रुल ऑफ लॉ अगर स्टेब्लिश हुआ है तो इसमे सबसे बड़ी भूमिका जुडिसियरी की है :- मुख्यमंत्री

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पटना:- इफेक्टिव इन्वेस्टिगेशन, स्पीडी ट्रायल एण्ड टाईमली जस्टिस पर आज अधिवेशन भवन में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज इस समापन बैठक में मुझे शामिल होकर खुशी हो रही है। सेमिनार में जिन छह ग्रुपों द्वारा चर्चा की गई, जो मुख्य बातें बतायी गई, उनके सुझाव को सबने सुना। उस ग्रुप में न्यायमूर्ति और अधिकारी भी थे। मुझे याद है अक्टूबर 2006 में हाईकोर्ट के इनिसिएटिव से इसी तरह का दो दिन का कार्यशाला आयोजित हुआ था, जिसमें मैं शामिल हुआ था। उसमें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश अन्य अधिकारीगण भी शामिल हुए थे। बहुत अच्छी चर्चा हुई थी, उसका बेहतरीन परिणाम सामने आया था।

हमारा संविधान कहता है कि रुल ऑफ लॉ होना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति लोगों को भरोसा और विश्वास रहना चाहिए, इसके लिए लेजिस्लेटर, जुडिसियरी और एक्जक्यूटिव बॉडी अपनी तरह से अपनी-अपनी जिम्मेवारी पर निर्वहन करते हैं, जिससे यह संभव होता है। उस समय बिहार की जो स्थिति थी, सबको मालूम है। समय सीमा पर ट्रायल नहीं होता था, अपराधी छूट जाते थे, कानून का डर नहीं रहता था। हमने जल्द से जल्द मुकदमों के ट्रायल पर जोर दिया। खासकर आर्म्स एक्ट क्योंकि इसमें दो-तीन ही गवाह होते थे और ज्यादातर सरकारी होते थे। वर्ष 2000 में जब राज्य का बंटवारा हुआ था तो हमारे कुछ अधिकारी झारखण्ड राज्य में चले गए, उनका कैडर बदल गया। मैंने कहा कि जितने भी विटनेश अधिकारी हैं, उनका लिस्ट अपडेट किया जाए और इसके बाद इसका प्रभावकारी परिणाम सामने आया। ट्रायल तेजी से हुआ और समय सीमा के अंदर सजा मिली।

रुटिन ट्रायल में भी तेजी आयी। वर्ष 2006 में कुल कनविक्ट्स की संख्या 6,839, 2007 में 9,853, वर्ष 2008 में 12,007, वर्ष 2009 में 13,146, वर्ष 2010 में 14,311 रही, जो शुरु में बढ़ते क्रम को दर्शा रहा है लेकिन बाद में यह संख्या घटने लगी और वर्ष 2016 में इसकी संख्या घटकर मात्र 5,508 हो गयी। उस समय थाना में एफ0आई0आर0 के लिए कागज नहीं हुआ करता था, गाड़ी खराब थी, पुराने हथियार थे, अन्य संसाधनों की कमी थी। हमने उसके लिए तीन कैटेगरी में थाने को बांटा। फंड की व्यवस्था की, यह फंड रोटेटिंग था, जिसमें राशि खर्च होने पर फिर से उतना पैसा आ जाता था। दारोगा को किसी काम के लिए बाहर जाना हो, किसी को हाजिर कराना हो, इन सब पर खर्च के लिए पैसा दिया गया। विटनेश समय पर एपियर्ड होते रहे और ट्रायल घटा। उस जमाने में कितना कुछ किया गया। वर्ष 2007 में बिहार पुलिस एक्ट बना, सुप्रीम कोर्ट में भी कहा गया था कि लॉ एंड ऑर्डर और इन्वेस्टिगेशन का अलग-अलग विंग होना चाहिए, इसके लिए अलग-अलग एसआई को जिम्मा दे दिया गया। हम तो शुरु से लगे हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत अच्छी बात है कि जुडिसियल एकेडमी में एस0पी0 की ट्रेनिंग होनी चाहिए। मैं तो कहता हूं कि छोटा-छोटा कोर्स दारोगा के लिए भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी इन्वेस्टिगेशन कर रहे हैं, उनको समय पर डॉक्यूमेंट तैयार करना चाहिये और तुरंत डॉक्यूमेंट दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार हर प्रकार की सहायता करती है। जुडिसियल की तरफ से जो भी पद का डिमांड आता है, उसको भी पूरा करते हैं। पुलिस की नियुक्ति भी उसी विभाग के अधिकारीगण करते हैं तो हमलोग का काम है प्रोसिजियोर बनाना, ट्रांसपैरेंट तरीका बनाना, गाईड लाइन बनाना, ये सब हमलोगों का काम है। हमलोग की तरफ से किसी भी चीज में विलम्ब नहीं होता है। जितने स्वीकृत पद हैं, वो भर नहीं पा रहे हैं। पदों पर नियुक्ति आपको करनी है। पद सृजित करना हमारा काम है। नियुक्ति के लिए तो अलग-अलग संस्थाएं हैं, वो देखें तेजी से हो जाए। जब पहले टेक्नोलॉजी उतना डेवलप नहीं था, उस समय ए0डी0जी0, मुख्यालय प्रत्येक दिन प्रत्येक एस0पी0 से बात करते थे। उस समय दो चीजें तय की गयी थी। एक सरकारी गवाह को ससमय हाजिर करना और ए0डी0जी0 मुख्यालय द्वारा उसकी मॉनिटरिंग करना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए सरकार को इन्वेस्टमेंट के लिए कोई दिक्कत नहीं है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से विटनेश हो जाए, ट्रॉयल हो जाए। आज की टेक्नोलॉजी लागू हो जाए। चाहे अगर पद का सृजन करना हो, टेक्नोलॉजी एडॉप्ट करना हो, संसाधन उपलब्ध कराना हो, सब उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि राज्य का पहला काम पब्लिक ऑर्डर है एवं लॉ एंड ऑर्डर को देखना है। मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री के स्तर पर समय-समय पर बैठक होती है। रुल ऑफ लॉ में कोई दिक्कत नहीं हो, उस पर चर्चा होती है। इसके लिए मैंने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा था कि एक वर्कशॉप रखवाइये, इससे फायदा होगा। 15 अगस्त को हम हमेशा ये चर्चा करते हैं कि रुल ऑफ लॉ अगर स्टेब्लिश हुआ है तो इसमे सबसे बड़ी भूमिका जुडिसियरी की है। अगर समय पर सजा नहीं होगी, तो भय व्याप्त नहीं होगा। इसमें न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। नए टेक्नोलॉजी आ रहे हैं, नई तरह की प्रवृति से क्राइम की प्रवृति भी अलग-अलग तरीके से बदलती रहेगी।

