्देनजर खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों के प्रभेदों के विकसित करने से राज्य की पारिस्थितिकी के अनुसार ये प्रभेद लाभकारी सिद्ध होंगे। विभागीय योजनाओं में इन प्रभेदों के बीज तथा पौध-रोपण सामग्री किसानों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जायेगा।