लोगों को हथियार के साथ-साथ मिले सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण: आरसीपी सिंह

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पटना आम्र्स अमेंडमेंट बिल 2019 पर मंगलवार को राज्यसभा में बहस में भाग लेते हुए जनता दल यूनाइटेड के सांसद आरसीपी सिंह ने इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हथियारों के रखने के कानून में कई बार संशोधन हुआ है। इसमें इस बार हथियारों की संख्या घटाने का प्रावधान किया गया है। सांसद ने लाइसेंसी हथियारों के मामले में मिलने वाले गोलियों के एक्सपायरी डेट का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के हथियारों के साथ मिलने वाले गोलियों में कोई एक्सपायरी डेट नहीं रहता है। इसका जिक्र रहना चाहिए। कानून के तहत लोगों को हथियार मिलता है। ऐसे मिलने वाले बंदूकों को लेकर एक ब्रीफिंग होनी चाहिए। जिन्हें बंदूक दिए जाते हैं, उन्हें इसके बारे में एक जानकारी दी जानी चाहिए। सुरक्षा के मानकों के बारे में जानकारी हो, यह सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।

सांसद ने कहा कि बंदूक के बारे में पूरी जानकारी नहीं रहने से दुर्घटना घटती है। बंदूक रखने वाले सुरक्षा मानकों की जानकारी के अभाव में या तो खुद धारा 302 के मुजरिम बन जाते हैं या फिर पास वाले को इसका मुजरिम बना देते हैं। हर्ष फायरिंग को लेकर कानून में जो प्रावधान किए गए हैं, वह बिल्कुल सही हैं। अब ऐसा करने वालों को जेल जाना होगा। लेकिन, अगर लोगों को बंदूक लेते समय ही इस प्रकार के कानून की जानकारी दी जाएगी तो ऐसी नौबत नहीं आएगी। जिनको लाइसेंस दिया जाए, उन्हें इसके हैंडलिंग की पूरी जानकारी व प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। हथियारों की संख्या कम किए जाने के मसले पर सांसद ने कहा कि जो लोग अधिक हथियार रखे होंगे, वे आगे क्या करेंगे, इसकी भी व्यवस्था होनी चाहिए। थानों के मालखाने की स्थिति देखी जानी चाहिए कि क्या वहां पर आने वाले हथियारों को रखा जा सकेगा?

सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि लोगों को अपने हथियार बेचने की भी सहूलियत मिलनी चाहिए। इस प्रकार का नियम भी होना चाहिए। इसके डिस्पोजल की व्यवस्था होनी चाहिए। सांसद ने कहा कि आज देश में अगर कोई भी व्यक्ति किसी एक्ट से डरता है तो वह है आर्म्स एक्ट। इस प्रकार के एक्ट में पुलिस ही गवाह होते हैं। ऐसे मामलों के निपटारे के लिए स्पीडी ट्रायल की व्यवस्था होनी चाहिए। बिहार में इस प्रकार की कार्रवाई हुई है। इससे आर्म्स एक्ट के अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने में कामयाबी मिलेगी। सांसद ने कहा कि इससे राजनीति में अपराधीकरण के बढ़ते प्रभाव पर भी रोक लगाने में कामयाबी मिलेगी।

सांसद ने हथियार के साथ गोली की संख्या मामले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हथियार के साथ 10 गोली रखने का नियम है। हथियार का लाइसेंस लोगों को सुरक्षा के लिए दिए जाते हैं। किसी को जान का खतरा होता है तो वह हथियार का लाइसेंस लेता है। ऐसे में अगर उस पर हमला होता है तो 10 गोलियों से क्या होगा? इसलिए गोली रखने की संख्या 10 से 25 होनी चाहिए। इसमें एक स्टैंडर्ड तय होना चाहिए। सरकार हथियारों की संख्या कम कर रही है तो गोलियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि वह अपनी सुरक्षा कर सके।