यह सब देखना हम सब का दायित्व है। लोगों में भय का नहीं, भरोसे का भाव पैदा होना चाहिए। मुकदमों का ट्रायल समय पर हो, जो जरुरी चीजें हैं, उनके इंतजार में कोई दिक्कत नहीं हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आग्रह करेंगे कि आज जो छह ग्रुपों में चर्चा हुयी है और जो सुझाव आये हैं, उसके आधार पर ठोस प्रस्ताव आना चाहिये कि सरकार को क्या-क्या करना है। सब चीजों का अध्ययन, आकलन कर तत्काल प्रस्ताव आना चाहिये ताकि इस वर्कशॉप का फायदा हो सके। यह वर्कशॉप अपने आप में प्रभाव छोड़ेगा, लोगों को लगेगा कि अपराध करोगे तो छूटोगे नहीं। मैं आश्वस्त करता हूं कि सरकार का पूरा सहयोग रहेगा। जिलास्तर पर डी0एम0 और एस0पी0, डिस्ट्रिक्ट जज की एक कमेटी बनी हुयी है। मैं हमेशा रिव्यू में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डी0एम0 और एस0पी0 से पूछता हूॅ कि आपस मिलकर दोनों तरफ की जरुरत की चर्चा हुई है कि नहीं। तीनों को फिजिकली उपस्थित रहना चाहिए क्योंकि आप अगर बैठिएगा तो इससे बहुत सारी समस्याओं का समाधान निकलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पी0पी0 साहब बैठे हैं, हमें भी जानकारी मिलती है कि अपनी बात ठीक से नहीं रखने के कारण समस्याएं आती हैं। कोर्ट के सामने तर्क से बात रखिए तो परिणाम सही निकलेगा। आपकी जिम्मेवारी है ठीक ढंग से रखना, निर्णय कोर्ट को करना है। मैं डी0एम0 से भी कहना चाहता हूं कि वो इन सब चीजों का समय पर मॉनिटर करें कि सरकारी वकील सही समय पर अपनी बातें रखें। हमलोगों ने बिहार में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट बनाया। स्पेशल कोर्ट एक्ट बना, जो भी लोक सेवक भ्रष्ट तरीके से धन अर्जित करेंगे उनकी संपत्ति जब्त होगी। शासन के अधिकार का दुरुपयोग करके धन अर्जन न करें। भ्रष्ट लोगों को भी ससमय कानून के मुताबिक कार्रवाई से बड़ा असर पड़ेगा। यह वर्कशॉप बहुत ही उपयोगी है और प्रभावकारी होगा। गवर्नमेंट की तरफ से तो हमलोग जो भी आवश्यक है उसको मंजूरी देंगे, चाहे पैसे की जरुरत हो, पद की जरुरत हो, टेक्नोलॉजी की जरुरत हो।
इस अवसर पर सभी छह ग्रुपों के सदस्यों ने दिए गए विषय पर अपने-अपने विचार एवं सुझाव रखे।

इस अवसर पर विधि मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, बिहार जूडिसियल अकादमी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार मण्डल, न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह, पटना उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशगण, महाधिवक्ता ललित किशोर, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक पी0के0 ठाकुर, प्रधान सचिव गृह आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, बिहार जूडिसियल अकादमी के निदेशक नवदीप कुमार पाण्डेय, बिहार विधि सेवा प्राधिकार के पदाधिकारीगण, बिहार पुलिस मुख्यालय के वरीय पदाधिकारीगण, सभी जिलों के जिला एवं सत्र न्यायाधीशगण, प्रमण्डलीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, जिला अभियोजन पदाधिकारी तथा लोक अभियोजक तथा अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।