लोहार जनजाति ने गाड़ी को रोककर केंद्र सरकार के खिलाफ की जमकर नारेबाजी

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भोजपुर – केंद्र सरकार द्वारा जारी जनजाति अधिनियम 23/2016 में लोहार जाति को लोहारा किये जाने के बाद लोहार जाति को तमाम सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। लोहार जाति को लोहारा किये जाने के बाद कानून मंत्रालय और जनजाति मंत्रालय में मामला फंसा हुआ है जिसमें संशोधन को लेकर लोहार विकास मंच द्वारा प्रधानमंत्री कई बार पत्र लिखे जाने के बाद अबतक इनकी मांगों को पूरा नहीं किया जा सका है। जिससे नाराज होकर लोहार जनजाति के सैकड़ों लोग इकट्ठा होकर लोहार विकास मंच के बैनर तले आज सुबह आरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकें। आरा रेलवे स्टेशन के डाउन लाइन पर बक्सर पटना सवारी गाडी को रोककर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किये और अधिनियम में अविलंब संशोधन कर लोहारा शब्द को लोहार करने का मांग उठाएं।

ऐसा नहीं है कि बिहार लोहार का मामला कोई नया है, यह काफी पुराना है इससे पहले 1956, 1976, 2006 तक जनजाति अधिनियमों में लोहार शब्द का प्रयोग किया जाता रहा है मगर इसे अधिनियम 23/2006 में इसे लोहारा कर दिया गया जिससे इस जाति को कई योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। बता दें कि जनजाति अधिनियम 48 अब प्रचलन में नहीं रहा मगर नए अधिनियम 23/2016 में भी लोहार जाति को लोहारा ही अंकित किया गया है। रेल रोककर प्रदर्शन कर रहे लोहार विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमारा अधिकार पूर्व के तरह लोहार ही होता है। जब कोई अधिनियम रद्द या नया लागू किया जाता है तो अधिसूचना जारी की जाती है। प्रदर्शन कर रहे लोग अविलंब कानून मंत्रालय और जनजाति मंत्रालय से लोहार शब्द अधिनियम में अंकित कराने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह मामला कानून और जनजाति मंत्रालय के खींचतान में फंसा हुआ है जो कि बिहार के नेताओं के इशारे पर किया जा रहा है। साथ ही साथ लोहार विकास मंच ने कहा कि जो कोई हमारे अधिकार को रोकेगा उसे हम आगामी 2019 के आम चुनाव में सबक सिखाने का काम करेंगे।