वातावरण की सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा टाल विकास योजना समेकित कीट प्रबंधन कार्यक्रम अपनाया गया है : डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना – बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार में टाल क्षेत्र के 6 जिलों पटना, नालंदा, भागलपुर, मुंगेर, लखीसराय एवं शेखपुरा के 137481.96 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। टाल क्षेत्र को दलहन का कटोरा भी कहा जाता है। टाल क्षेत्र में मुख्य रूप से रबी दलहन ही महत्त्वपूर्ण फसल के रूप में उगाई जाती है। सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में टाल विकास योजना के संचालन हेतु 89.88444 लाख रूपये आवंटित किया गया है। टाल क्षेत्र का आकार कटोरीनुमा होने के कारण बाढ़ अथवा वर्षां का पानी इस क्षेत्र से धीरे-धीरे निकल पाता है। साथ ही, इस क्षेत्र के किसानों को सितम्बर-अक्टूबर माह में खरपतवार जैसे मोथा, बड़ी दुधी, छोटी दुधी, हजारा, अमरबेल की व्यापक समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए इन खरपतवारों पर प्रारम्भिक अवस्था में ही नियंत्रण करना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि किसानों को विभिन्न खरपतवारनाशी दवाओं के मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकत्तम 500 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा। इसके अलावा टाल क्षेत्र में दलहनी फसलों में प्रायः उखड़ा रोग एवं जाला कीट, फलीछेदक कीट से किसानों को काफी नुकसान होने की सम्भावना बनी रहती है, इनके समुचित प्रबंधन के लिए फफूँदनाशी एवं कीटनाशी दवाओं का 50 प्रतिशत अनुदान अधिकत्तम 500 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से कृषकों को उपलब्ध कराया जायेगा। साथ ही, इन क्षेत्रों के किसानों को जागरूक करने के लिए पर्याप्त संख्या में कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला का भी आयोजन किया जायेगा। सभी कार्यों में जैविक कीटनाशियों के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जायेगा।

मंत्री ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाये रखने एवं वातावरण की सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा टाल विकास योजना समेकित कीट प्रबंधन कार्यक्रम अपनाया गया है, ताकि कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ कृषि उपज की गुणवत्ता एवं पर्यावरण संरक्षण आदि में भी सुधार हो सके। डाॅ॰ कुमार ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य कम खर्च में अधिकत्तम दलहन फसल उत्पादन कर किसानों के शुद्ध लाभ में वृद्धि करना, विषरहित खाद्यान्न का उत्पादन कर पर्यावरण प्रदूषण को कम करना, मानव जीवन में रसायनों के प्रयोग से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करना, पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करना ताकि इकोलोजिकल संतुलन बना रहे, फसल सुरक्षा में रासायनिक कीटनाशियों को अंतिम शस्त्र के रूप में प्रयोग करना तथा प्रारंभिक अवस्था में खरपतवारनाशियों के उपयोग से दलहन उत्पादकता को बढ़ाना है। टाल विकास योजना के संचालन से राज्य में दलहन के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि होगी, जिससे किसान खुशहाल होंगे।