राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत ‘‘संकल्प’’ कार्यक्रम का आयोजन

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पटना: दिनांक 10.02.2017 को राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के सभागार में कुष्ठ उन्मूलन के विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 30 जनवरी 2017 (महात्मा गांधी की पुण्य तिथि) से 13 फरवरी 2017 तक राष्ट्रीय स्तर पर मनाये जा रहे कुष्ट निवारण पखवाड़ा के तहत आयोजित विशेष कार्यक्रम में कुष्ठ निवारण के लिये प्रतिभागियों ने सामूहिक संकल्प ग्रहण किया।

विदित है कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन के कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2017 में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर को कुष्ठ निवारण दिवस के साथ-साथ पूरे एक पखवाड़ा तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आज इस अभियान के अवलोकन के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम की शुरूआत डाॅ॰ विजय कुमार पाण्डेय, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, कुष्ठ नियंत्रण के प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने राज्य भर में कुष्ठ निवारण के क्षेत्र में चलाये जा रहे अभियान का पूर्ण विवरण प्रस्तुत किया। इसके उपरांत राज्य स्वास्थ्य समिति के अधिकारियों, कर्मचारियों, मीडिया के प्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार को स्वास्थ्य प्रक्षेत्र में सहयोग कर रही विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने कुष्ठ निवारण के विषय पर सामुहिक संकल्प ग्रहण किया। संकल्प ग्रहण कार्यक्रम के अवसर पर श्री शषि भूषण कुमार, सचिव, स्वास्थ्य-सह-कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने विभागीय अधिकारियों, कर्मियों एवं मीडिया के समक्ष कुष्ठ निवारण कार्यक्रम के अद्यतन प्रगति,अबतक की उपलब्धियों एवं भावी कार्ययोजनाओं की भी जानकारी दी।

राज्य में 30 जनवरी 2017 से चलाये जा रहे स्पर्श कुष्ठ निवारण जागरूकता अभियान के तहत राज्य के सभी गांवों एवं प्रखण्डों में 30 जनवरी 2017 को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के दिन सभा आयोजित कर कुष्ठ रोग से संबंधित जानकारी दी गयी है एवं लोगों को संदेहास्पद रोगियों के इलाज प्रभावित व्यक्तियों के साथ भेदभाव न करने एवं समाज के मुख्यधारा में जोड़ने के लिए संकल्प दिलाया गया है।
विदित है कि कुष्ठ रोग छूतपात से नहीं फैलता बल्कि उसका प्रसार संक्रमित व्यक्ति जिसने ईलाज नहीं लिया है, उसके द्वारा होता है। कुष्ठ रोग के प्रारंभिक लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जो चिकित्सा लेने के लिए प्रेरित नहीं करते हैं। शरीर में कुछ दाग हो जिनमें सुन्नापन हो, दर्द नहीं होता हो, खुजली नहीं होती हो और जो जन्म से नहीं हो, वह कुष्ठ के प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं।

अतः आवश्यक है कि उक्त लक्षण युक्त व्यक्तियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाय। ऐसे ही व्यक्ति उक्त लक्षणों के साथ कुष्ठ प्रभावित हो सकते हैं और संक्रमण फैलाते रहते हैं तथा ससमय उपचार नहीं लेने के कारण बाद में विकलांग हो जाते हैं।

आवश्यक है कि सारे संदेहास्पद व्यक्तियों की जाँच हो एवं कुष्ठ रोग से प्रभावित पाये जाने पर उनका ईलाज करा दिया जाय। ससमय ईलाज कराने से कुष्ठ रोग बिल्कुल ठीक हो जाता है और विकृति होने की संभावना नगण्य होती है।

प्रदेश को कुष्ठ मुक्त कराना हमसब की सामूहिक जिम्मेवारी है अतः इस कार्यक्रम में यह नारा दिया गया है कि हाथ मिलाओ कुष्ठ मिटाओ।

विकृतियुक्त व्यक्ति अगर कुष्ठ रोग का ईलाज करा चुका है तो वे रोग का संक्रमण नहीं करता है। कुष्ठ रोगी की चिकित्सा सारे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर निःशुल्क उपलब्ध है। विकृतियुक्त व्यक्तियों को शल्य चिकित्सा निःशुल्क दी जाती है।

विकृतियुक्त व्यक्तियों के लिए सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत सरकार द्वारा पेंशन दिया जाता है। शुक्रवार को कुष्ठ निवारण के अवसर पर आयोजित संकल्प कार्यक्रम में श्री प्रमोद कुमार झा, अपर कार्यपालक निदेषक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, श्री खालिद अरषद, प्रषासी पदाधिकारी, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, श्री रविष किशोर, वरीय उपसमाहर्ता, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, श्री सुधीर कुमार, वरीय उपसमाहर्ता, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, डाॅ॰ सुरेन्द्र कुमार, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, डाॅ॰ एन. के. सिन्हा, अपर निदेशक (प्रतिरक्षण)-सह-राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी, UNICEF एवं SRU के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।