विकास प्रबंधन संस्थान के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने 24 छात्र-छात्राओं को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री प्रदान की

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पटना – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास प्रबंधन संस्थान के दूसरे दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होकर 24 छात्र-छात्राओं को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री प्रदान की। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सबसे पहले विकास प्रबंधन संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विकास प्रबंधन संस्थान किसी प्रबंधन संस्थान का नाम पहली बार पड़ा है। मैनेजमेंट की दृष्टि से डेवलपमेंट एक विचार है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि विकास का मतलब न्याय के साथ विकास है, जिसमें समाज के सभी समुदाय के हर व्यक्ति और हर इलाके का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हम जिला को इकाई मान लें तो उसके अंतर्गत आने वाले हर प्रखंड और गांव सभी का विकास होना चाहिए। पास आउट छात्र-छात्राओं से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए आपको पहल करनी चाहिए। विकास का मतलब इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ पुल-पुलिया, सड़क इत्यादि का निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाएं लोगों तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार आपदा प्रवण क्षेत्र में आता है, जो बाढ़ और सुखाड़ से जूझता रहा है। उन्होंने कहा कि अभी जो मौसम चल रहा है, उसमें अगलगी और भूकंप की घटनाएं ज्यादातर होती हैं क्योंकि बिहार सिस्मिक जोन-4 में आता है और आपदा का एक मुख्य कारण पर्यावरण की अनदेखी है। देश आजाद होने के बाद लोग बापू की बातों को भूल गए और विकास को लेकर लोगों के बीच ऐसी धारणा बनी कि पर्यावरण की चिंता ही लोगों ने छोड़ दी। लोगों ने कुदरत का ख्याल भी नहीं रखा। आज नदियों का प्रवाह अवरुद्ध हो गया है, पहले नदियों का पानी पीने योग्य होता था जो आज नहाने लायक भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि डेवलपमेंट का कॉन्सेप्ट अगर शुरू से होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती इसलिए पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए विकास का काम होना चाहिए। स्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा होना चाहिए, जो हर तरह की आपदा को झेल सके।

उन्होंने कहा कि पं0 राजकुमार शुक्ल के बार-बार आग्रह पर जब बापू चंपारण आये तब उन्होंने न सिर्फ किसानों की बात सुनी बल्कि उनकी बातों को दर्ज करवाने का काम भी शुरू किया। गाँधी जी की इस पहल का नतीजा इतना प्रभावी हुआ कि अग्रेरियन लॉ बना। अंग्रेजों को घुटने टेकने पड़े और किसानों को अंग्रेजों के अत्याचार से मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति भी महात्मा गांधी ने घूम-घूमकर चंपारणवासियों को जागृत किया। इसके लिए बापू ने गुजरात और महाराष्ट्र से लोगों को बुलाकर इस काम में लगाया जिन्होंने चंपारणवासियों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सफाई के प्रति अवेयरनेस पैदा की।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब सिर्फ अक्षर ज्ञान और कम्प्यूटर ज्ञान मात्र नहीं है। शिक्षित व्यक्ति को बुनियादी सुविधाओं की भी जानकारी होनी चाहिए। हमलोग तो अंग्रेजों का अनुकरण करते रहें हैं। उन्होंने कहा कि अब तो मॉडल बनाने की बात होने लगी है लेकिन किसी एक गांव या शहर को मॉडल बनाना ही काफी नहीं है। डेवलपमेंट का कॉन्सेप्ट ऐसा होना चाहिए, जिससे हर गांव को मॉडल बनाया जा सके। अगर लोगों को पीने का पानी और खुले में शौच से मुक्ति मिल जाए तो 90 प्रतिशत बीमारियों से उन्हें छुटकारा मिल जाएगा। जब हमने बिहार में शराबबंदी लागू की तो कुछ लोग तरह-तरह की बातें करने लगे। हमें ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए, जो स्वास्थ्य के अनुरूप हो। हेल्थ केयर के बाद भी तबीयत खराब होती है, इसके लिए हमें इलाज भी करवाना चाहिए और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का मानना था कि अगर हाशिए पर खड़े लोगों को विकास के काम से फायदा पहुंच रहा हो तो सही मायने में वही विकास है। उन्होंने कहा कि वंचित लोगों को विशेष अवसर के साथ-साथ बराबरी का अधिकार भी मिलना चाहिए, उन्हें इस तरह से सक्षम बनाने की आवश्यकता है ताकि वह अपने अधिकारों का सदुपयोग कर सकें। आधी आबादी यानी महिलाओं की क्षमता का सदुपयोग होने लगे तो समाज और देश काफी आगे बढ़ेगा। गांधी जी के विचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू के विचारों को हम जन-जन तक पहुंचा रहे हैं और इसके लिए कथावाचन भी करवा रहे हैं। महात्मा गांधी ने कहा था कि मेरा जीवन ही मेरा संदेश है। उन्होंने कहा कि अगर 10 से 15 प्रतिशत युवा पीढ़ी गांधी जी के विचारों को आत्मसात कर ले तो देश और दुनिया में काफी परिवर्तन आ जायेगा। उन्होंने कहा कि विकास के साथ समाज सुधार का काम भी होना चाहिए। बाल विवाह, दहेज प्रथा और बाल श्रम से हम समाज को छुटकारा दिलाने में कामयाब होते हैं तो दृश्य काफी बदल जाएगा।

