विज्ञान पर भारी पड़ा अंधविश्वास, त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल गेट के सामने तांत्रिक का झाड़फूंक का खेल

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सुपौल – जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड मुख्यालय में अंधविश्वास का खेल धड़ल्ले से चल रहा है. मजे की बात तो यह है कि गुरुवार को अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज के मुख्य गेट पर ही तीन तांत्रिक के द्वारा झाड़-फूंक कि बाजार सजी थी. जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के हरिहरपट्टी पंचायत के एक गांव की प्रसव कराने आयी महिला मरीज को 3 दिन पूर्व अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार शिशु के उल्टा रहने पर उसे रेफर कर दिया गया. रेफर होने के उपरांत उन्हें एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया. जिसके बाद उन्होंने तंत्रिक का सहारा लेने लगी.तीन की संख्या में ओझा ने झारफूक शुरू कर दी.

हालांकि मीडिया की आने की भनक लगते ही तांत्रिक वहाँ से नो दो ग्यारह हो गए. सवाल उठता हैं कि यहां ईश्वरीय शक्ति के नाम पर मेडिकल साइंस और विज्ञान को चुनौती दी जा रही है. अंधविश्वास में पड़ कर शारीरिक कष्टों से छुटकारा पाने की चाहत लिए लोगों की कमी नहीं है. ऐसे लोग पहले तो ओझा-गुनियों के चक्कर में फंस कर अपना समय और पैसा बर्बाद करते हैं और जब समस्या सिर से उपर उठती है तो डॉक्टरों का सहारा लेते हैं.

विश्वास और अंधविश्वास के बीच तिनके भर का फ़र्क होता है. पढ़े-लिखे लोग भी ढोंगी, पाखंडियों की बातों में आकर कई बार ऐसे कृत्य कर बैठते हैं कि सोचकर रूह कांप जाती है.

रोज़ाना पाखंडी बाबओं के पर्दाफ़ाश की ख़बरें इस बात का सुबूत है कि किस तरह से सैंकड़ों लोग एक अज्ञानी के ऊपर बिना-सोचे समझे भरोसा कर लेते हैं. अंधविश्वास का शिकार पढ़े-लिखे लोग तो होते ही हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा संवेदनशील होते हैं पिछड़े और कम पढ़े-लिखे लोग, जिन्हें समाज में उचित सम्मान और ज़रूरी सुविधाएं नहीं मिलती, भूत-प्रेत, पिशाच, डायन का ज़िक्र हमें दादी-नानी की कहानियों में मिलता है. लेकिन बहुत से लोग इन पर विश्वास भी करते हैं. इन पर विश्वास करने वालों का ये भी मत है कि भूत और डायन किसी के शरीर पर कब्ज़ा कर के उनको अपनी हुक़्म का ग़ुलाम बना लेते हैं.

इसके बाद ये लोग अपने नाते-रिश्तेदारों का इलाज करवाने के लिए ओझा, तांत्रिक और ढोंगी बाबाओं पास जाते हैं. लोग डॉक्टर से ज्यादा ऐसे ढोंगी तांत्रिकों पर यकीन करने लगे हैं। इन बहुरूपियों की शिकार ज्यादातर महिलाएं हो रही है और महिलाओं के जरिए पुरुष भी इनके शिकार बन रहे हैं। विड़ंबना तो यह है कि जिस जादू-टोने को विज्ञान मानने से इनकार करता रहा है आज उसी जन्मी तकनीक के सहारे तंत्र-मंत्र का जाल बिछा हुआ है।