लाली पहाड़ी पर तीसरी बार खुदाई के लिए सरकार से मिली हरी झंडी, डीएम ने खुदाई कार्य करवाया शुभारंभ

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बिहार सरकार ने लखीसराय के ऐतिहासिक लाली पहाड़ी को बौद्ध सर्किट से जोड़कर जिलावासियों को बिहार सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से तोहफा देने का काम किया है। लखीसराय जिला इसी के साथ पर्यटन मानचित्र पर अपना स्थान पाने में सफलता हासिल कर ली है। वहीं दो चरणों की खुदाई में लाली पहाड़ी में अबतक की मिली सफलता, प्राप्त पुरातात्विक भग्नावशेषों के गहन अध्ययन के बाद लाली पहाड़ी के तीसरे चरण की खुदाई का आदेश भारतीय पुरातत्व विभाग ने दे दिया है। साथ ही बिहार सरकार ने पहाड़ी के तीसरे चरण की खुदाई के लिए हरी झंडी दे दी है ।

बालगुदर टीला, नोनगढ़, सत्संडा, घोसीकुंडी बिछवे पहाड़, उरैन, लय पहाड़ी सहित कई ऐसे स्थान है, जिन सबको भी बिहार सरकार द्वारा संरक्षित स्थल घोषित किया गया है | जिला के उक्त सभी स्थलों की भी खुदाई की चर्चा है। इसके अलावे अशोक धाम के ईद गिर्द भी कई टीलों पर पुरातत्व विभाग की पैनी नजर है। आधुनिक यंत्रों से कई स्थलों का सर्वेक्षण भी किया जा चुका है।

लाली पहाड़ी की खुदाई निदेशक पुरातत्वविद डा अनिल कुमार के अनुसार बौद्ध मठ से जुड़े अलग-अलग महत्वपूर्ण गुप्त स्थलों पर खुदाई की जरूरत है। जिसमे महिला बौद्ध भिक्षुओं के अंदर ही अंदर स्नान की सुरंगनुमा पथ जो कालांतर मिट्टियों चट्टानों से भर के अपना वजूद लोगो की नजरों में खो चुका है। जिसके खुलासा के बिना बौद्ध मठ में स्थित चारों कोणों पर स्थित प्रहरी द्वार, मंदिर, साधना स्थली, पूजा कक्षों के भग्नावशेषों की प्राप्ति अधूरी मानी जाएगी। ज्यों ज्यों खुदाई आगे बढ़ती जा रही है त्यों त्यों खुदाई कार्य भी बढ़ती जा रही है।

डीएम शोभेन्द्र कुमार चौधरी ने कहा कि लखीसराय ऐतिहासिक धरोहर लाली पहाड़ी पर तीसरी बार खुदाई के लिए सरकार से हरी झंडी मिल गई है आज से तीसरी बार विधिवत खुदाई कार्य शुभारंभ किया गया है। शान्ति निकेतन कोलकाता के प्रोफेसर अनील कुमार के देखरेख में खुदाई कार्य चलता रहेगा। फिलहाल भवन निर्माण विभाग एवं विधुत विभाग के द्वारा अन्य व्यवस्था की जा रही हैं। खुदाई के बाद सीसीटीवी कैमरे, एवं सभीतरह की सौन्दर्यीकरण किया जाएगा।