दीक्षांत समारोह के माध्यम से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि आप जरूर कुछ ऐसा काम करेंगे, जिससे डेवलपमेंट का प्रोसेस आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में 11.2 प्रतिशत अर्बेनाईजेशन हुआ है, लोग शहरीकरण की बात करते हैं लेकिन मेरा मानना है कि गांव में ही अगर लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो जाय तो वह गांव छोड़कर शहर की ओर रुख नहीं करेंगे। सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल, हर घर बिजली कनेक्शन, हर घर शौचालय निर्माण के साथ-साथ हर घर तक पक्की गली-नाली का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्कीम यूनिवर्सल होना चाहिए, जिसका फायदा सबको मिले। जब हमने साइकिल योजना शुरू की, तब लड़कियों के बाद लड़कों के आग्रह पर उन्हें भी साइकिल मुहैया कराई गई। स्वयं सहायता समूह का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में शुरुआती दौर में 7 जिलों में 48 समूह शुरू किया गया, जिसे मॉडल के रूप में अपनाते हुए केंद्र ने उसे आजीविका का नाम दिया। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि अशिक्षित होने के बावजूद भी जीविका समूह से जुड़ी दीदियाँ बिहार से दूसरे राज्य में ट्रेनिंग देने जा रही हैं। उनके अंदर आत्मविश्वास का भाव पैदा हुआ है। डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए विकास प्रबंधन संस्थान की स्थापना की गई।

अधिकारियों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्रबंधन संस्थान के भवन निर्माण के लिए 15 एकड़ की बजाय अगर 25 एकड़ की जमीन देना पड़े तो यह हमें मंजूर है क्योकि विकास प्रबंधन संस्थान का भवन यूनिक और आइकोनिक होना चाहिए। इसके लिए जितने पैसे की आवश्यकता होगी, उसका प्रबंध राज्य सरकार करेगी। बिहार म्यूजियम का निर्माण जब कराया जा रहा था तब बहुत लोगों ने बहुत तरह के सवाल उठाए थे लेकिन आज स्थिति यह है कि बिहार म्यूजियम का भवन अपने आप में एक माॅडल है, जिसे लोग देखने आते हैं। देश दुनिया के लोग इसे देखकर काफी प्रसन्न होते हैं। विकास प्रबंधन सस्थान को आइडियल बनाना है। संस्थान का कैंपस ऐसा होना चाहिए कि आने वाले के मन में यह भाव पैदा हो कि हर दिन वह कुछ सीखे। उन्होंने कहा कि बिहार का विकास प्रबंधन संस्थान देश का एक आइडियल बनेगा। मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन के अंत में दीक्षांत समारोह में मौजूद लोगों को अपनी शुभकामनाएं दीं।

दीक्षांत समारोह को विकास प्रबंधन संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रेसिडेंट अनूप मुखर्जी, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक माधव चैहान, विकास प्रबंधन संस्थान के निदेशक हेमनाथ राव हनुमानकर, ग्रामीण विकास के सचिव अरविन्द चैधरी ने भी संबोधित किया। विकास प्रबंधन संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के प्रेसिडेंट अनूप मुखर्जी ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया। राष्ट्रगान के साथ दीक्षांत समारोह का समापन हुआ।

इस अवसर पर मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, जीविका के सी0ई0ओ0 बाला मुरगन डी0, प्रो0 तुषार शाह, प्रो0 त्रिलोचन शास्त्री, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की सी0ई0ओ0 रुकमणी बनर्जी सहित विकास प्रबंधन संस्थान के अध्यापकगण, कर्मचारीगण, छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।