“विकास” को ढूंढ रही पहाड़ पर बसे गांव की नजरें

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दया नन्द तिवारी

रोहतास – सबकी नजरों के सामने पर सबसे है ओझल, यह पंक्ति कैमूर पहाड़ी पर बसे गांवों पर सटीक बैठती है जहाँ आज भी “विकास” ढूंढने से भी नहीं मिलते, यहाँ के लोगों के लिए विकास किसी “जुमला” से कम नहीं लगती। आज भी रोहतास जिला के पहाड़ी पर ऐसे कई गांव हैं जहां बिजली, सड़क, पानी, अस्पताल तथा स्कूल नहीं है, सड़क सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने से चेनारी प्रंखंड के उर्दगा, भड़कुडा सहित कई गांव की हालत बद से बदतर है। कभी नक्सल प्रभावित रोहतास जिला को राहत दिलाने तथा नक्सलवाद समाप्त करने में इन गांव के लोगों का सराहनीय प्रयास यहाँ के पन्नों में दर्ज है।

कैमूर पहाड़ी के उपरी छोर पर बसे इन गांव के लोगों के लिए विकास की बात हवा हवाई लगती है क्योंकि चुनाव के दिनों में नेताओं की वादा तथा आये दिन प्रशासन- पुलिस के आश्वासन से यहां के लोग उब चुके हैं, यहाँ के लोगों को राशन- किरासन के लिए भी करीब 1600 फीट पहाड़ी पर झांडीनुमें पतली रास्ते के सहारे आना- जाना होता है और पहाड़ से आने- जाने के लिए 5 किलोमीटर इसके अलावे चलने पड़ते हैं। किसी के स्वास्थ्य बिगड़ने पर इतना ही चलकर अस्पताल चारपाई तथा थैली से लाना इनके मजबुरी में आज भी शामिल हैं जो जिंदा हालत में अस्पताल पहुंचते है उसपर भगवान की कृपा है, नहीं तो कई ने रास्ते में ही ईलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। ऐसे में स्कूल की बात करनी बेईमानी है, सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है यहां तो बात करने के लिए मोबाइल में नेटवर्क भी नहीं आता। रौशनी के लिए ढीबरी युग ही है, यहाँ लोगों की तब आस जगी थी जब नक्सलियों के विरोध में प्रशासन- पुलिस के सहयोग से मोर्चा संभाल लड़ाई जारी रखी। इन्हें आस था कि शायद अब इन गांवो को भी विकास की किरणें बिखरेगी, लेकिन आज भी इन गांव में बुनियादी सुविधाओं की घोर उपेक्षा है।

ऐसा भी नहीं इन गांव में सांसद, विधायक, प्रशासन तथा पुलिस के वरीय- कनीय अधिकारी दौरा नहीं किया हो। यहाँ के लोगों को आज विकास को देखने के लिए नजरें टकटकी लगाए इंतज़ार कर रही है। लेकिन विकास से जबतक नजरें इनायत नहीं होता इन्हें जुमला लगता है, बड़ी बात है कि सांसद लोग आए गांवो को गोद लेकर विकास की बात करते हैं लेकिन ऐसे पहाड़ी पर स्थित गांवो की इनके भी नजरें इनायत नहीं होता, लेकिन मैदानी इलाकों में सड़क, बिजली, अस्पताल तथा स्कूल से परिपूर्ण वाले गांव को गोद लेकर विकास का ढिंढोरा पीटा जाता है।

उर्दगा गांव के राजेश खरवार ने बताया कि मुख्यमंत्री 7 निश्चय से भी गांव में बुनियादी सुविधा अबतक नहीं मिल सका। आये दिन विकास की हो रही घोषणा अब जुमला लगने लगा है, स्वास्थ्य बिगड़ने पर समय से अस्पताल नहीं पहुंचने पर अपने एकलौता पुत्र संतोष खरवार को गंवा बैठी सुरवती देवी सड़क नहीं होना बताती है। औरैया के उमेश यादव ने बताया कि सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है चेनारी प्रंखंड के अवरैया, भड़कुडा, उर्दगा गांव में मोबाइल में बात करने के लिए नेटवर्क भी नहीं आता, जिससे काफी परेशानी होता है। शंभु खरवार ने बताया कि मुख्यमंत्री सात निश्चय भी पहाड़ पर बसे गांवो पक्की नाली- गली हो या हर घर में नल का जल या घर में बिजली जैसे सुविधा अबतक नहीं दिला सका। जबकि इस योजना से वंचित होने पर अधिकारी को डिमोट करने की बात सरकार ने घोषणा की थी।

औरैया के आंगनबाडी सेविका सुषमा देवी ने बताया कि बच्चों को पोषाहार लाने में काफी परेशानी होता है साथ गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है लेकिन सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।