लजीज व्यंजनों के साथ उठाएं सोनपुर मेले का आनंद

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वैशाली: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला यानी सोनपुर मेला शुरू हो चुका है। पूरे एक महीने तक चलने वाला यह मेला सोनपुर में गंगा और गंडक नदी के संगम पर हर साल लगता है, जिसमें लाखों देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। इस मेले की प्रसिद्धि वैसे तो सबसे बड़े पशु मेले के रूप में है, मगर यहां सभी प्रकार के सामान मिलते हैं।

सोनपुर मेला में प्रदेश की संस्कृति की खास पहचान स्वादिष्ट और लजीज व्यंजनों से भी रही है। लोक संस्कृति से जुड़े हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में भी भारतीय संस्कृति की खास पहचान लजीज व्यंजन की मिठास से घुली हुई है। कई परंपरागत स्वादिष्ट व्यंजनों की दर्जनों दुकानें सजी है। मेला में आने वाले देशी-विदेशी सैलानी भी इन लजजीज व्यंजनों की मिठास की खुशबू से इसके पास खिचे चले आते है। आइए आज लोक संस्कृति से जुड़ी खास व्यंजनों की चर्चा करते है।

लिट्टी और चोखा:

लिट्टी देखने में तो बाटी जैसी लगती है, लेकिन बहुत अंतर है। इसे आटे के अन्दर सत्तू भरकर बनाया जाता है और यह बैंगन, आलू और टमाटर को मिक्स कर चोखा तैयार कर किया जाता है और लिट्टी के साथ बड़े प्यार से खाई जाती है।

लिट्टी और चोखा के दिवाने न सिर्फ ग्रामीण इलाके बल्कि शहरी और सात समंदर पार विधेश से आए सैलानियों को भी अपनी ओर खास आकर्षित करती है। सोनपुर मेला में दर्जनों लिट्टी -चोखा की दुकानें खुली हुई है। आग पर पकाए गए लिट्टी को घी में डूबो कर आलू, बैंगन और टमाटर की चटनी व चोखा के साथ परोसा जाता है। मेला में दस रुपए में दो लिट्टी और चोखा बिक रहा है। शाम ढलते ही दूकानों पर भीड़ उमड़ पड़ती है।

चटपटे आचार से मुंह में पानी:

चटपटे आचार पर नजर पड़ते ही मुंह में पानी आ जाता है। वैसे बाजार में नामी कंपनियां मिक्सड व अलग-अलग फ्लेवर में आचार बेच रही है लेकिन गांव में हाथ से बनाए गए आचार की स्वाद ही निराली है। सोनपुर मेला के चिड़िया बाजार रोड में ऐसे आचार की एक दुकान लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। यहां आम, नीबूं, मिक्सड, मिर्च व अन्य फ्लेवर की आचार की खूब बिक रही है।

चटपटे मिक्सचर व भुजिया:

चटपटे मिक्सचर व भुजिया का स्वाच् भला किसे अच्छा नहीं लगता। बाजार में छोटे से लेकर कई नामचीन कंपनियों के मिक्सचर व भुजिया उपलब्ध है। लेकिन इन सबसे अलग हटकर सोनपुर मेले में मिक्सचर व भुजिया की एक ऐसी दुकान भी है जो अपने स्वाद की वजह से लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कभी सोनपुर मेला में घर में बनी मिक्सचर व भूजिया की सिर्फ एक दुकान हरिहरनाथ मंदिर रोड में लगा करती थी लेकिन इस बार मेला क्षेत्र में कई जगहों पर मिक्सचर व भूजिया की दुकानें खुल गई है।

मेले में मियां मिठाई व खजूर:

हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला घुमने आए और मियां मिठाई तथा खजूर का स्वाद अगर आपने नहीं चखा तो शायद आपका मेला भ्रमण आधा-अधूरा रह जाएगा। अपनी विशेष बनावट व स्वाद की वजह से ये मिठाई पिछले कई दशकों से लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेला क्षेत्र के चिड़िया बाजार रोड में मियां मिठाई व खजूर की आधा दर्जन से अधिक दुकानें सजी हुई है। यहां लोग जमकर इसके स्वाद का आनंद उठा रहे हैं।

गुड़ की जलेबी:

गुड़ की जलेबी का सोनपूर मेला में महत्व बढ़ जाता है। वैसे आम दिनों में गुड़ की जलेबी मुश्किल से ही मिलती है लेकिन मेला में इसकी जमकर बिक्री होती है। नखास, गज-ग्राह चौक, हरिहरनाथ मंदिर रोड़, चिड़िया बाजार, गाय बाजार आदि में गुड़ की जलेबी की दर्जनों दुकाने सजी है। मेला में इस बार गुड़ की जलेबी साठ से अस्सी रुपए किलो तक बिक रही है।